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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy - DPSP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक निहित नीति निर्देशक तत्वों को आयरिश संविधान से लिया गया है, जिसने इन्हें स्पेनिश संविधान से ग्रहण किया था, और ये तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं तथा देश के लिए विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
- 2. यद्यपि नीति निर्देशक तत्व अनुच्छेद 37 के अनुसार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (Non-justiciable) हैं, तथापि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद) में यह स्पष्ट किया है कि नीति निर्देशक तत्व और मूल अधिकार एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का एक अभिन्न अंग है।
- 3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में कुछ नए नीति निर्देशक तत्व जोड़े गए, जिनमें बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना (अनुच्छेद 39), समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता (अनुच्छेद 39A), उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी (अनुच्छेद 43A) तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवर्द्धन तथा वन एवं वन्यजीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48A) शामिल हैं।
- 4. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38 में एक नया खंड (2) जोड़ा गया, जिसके तहत राज्य को यह निर्देश दिया गया कि वह आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को कम से कम करने का प्रयास करे, और 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा अनुच्छेद 45 की विषय-वस्तु में परिवर्तन करके प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCV) का प्रावधान जोड़ा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP) भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में वर्णित हैं। इन्हें आयरलैंड के संविधान से लिया गया है, जिसने इन्हें स्पेनिश संविधान से अपनाया था। अनुच्छेद 37 के अनुसार ये गैर-न्याययोचित (Non-justiciable) हैं, अर्थात् इन्हें किसी न्यायालय द्वारा बलपूर्वक लागू नहीं कराया जा सकता, किंतु देश के शासन में ये मूलभूत हैं। 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा अनुच्छेद 39, 39A, 43A और 48A जोड़े गए। 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा अनुच्छेद 38(2) को जोड़ा गया जो आय की असमानता को कम करने से संबंधित है। 86वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा अनुच्छेद 45 को संशोधित कर 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का उपबंध किया गया। भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के लिए इस पोर्टल का संदर्भ लें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की अधिकारिता, रिट क्षेत्राधिकार और अधीनस्थ न्यायालयों के नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के अधीन किसी उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार भौगोलिक सीमाओं के मामले में उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अधीन रिट क्षेत्राधिकार की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ 'किसी अन्य प्रयोजन' के लिए भी रिट जारी कर सकता है, तथा यह रिट ऐसे किसी व्यक्ति या प्राधिकारी के विरुद्ध भी जारी की जा सकती है जो उच्च न्यायालय के प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर स्थित हो, भले ही वह प्राधिकारी या सरकार उस क्षेत्र के बाहर स्थित हो बशर्ते उसका कारण उच्च न्यायालय के अधिकारक्षेत्र में उत्पन्न हुआ हो।
2. अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) के अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति में न्यायिक अधीक्षण के साथ-साथ प्रशासनिक अधीक्षण (Administrative Superintendence) का अधिकार भी शामिल है, जिसे राज्य विधानमंडल की विधि द्वारा भी छीना नहीं जा सकता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 235 के अंतर्गत राज्य के जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण, जिसमें posting, promotion और छुट्टी का अनुदान शामिल है, संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है, किंतु जिला न्यायाधीशों की प्रारंभिक नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके ही की जाती है, न कि राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास और रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 तथा पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के माध्यम से ब्रिटिश संसद द्वारा पहली बार ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासनिक और राजनैतिक कार्यों को मान्यता दी गई तथा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया, जिसके पहले गवर्नर-जनरल लॉर्ड वारेन हेस्टिंग्स बने।
2. रेगुलेटिंग एक्ट के तहत ही वर्ष 1774 में कलकत्ता के फोर्ट विलियम में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे, तथा इस न्यायालय के निर्णयों के विरुद्ध सीधे लंदन स्थित प्रिवी काउंसिल में अपील की जा सकती थी।
3. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनैतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक कर दिया गया; राजनैतिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई, जबकि व्यापारिक मामलों के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) को बरकरार रखा गया, जिससे भारत में 'द्वैध शासन' (Dual Government) की शुरुआत हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में 'विधि के समक्ष समानता' का अधिकार दिया गया है?
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद की वित्तीय, विधायी शक्तियों तथा धन विधेयकों की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) राज्य की विधान परिषद में पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता है, और यदि विधानसभा द्वारा पारित किसी धन विधेयक को विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे बिना किसी संशोधन के अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।
2. यदि राज्य विधान परिषद किसी धन विधेयक को 14 दिनों के भीतर विधानसभा को वापस नहीं करती है या उसकी सिफारिशों को विधानसभा अस्वीकार कर देती है, तो उस विधेयक को दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जो रूप विधानसभा द्वारा अंतिम रूप से तय किया गया था, और इस गतिरोध को सुलझाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 197 के तहत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाने का प्रावधान किया गया है।
3. साधारण विध विधेयकों (Ordinary Bills) के मामले में विधान परिषद की स्थिति अत्यंत कमजोर होती है, क्योंकि विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को अधिकतम चार महीने (प्रथम बार में तीन महीने और दूसरी बार में एक महीने) तक ही रोक सकती है, और इस अवधि के समाप्त होने पर विधान परिषद की सहमति के बिना भी विधेयक को दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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