त्वरित लिंक्स
Indian Polity
14 views
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग का प्रावधान किया गया है, तथा दो या अधिक राज्यों के लिए संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) का गठन संबंधित राज्यों के अनुरोध पर संसद द्वारा कानून बनाकर किया जाता है, न कि राष्ट्रपति के अध्यादेश द्वारा।
- 2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को हटाने की शक्ति राज्यपाल के पास होती है, भले ही जाँच उच्चतम न्यायालय द्वारा की जाती हो।
- 3. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य अपने पद की अवधि समाप्त होने पर भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के पात्र नहीं होते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होगा। दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर संसद विधि द्वारा संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) का गठन कर सकती है। कथन 2 गलत है: राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है, राज्यपाल के पास नहीं; हालांकि उन्हें हटाने के आधार और प्रक्रिया (जैसे साबित कदाचार पर उच्चतम न्यायालय की प्रतिवेदन के पश्चात) वही होती है जो UPSC के सदस्यों के लिए है। कथन 3 सही है: संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष/सदस्य पुनः नियुक्ति के पात्र नहीं होते, किंतु SPSC का अध्यक्ष UPSC का अध्यक्ष/सदस्य या किसी अन्य SPSC का अध्यक्ष बन सकता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (भाग-I, अनुच्छेद 1-4) के प्रावधानों और उनकी विधायी प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा ऐसे नियमों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, और इस अनुच्छेद के अंतर्गत भारतीय संघ में केवल उन विदेशी भू-भागों को शामिल किया जाता है जो पहले से भारत का अभिन्न अंग नहीं थे।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य के क्षेत्रफल को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने अथवा नए राज्य का निर्माण करने संबंधी कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बाद ही संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति को ऐसा विधेयक संसद में प्रस्तुत करने से पूर्व संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजना अनिवार्य होता है, बशर्ते राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए संवैधानिक रूप से हमेशा बाध्यकारी हो।
3. अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों का प्रवेश, गठन, सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसे कानूनों को संसद द्वारा साधारण बहुमत और सामान्य विधायी प्रक्रिया के माध्यम से ही पारित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction), जनहित याचिका (PIL) तथा न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण रिट जारी करने का अधिकार प्राप्त है, और यह अधिकार क्षेत्र उच्चतम न्यायालय के 'अनन्य' (Exclusive) मूल अधिकारों में आता है, जिसका अर्थ है कि उच्च न्यायालयों को इस संबंध में कोई रिट अधिकारिता प्राप्त नहीं है।
2. जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा को भारतीय न्यायशास्त्र में न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्णा अय्यर द्वारा विकसित किया गया था, जिसके अंतर्गत 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi) के पारंपरिक नियम को शिथिल करते हुए किसी भी लोक-हितैषी व्यक्ति या सामाजिक संगठन को पीड़ित पक्ष की ओर से न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की अनुमति दी गई है।
3. संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार उच्चतम न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) है, और उसे अपनी अवमानना के लिए, जिसमें सिविल अवमानना और आपराधिक अवमानना दोनों शामिल हैं, दंडित करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के बिना उच्चतम न्यायालय अपनी इस अवमानना की दंड-शक्ति का प्रयोग किसी उच्च न्यायालय या अधीनस्थ न्यायालय की अवमानना की रक्षा के लिए नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution), जिसे 22 जनवरी 1947 को संविधान सभा द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था, भारतीय संविधान की प्रस्तावना का मूल आधार बना।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में पहली और एकमात्र बार संशोधन किया गया, जिसके तहत इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्दों को जोड़ा गया।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) को कोई क्षति न पहुँचे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) और 'स्वतंत्रता के अधिकार' (अनुच्छेद 19-22) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 14 न केवल 'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) की गारंटी देता है, जो कि एक ब्रिटिश मूल की नकारात्मक अवधारणा है, बल्कि यह 'विधियों के समान संरक्षण' (Equal Protection of Laws) का भी उपबंध करता है, जिसे अमेरिकी संविधान से लिया गया है और यह एक सकारात्मक अवधारणा है जो तार्किक वर्गीकरण की अनुमति देती है।
2. अनुच्छेद 20(2) के अंतर्गत 'दोहरे जोखिम' (Double Jeopardy) के विरुद्ध संरक्षण केवल उसी स्थिति में प्राप्त होता है जब किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए एक ही बार अभियोजित और दंडित किया गया हो, और यह सुरक्षा भारतीय न्यायालयों के साथ-साथ विदेशी न्यायालयों या विभागीय (Departmental) प्राधिकरणों द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी समान रूप से लागू होती है।
3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता' के संरक्षण का अधिकार न केवल नागरिकों को बल्कि विदेशियों को भी उपलब्ध है, और मेनका गांधी वाद (1978) के पश्चात उच्चतम न्यायालय ने 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure established by law) के स्थान पर 'विधि की उचित प्रक्रिया' (Due process of law) के अमेरिकी सिद्धांत को समाहित करते हुए इसके दायरे में कई अन्य अधिकार भी जोड़े हैं।
→
भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा किसी भी राज्य के क्षेत्रफल में वृद्धि या कमी कर सकती है, उसके नाम या सीमाओं में परिवर्तन कर सकती है, किंतु इस प्रकार के किसी भी विधेयक को राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजे, भले ही राज्य विधानमंडल का मत संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी न हो।
2. 'बेरुबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि भारतीय क्षेत्र के किसी भू-भाग को किसी विदेशी देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए अनुच्छेद 3 के तहत सामान्य विधायी प्रक्रिया या साधारण बहुमत का उपयोग नहीं किया जा सकता है, बल्कि इसके लिए संविधान संशोधन अधिनियम (अनुच्छेद 368) की आवश्यकता अनिवार्य होती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 4 के अनुसार, अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों का प्रवेश, स्थापना या मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं और नामों में परिवर्तन करने के लिए बनाई गई विधियों को अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान का संशोधन नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसी विधियाँ संसद द्वारा साधारण बहुमत से पारित की जा सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.