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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों की संरचना, क्षेत्राधिकार तथा उनकी स्वतंत्रता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 216 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय एक मुख्य न्यायमूर्ति और ऐसे अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा जिन्हें राष्ट्रपति समय-समय पर नियुक्त करना आवश्यक समझे, तथा संविधान ने उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या निश्चित कर दी है जिसे संसद के विशेष बहुमत द्वारा ही बदला जा सकता है।
- 2. अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के अलावा किसी 'अन्य प्रयोजन' (जैसे सामान्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन) के लिए भी बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेषण और प्रतिषेध रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और इस संदर्भ में उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत है।
- 3. जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति राज्यपाल द्वारा संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात अनुच्छेद 233 के अंतर्गत की जाती है, जबकि न्यायिक सेवा के अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान ने उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की कोई अधिकतम संख्या निश्चित नहीं की है; यह पूरी तरह से राष्ट्रपति के विवेक पर छोड़ दिया गया है कि वे समय-समय पर आवश्यकतानुसार न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करें। कथन 2 बिल्कुल सही है, क्योंकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय रिट क्षेत्राधिकार के मामले में उच्चतम न्यायालय (अनुच्छेद 32) की तुलना में अधिक व्यापक अधिकार रखते हैं क्योंकि वे मूल अधिकारों के साथ-साथ सामान्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकते हैं। कथन 3 भी सही है; अनुच्छेद 233 के तहत जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX-क (Part IX-A) जोड़ा गया तथा अनुच्छेद 243-W के अंतर्गत नगरपालिकाओं की शक्तियों, प्राधिकारों और उत्तरदायित्वों से संबंधित प्रावधान किए गए, जिसके तहत उन्हें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है।
2. अनुच्छेद 243-Y के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक राज्य में एक 'वित्त आयोग' (Finance Commission) का गठन किया जाएगा, जो राज्य की संचित निधि से पंचायतों और नगरपालिकाओं के बीच करों, शुल्कों, टोल और फीसों के शुद्ध आगमों के वितरण तथा नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले अनुदानों के सिद्धांतों का निर्धारण करेगा।
3. इस संशोधन के तहत गठित होने वाली नगरपालिकाओं की सभी श्रेणियों के सभी पदों (चाहे वे वार्ड के सदस्य हों या नगर पालिका के अध्यक्ष/चेयरपर्सन) के लिए निर्वाचन हेतु न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष निर्धारित की गई है, जो कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के समतुल्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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नीति आयोग का अध्यक्ष?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और विशेष सदनों के अधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा इस विधेयक को अस्वीकृत या संशोधित नहीं कर सकती, किंतु राज्यसभा के पास यह संवैधानिक अधिकार है कि वह धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों की अवधि के लिए रोक सकती है तथा अपनी सिफ़ारिशों के साथ इसे लोकसभा को वापस भेज सकती है, जिसे मानना या न मानना लोकसभा के विवेक पर पूरी तरह निर्भर करता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से कोई संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर विधि बना सकती है, तो संसद को उस विषय पर संपूर्ण देश या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम पाँच वर्ष की अवधि तक प्रभावी रहता है।
3. अनुच्छेद 312 के अंतर्गत राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से समर्थित संकल्प के माध्यम से केंद्र और राज्यों के लिए समान रूप से एक या अधिक 'अखिल भारतीय सेवाओं' (All India Services) के सृजन का अधिकार संसद को प्रदान कर सकती है, और इस प्रकार का सृजित किया गया नया पद या सेवा देश की संघीय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल 'मंत्रिमंडल' (Cabinet) के लिखित निर्णय के आधार पर ही राष्ट्रपति द्वारा की जा सकती है, न कि प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सलाह पर, और इस संशोधन ने अनुच्छेद 20 तथा 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को आपातकाल के दौरान भी निलंबित न किए जाने का संवैधानिक सुरक्षा कवच प्रदान किया।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग XVIII में अनुच्छेद 352 के अंतर्गत यह जोड़ा गया कि राष्ट्रीय आपातकाल संपूर्ण भारत पर या उसके किसी भाग पर लागू किया जा सकता है, तथा आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त स्वतंत्रताएं स्वतः निलंबित हो जाती हैं, भले ही आपातकाल का आधार 'युद्ध या बाह्य आक्रमण' हो या 'सशस्त्र विद्रोह'।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा का अनुमोदन करने वाले संसद के प्रत्येक सदन के संकल्प को सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य है, जिसे मूल संविधान में 42वें संविधान संशोधन द्वारा बदला गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान में 'संशोधन' की प्रक्रिया किस देश से ली गई है?
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