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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका के अंतर्गत राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों, अध्यादेश निर्माण और मुख्यमंत्री के संवैधानिक दायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल को किसी ऐसे विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, जिस विषय तक राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूर्णतः क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है, और सैन्य न्यायालयों (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी राज्यपाल को क्षमादान की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की आयु राज्य विधानसभा के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद समाप्त हो जाती है, और यदि इस बीच राज्य विधानमंडल के दोनों सदन (द्विसदनीय होने पर) अध्यादेश के अस्वीकृत होने का संकल्प पारित कर देते हैं, तो अध्यादेश की अवधि छह सप्ताह की समाप्ति से पहले ही समाप्त हो जाती है।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन के संचालन और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और राज्यपाल द्वारा राज्य के प्रशासन से संबंधित मांगी गई किसी भी सूचना को देने से मुख्यमंत्री इनकार कर सकता है यदि वह मामला गोपनीय श्रेणी के अंतर्गत आता हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल की क्षमादान शक्ति का दायरा राज्य की कार्यपालिका शक्ति के समरूप होता है। राज्यपाल मृत्युदंड को पूर्णतः क्षमा नहीं कर सकता (यह शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है) और न ही सैन्य न्यायालयों के दंड पर यह लागू होती है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश विधानमंडल के पुनः समवेत होने के 6 सप्ताह बाद निष्प्रभावी हो जाता है, और यदि विधानमंडल इसे अस्वीकृत कर दे तो यह उससे पहले भी समाप्त हो सकता है। कथन 3 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 167 के तहत मुख्यमंत्री के लिए राज्यपाल द्वारा मांगी गई प्रशासन और विधान से संबंधित सूचनाओं को देना अनिवार्य है; वह गोपनीयता का हवाला देकर राज्यपाल को सूचना देने से मना नहीं कर सकता। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के अध्यायों का संदर्भ ले सकते हैं।
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