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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की कार्यकारी, विधायी और वीटो शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित और विधानविषयक प्रस्तावों से संबंधित सभी विनिश्चय मंत्रिपरिषद के राष्ट्रपति को संसूचित करे, और राष्ट्रपति द्वारा मांगे जाने पर ऐसी सूचना प्रदान करे।
  2. 2. राष्ट्रपति को किसी संसद द्वारा पारित साधारण विधेयक पर अनुमति (Assent) देने, अनुमति रोकने या विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाने की शक्ति प्राप्त है (अनुच्छेद 111), किंतु यदि संसद उस विधेयक को संशोधनों के साथ या बिना संशोधनों के पुनः पारित कर देती है और राष्ट्रपति के पास भेजती है, तो राष्ट्रपति के लिए उस पर अपनी अनुमति देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य (Mandatory) हो जाता है।
  3. 3. राष्ट्रपति को प्राप्त 'निलंबकारी वीटो' (Suspensive Veto) की शक्ति धन विधेयक (Money Bill) के संबंध में भी समान रूप से लागू होती है, अर्थात् राष्ट्रपति धन विधेयक को भी संसद के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 78 के अनुसार प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह देश के प्रशासन और विधानविषयक प्रस्तावों से जुड़े सभी निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को दे। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 111 के तहत राष्ट्रपति साधारण विधेयक को संसद को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है, लेकिन यदि संसद उसे दोबारा पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति को अनुमति देनी ही पड़ती है। कथन 3 गलत है: राष्ट्रपति को धन विधेयक के संबंध में 'निलंबकारी वीटो' का अधिकार प्राप्त नहीं है; धन विधेयक को राष्ट्रपति के पूर्व-अनुमोदन से ही लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है, इसलिए राष्ट्रपति उसे पुनर्विचार के लिए नहीं लौटा सकता। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल का अध्ययन करें।
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