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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों और उनकी विधिक एवं न्यायिक प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अतिरिक्त अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम तथा रूढ़ि या प्रथा (Custom or Usage) को भी शामिल किया गया है, यदि वे मूल अधिकारों से असंगत हैं तो उनका शून्य होना तय है।
- 2. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के सदस्यों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगा सके या उन्हें समाप्त कर सके ताकि उनके द्वारा अपने कर्तव्यों का उचित निर्वहन और अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके, तथा इस प्रकार का कानून बनाने की शक्ति केवल और केवल संसद के पास है, राज्य विधानमंडलों के पास नहीं।
- 3. अनुच्छेद 34 के तहत संसद को किसी भी क्षेत्र में मार्शल लॉ (Martial Law) लागू होने के दौरान वहां की गई किसी भी राजकीय कार्रवाई या दिए गए दंड को वैध बनाने के लिए 'क्षतिपूर्ति अधिनियम' (Indemnity Act) बनाने का अधिकार प्राप्त है, और यह शक्ति राज्य विधानमंडलों को भी सह-विस्तार रूप में प्राप्त होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 13(3)(a) के अनुसार 'विधि' के अंतर्गत भारत में कानून का बल रखने वाला कोई भी अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम, अधिसूचना, और रूढ़ि या प्रथा शामिल है। यदि इनमें से कोई भी मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो वह मात्रा (To the extent of such inconsistency) तक शून्य होगी।
कथन 2 सही है: अनुच्छेद 33 के तहत सशस्त्र बलों, लोक व्यवस्था बनाए रखने वाले बलों आदि के मूल अधिकारों के निर्बंधन या निरसन की शक्ति केवल और केवल 'संसद' को दी गई है, राज्य विधानमंडल को ऐसी विधि बनाने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 34 के अंतर्गत मार्शल लॉ के प्रवर्तन के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने या उसकी बहाली के लिए संसद को क्षतिपूर्ति अधिनियम (Indemnity Act) बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, यह शक्ति राज्य विधानमंडलों को प्राप्त नहीं है।
अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत नोट्स पढ़ें।
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भारतीय संविधान के भाग-III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त 'समानता का अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) और 'स्वतंत्रता के अधिकार' (अनुच्छेद 19-22) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रयुक्त 'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) का वाक्यांश मूल रूप से ब्रिटिश विधि से लिया गया है जो एक नकारात्मक अवधारणा है, जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति के पक्ष में कोई विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए, जबकि 'विधियों का समान संरक्षण' (Equal protection of the Laws) अमेरिकी संविधान से लिया गया एक सकारात्मक दृष्टिकोण है जो समान परिस्थितियों में समान व्यवहार की अपेक्षा करता है।
2. अनुच्छेद 19(1)(g) के अंतर्गत कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता के अधिकार के अधीन राज्य को यह शक्ति प्राप्त है कि वह किसी भी ऐसे व्यवसाय या पेशे को चलाने के लिए तकनीकी योग्यता या व्यावसायिक अहर्ताओं को अनिवार्य बना सकता है, किंतु राज्य को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी व्यापार या व्यवसाय का पूर्ण या आंशिक एकाधिकार (State Monopoly) स्वयं या किसी निगम के माध्यम से स्थापित कर सके।
3. अनुच्छेद 20 के खंड (3) के तहत प्रदान किया गया 'स्वयं के विरुद्ध अभियुक्त होने से संरक्षण' (Protection against Self-Incrimination) का अधिकार न केवल आपराधिक मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायालय में लागू होता है, बल्कि यह किसी पुलिस अधिकारी द्वारा की जाने वाली पूछताछ या प्रकटन के स्तर पर भी पूर्ण रूप से उपलब्ध है, तथा इसके अंतर्गत अभियुक्त को अपनी लिखावट या अंगूठे के निशान देने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) और स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों का प्रावधान मूल संविधान का हिस्सा नहीं था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV-A और अनुच्छेद 51-A के तहत अंतःस्थापित किया गया था, जिसमें प्रारंभ में कुल 10 मूल कर्तव्य जोड़े गए थे।
2. स्वर्ण सिंह समिति ने सिफारिश की थी कि नागरिकों द्वारा मूल कर्तव्यों का पालन न करने पर संसद को उनके लिए किसी भी प्रकार के जुर्माने या दंड का प्रावधान करने की शक्ति होनी चाहिए, जिसे तत्कालीन सरकार द्वारा संविधान संशोधन में पूरी तरह से स्वीकार कर लिया गया था।
3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में एक नया मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रपाल्य (Ward) के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करना माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य बनाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के परस्पर संबंधों तथा उनके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल संपूर्ण देश में या उसके किसी विशिष्ट भाग पर एक साथ उद्घोषित किया जा सकता है, तथा आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार केवल तभी स्वतः निलंबित होंगे जब आपातकाल का आधार 'युद्ध या बाह्य आक्रमण' (External Aggression) हो, न कि 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion)।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा आपातकाल के दुरुपयोग को रोकने के लिए अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर इसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को जोड़ा गया, और यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इसका निर्णय लिखित रूप में संसूचित किया गया हो।
3. 44वें संशोधन के माध्यम से ही यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के प्रवर्तन के दौरान भी संविधान के अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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प्रकाश तरंगे किस प्रकार की तरंगे हैं?
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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 249 के अंतर्गत संसद को राज्य सूची (State List) के किसी विषय पर राष्ट्रीय हित में कानून बनाने की शक्ति प्रदान की गई है। इस विशेष प्रावधान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस प्रकार का कानून बनाने के लिए राज्य सभा को उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से एक प्रस्ताव पारित करना अनिवार्य है।
2. इस उपबंध के तहत बनाया गया संसद का कानून अधिकतम तीन वर्षों की अवधि के लिए लागू रहता है, हालांकि इसे और आगे बढ़ाया जा सकता है।
3. राज्य सूची के इस विषय पर कानून बनाने की शक्ति केवल राज्य सभा के पास होती है, और लोकसभा इस प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं निभाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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