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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत वर्णित मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनसे संबंधित न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण' के दायरे में सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से निजता का अधिकार (Right to Privacy), त्वरित विचारण का अधिकार (Right to Speedy Trial), और विदेशों जाने का अधिकार (Right to go abroad) को भी शामिल किया है, तथा यह अधिकार नागरिकों और विदेशियों दोनों को समान रूप से उपलब्ध है।
- 2. अनुच्छेद 32 के तहत 'संवैधानिक उपचारों का अधिकार' स्वयं में एक मूल अधिकार है, जिसे डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने 'संविधान की आत्मा और हृदय' कहा था, और इस अनुच्छेद के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत मूल अधिकारों के साथ-साथ सामान्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है।
- 3. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, पुलिस बलों, खुफिया एजेंसियों और लोक व्यवस्था बनाए रखने वाले बलों के सदस्यों के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित या निराकृत कर सके, ताकि उनके कर्तव्यों का उचित निर्वहन और अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके, तथा इस प्रकार के प्रतिबंध लगाने की विशेष शक्ति केवल राज्य विधानमंडलों के पास होती है, संसद के पास नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार की न्यायिक व्याख्या करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने 'के.एस. पुट्टास्वामी वाद (2017)' में निजता के अधिकार को और अन्य मामलों में त्वरित विचारण तथा विदेश यात्रा के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है। ये अधिकार नागरिकों के साथ-साथ कुछ सीमाओं के अधीन विदेशियों को भी प्राप्त हैं। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 32 एक मौलिक अधिकार है जिसके तहत सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन हेतु रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेषण, प्रतिषेध) जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता मूल अधिकारों के अतिरिक्त सामान्य कानूनी अधिकारों पर भी लागू होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि सशस्त्र बलों और पुलिस बलों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने या उन्हें निराकृत करने की शक्ति विशेष रूप से और केवल **संसद** के पास निहित है, राज्य विधानमंडलों के पास नहीं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
Related Questions
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भारतीय संविधान के भाग-I के अंतर्गत संघ एवं उसके राज्य क्षेत्रों (Articles 1-4) तथा राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित ऐतिहासिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को घटाने, बढ़ाने, उसका नाम बदलने या उसकी सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रकार का कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफ़ारिश पर ही संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है, किंतु राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वह विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजे और राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर दी गई राय (सुझाव) को मानना राष्ट्रपति तथा संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
2. भारत में राज्यों के पुनर्गठन के लिए गठित फ़ज़ल अली आयोग (राज्य पुनर्गठन आयोग, 1953) ने अपनी रिपोर्ट में भाषाई आधार को राज्यों के पुनर्गठन का एकमात्र और सर्वोपरि आधार के रूप में स्वीकार किया था, तथा उसने मूल संविधान में वर्णित राज्यों के चार श्रेणियों (Part A, B, C, और D) के वर्गीकरण को पूरी तरह से समाप्त करते हुए देश को 16 राज्यों और 3 संघ राज्य क्षेत्रों में विभाजित करने की संस्तुति की थी।
3. वर्ष 1960 के 'बेरूबारी यूनियन वाद' (Berubari Union case) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 3 के तहत प्रदत्त संसद की विधायी शक्तियों में भारतीय भू-भाग के किसी हिस्से को किसी विदेशी देश को सौंपने (Cession of territory to a foreign state) की शक्ति शामिल नहीं है, इसलिए भारत के किसी क्षेत्र को पाकिस्तान या अन्य देश को देने के लिए संविधान में संशोधन करना आवश्यक होता है, जिसके परिणामस्वरूप संसद द्वारा 9वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1960 पारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अपीलीय अधिकारिता (Appellate Jurisdiction) तथा संविधान के निर्वाचन से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 132 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय में अपील करने की अपीलीय अधिकारिता सिविल, आपराधिक या अन्य कार्यवाही से संबंधित किसी भी मामले में तब हो सकती है जब संबंधित उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दे कि मामले में संविधान के निर्वचन (Interpretation of Constitution) से संबंधित कोई सारवान प्रश्न अंतर्ग्रस्त है।
2. संविधान के अनुच्छेद 134क के तहत किसी उच्च न्यायालय द्वारा उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए प्रमाण-पत्र (Certificate) या तो उस उच्च न्यायालय द्वारा अपने निर्णय के तुरंत बाद मौखिक रूप से दिया जा सकता है या फिर किसी पक्षकार द्वारा दिए गए लिखित आवेदन पर दिया जा सकता है, जिसके लिए उच्च न्यायालय का यह संतुष्ट होना अनिवार्य है कि मामला उच्चतम न्यायालय में अपील योग्य है।
3. संविधान के अनुच्छेद 136 के अंतर्गत प्रदत्त 'विशेष अनुमति अपील' (Special Leave Petition - SLP) की शक्ति उच्चतम न्यायालय का एक विवेकीय (Discretionary) अधिकार है, जिसके तहत उच्चतम न्यायालय भारत के राज्य क्षेत्र में किसी भी न्यायालय या अधिकरण (Tribunal) द्वारा पारित किसी भी वाद, निर्धारण, दंडादेश या आदेश के विरुद्ध अपील करने के लिए विशेष अनुमति दे सकता है, और इस अधिकार का प्रयोग सैन्य न्यायाधिकरणों (Military Tribunals / Court Martial) के निर्णयों के विरुद्ध भी किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान सभा के सलाहकार कौन थे?
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'प्रेस की स्वतंत्रता' से संबंधित है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की शक्तियों, प्रधानमंत्री के कर्तव्यों तथा मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व और व्यक्तिगत जिम्मेदारी से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 69 के अनुसार उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय या उसके कृत्यों का निर्वहन करते समय राज्य सभा के सभापति के कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा और न ही वह उस अवधि के दौरान राज्य सभा के सभापति को मिलने वाले वेतन या भत्ते का हकदार होगा।
2. संविधान के अनुच्छेद 75(2) के प्रावधान के अनुसार मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, जिसका अर्थ है कि प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सलाह के बिना भी राष्ट्रपति किसी भी मंत्री को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर सकता है, क्योंकि यह राष्ट्रपति का एक विवेकशील (Discretionary) संवैधानिक अधिकार है।
3. संविधान के अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह दायित्व है कि यदि राष्ट्रपति किसी विषय पर मंत्रिपरिषद के विचार के लिए संसूचित करने की अपेक्षा करे, तो प्रधानमंत्री उसे उस विषय को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखने के लिए बाध्य है, हालांकि यदि मंत्रिपरिषद उस पर कोई निर्णय न ले, तब भी प्रधानमंत्री अपनी इच्छा से राष्ट्रपति को निर्णय दे सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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