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Child Development
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) की तात्विक, तार्किक एवं विकासात्मक विशेषताओं का गहन विश्लेषण करने पर, इस अवस्था के दौरान बालकों में विकसित होने वाली 'संरक्षण' (Conservation), 'विकेंद्रीकरण' (Decentration), और 'वर्गीकरण' (Classification) जैसी क्षमताओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 7 से 11 वर्ष) में बच्चों का चिंतन अधिक तार्किक और व्यवस्थित हो जाता है। इस चरण की सबसे मुख्य विशेषता 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता का विकास है, जिसके तहत बालक यह समझ जाते हैं कि यदि किसी वस्तु (जैसे पानी या मिट्टी के गोले) का आकार बदल दिया जाए, तो भी उसकी मात्रा या द्रव्यमान में कोई अंतर नहीं आता। यह क्षमता 'विकेंद्रीकरण' (Decentration - एक ही समय में किसी वस्तु के कई पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना) और 'प्रतिलोमनीयता' (Reversibility) के मानसिक गुणों के कारण विकसित होती है। इस विषय पर विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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अधिगम के क्षेत्र में एडवर्ड थार्नडाइक के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत', इवान पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन' तथा बी.एफ. स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' के तात्विक और तुलनात्मक स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई जीव किसी पूर्व निश्चित उद्दीपक (Stimulus) की प्रतीक्षा किए बिना अपनी स्वैच्छिक अनुक्रियाओं द्वारा पर्यावरण पर प्रभाव डालता है और अपने व्यवहार के परिणामों—विशेषकर सकारात्मक या नकारात्मक 'पुनर्बलन' (Reinforcement)—के आधार पर उस अनुक्रिया की आवृत्ति को बढ़ाता या घटाता है, तथा पावलव के सिद्धांत में उद्दीपक का अनुबंधन से पूर्व होना अनिवार्य है, तो इन तीनों सिद्धांतों के मूलभूत अंतर और अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक एवं सत्य है?
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