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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त 'समानता का अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) और 'स्वतंत्रता के अधिकार' (अनुच्छेद 19-22) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रयुक्त 'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) का वाक्यांश मूल रूप से ब्रिटिश विधि से लिया गया है जो एक नकारात्मक अवधारणा है, जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति के पक्ष में कोई विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए, जबकि 'विधियों का समान संरक्षण' (Equal protection of the Laws) अमेरिकी संविधान से लिया गया एक सकारात्मक दृष्टिकोण है जो समान परिस्थितियों में समान व्यवहार की अपेक्षा करता है।
- 2. अनुच्छेद 19(1)(g) के अंतर्गत कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता के अधिकार के अधीन राज्य को यह शक्ति प्राप्त है कि वह किसी भी ऐसे व्यवसाय या पेशे को चलाने के लिए तकनीकी योग्यता या व्यावसायिक अहर्ताओं को अनिवार्य बना सकता है, किंतु राज्य को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी व्यापार या व्यवसाय का पूर्ण या आंशिक एकाधिकार (State Monopoly) स्वयं या किसी निगम के माध्यम से स्थापित कर सके।
- 3. अनुच्छेद 20 के खंड (3) के तहत प्रदान किया गया 'स्वयं के विरुद्ध अभियुक्त होने से संरक्षण' (Protection against Self-Incrimination) का अधिकार न केवल आपराधिक मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायालय में लागू होता है, बल्कि यह किसी पुलिस अधिकारी द्वारा की जाने वाली पूछताछ या प्रकटन के स्तर पर भी पूर्ण रूप से उपलब्ध है, तथा इसके अंतर्गत अभियुक्त को अपनी लिखावट या अंगूठे के निशान देने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 14 में वर्णित 'विधि के समक्ष समता' ब्रिटिश मूल की एक नकारात्मक अवधारणा है जिसके तहत किसी को विशेष अधिकार प्राप्त नहीं होते, वहीं 'विधियों का समान संरक्षण' अमेरिकी संविधान से प्रेरित एक सकारात्मक अवधारणा है। कथन 2 गलत है क्योंकि प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा अनुच्छेद 19(6) में संशोधन करके राज्य को यह स्पष्ट शक्ति दी गई है कि वह किसी भी व्यापार, व्यवसाय, उद्योग या सेवा को पूर्ण या आंशिक रूप से अपने नियंत्रण में लेकर 'राज्य एकाधिकार' (State Monopoly) स्थापित कर सकता है। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 20(3) के तहत आत्म-अभिशंसन से संरक्षण का अधिकार पुलिस जाँच और न्यायालय दोनों स्तरों पर उपलब्ध है, हालाँकि 'तमिलनाडु राज्य बनाम बॉम्बे हेनार्ड' और 'सईदुद्दीन मामले' के अनुसार अंगूठे के निशान, हस्ताक्षर या रक्त के नमूने जैसी भौतिक साक्ष्य देना इस अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जाता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
Related Questions
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उच्च न्यायालयों की स्थापना से संबंधित प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग (Integral Part) है और संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन कर सकती है।
3. 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्व के निर्णय को बदलते हुए यह माना कि प्रस्तावना संविधान का अंग है तथा इसके मूल ढांचा (Basic Structure) को छोड़कर संसद इसमें संशोधन कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSCs) की स्वतंत्रता, उनके सदस्यों की पदावधि, निष्कासन प्रक्रिया तथा उनके क्षेत्राधिकार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 317 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को केवल 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है, और कदाचार के इस आरोप की जाँच उच्चतम न्यायालय द्वारा की जाती है, जिसकी सलाह राष्ट्रपति के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होती है।
2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य का कार्यकाल अपने पद ग्रहण करने की तिथि से 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले हो) होता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष की अवधि या 62 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक होता है।
3. अनुच्छेद 320 के अंतर्गत लोक सेवा आयोगों से परामर्श करना सभी मामलों में अनिवार्य है, और यदि सरकार आयोग की सलाह के विरुद्ध कोई निर्णय लेती है, तो उस निर्णय को संसद या राज्य विधानमंडल के समक्ष स्पष्टीकरण के साथ रखना संवैधानिक रूप से अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्यसभा के सदस्य का कार्यकाल क्या है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों (विशेषकर 42वें, 44वें और 86वें संशोधन) तथा राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को अंतःस्थापित किया गया, तथा यह भी प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा तभी कर सकता है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा ऐसा निर्णय लिखित रूप में राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है।
3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा भाग III में नया अनुच्छेद 21-A जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष तक की आयु के सभी बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाया गया, तथा इसके साथ ही अनुच्छेद 45 की विषय-वस्तु को संशोधित किया गया और भाग IV-A (मूल कर्तव्य) के तहत एक नया कर्तव्य (11वाँ) जोड़ा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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