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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (State Legislature) की संरचना, विधान परिषद के गठन, उत्सादन तथा उसकी विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद का सृजन या उत्सादन कर सकती है, यदि संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का संकल्प अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दे, और ऐसा विधि निर्माण अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान का संशोधन माना जाता है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 171 के प्रावधानों के तहत किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या किसी भी स्थिति में 40 से कम नहीं हो सकती है, सिवाय उस स्थिति के जहाँ संसद विधि द्वारा कोई विशेष उपबंध करे।
  3. 3. विधान परिषद के सदस्यों के निर्वाचन में, एक-तिहाई सदस्य स्थानीय निकायों के निर्वाचक मंडल द्वारा, एक-तिहाई सदस्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा अपने से भिन्न व्यक्तियों में से, एक-बारहवें सदस्य तीन वर्ष से स्नातकों द्वारा, तथा एक-बारहवें सदस्य कम से कम तीन वर्ष से अध्यापन कर रहे माध्यमिक विद्यालयों से उच्च स्तर के शिक्षकों द्वारा चुने जाते हैं, और शेष एक-तिहाई सदस्यों को राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से मनोनीत किया जाता है।
  4. 4. साधारण विधेयक के मामले में गतिरोध उत्पन्न होने पर, यदि विधान परिषद किसी विधेयक को अस्वीकृत कर देती है या विधानसभा द्वारा पारित संशोधन से असहमत होती है या विधेयक को तीन महीने तक रोक लेती है, तो विधानसभा द्वारा दोबारा पारित किए जाने पर विधान परिषद उस विधेयक को अधिकतम एक महीने की अवधि के लिए और रोक सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 169 के तहत संसद द्वारा विधान परिषद का सृजन या उत्सादन करने के लिए पारित किया गया कानून अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए संविधान का संशोधन नहीं माना जाता है (अर्थात यह एक साधारण बहुमत से पारित साधारण विधि की तरह होता है)। कथन 2 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान परिषद की अधिकतम संख्या विधानसभा का 1/3 और न्यूनतम संख्या 40 निर्धारित की गई है। कथन 3 असत्य है क्योंकि राज्यपाल द्वारा विधान परिषद में कुल सदस्यों का 1/6 भाग (एक-छठवां) मनोनीत किया जाता है, न कि एक-तिहाई (1/3)। कथन 4 सत्य है क्योंकि साधारण विधेयक के संदर्भ में विधान परिषद अधिकतम 4 महीने (प्रथम बार 3 महीने और विधानसभा द्वारा दोबारा पारित किए जाने पर 1 महीना) तक ही विधेयक को रोक सकती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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'केशवानंद भारती वाद' (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्व के मत को बदलते हुए यह अभिनिर्धारित किया कि प्रस्तावना संविधान का अंग है, तथा इसमें निहित 'मूल ढांचा' (Basic Structure) को छोड़कर संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य शामिल होते हैं, जबकि राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों को इसमें भाग लेने का कोई अधिकार नहीं होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा कोई भी व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, प्रधानमंत्री या मंत्री के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता है। 3. मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका संवैधानिक अर्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, और व्यक्तिगत रूप से सभी मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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