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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली, शक्तियों और संवैधानिक उत्तरदायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 67(b) के अनुसार उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है जिसे राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत ने पारित किया हो और जिससे लोक सभा सहमत हो, किंतु इस प्रकार के संकल्प को प्रस्तावित करने के लिए कम से कम चौदह दिन पूर्व की लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, जिसका विधिक निहितार्थ यह है कि राष्ट्रपति किसी भी मंत्री को बिना प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सलाह के अपनी स्वतंत्र इच्छा से बर्खास्त कर सकता है, क्योंकि यह राष्ट्रपति की एक अनियंत्रित विवेकीय शक्ति है।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन संबंधी और मंत्रिपरिषद के विनिश्चयों (Decisions) से संबंधित सभी संसूचियाँ राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसा अपेक्षा करे तो मंत्रिपरिषद के समक्ष किसी ऐसे विषय को विचार के लिए रखे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किंतु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 67(b) में यह प्रावधान है कि उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है, बशर्ते लोकसभा उस प्रस्ताव से सहमत हो और इसके लिए 14 दिन पूर्व लिखित सूचना देना आवश्यक है। कथन 2 गलत है क्योंकि भले ही अनुच्छेद 75(2) के अनुसार मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, परंतु व्यावहारिक रूप से राष्ट्रपति किसी मंत्री को तभी बर्खास्त कर सकता है जब प्रधानमंत्री ऐसी सलाह दें; राष्ट्रपति अपनी व्यक्तिगत इच्छा या स्वतंत्र विवेक से किसी मंत्री को बर्खास्त नहीं कर सकता। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री के संवैधानिक दायित्वों को स्पष्ट करता है जिसके तहत उन्हें मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को देनी होती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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