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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों की संरचना, उनकी अधिकारिता तथा शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा, किंतु संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा दो या अधिक राज्यों के लिए अथवा किसी संघ राज्यक्षेत्र को मिलाकर एक ही उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है।
- 2. किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया वही है जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की है, और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और भत्ते संबंधित राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित होते हैं, जबकि उनकी पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) के अधीक्षण (Superintendence) की व्यापक शक्ति प्राप्त है, जिसमें प्रशासनिक और न्यायिक दोनों प्रकार के अधीक्षण शामिल हैं, और यह शक्ति सैन्य न्यायालयों या सशस्त्र बलों से संबंधित अधिकरणों पर भी लागू होती है।
- 4. संविधान के अनुच्छेद 233 के अंतर्गत किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, और जिला न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायिक सेवा के व्यक्तियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा, किंतु 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा संसद को यह अधिकार दिया गया कि वह दो या अधिक राज्यों या संघ राज्यक्षेत्रों के लिए एक साझा उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है। कथन 2 सही है: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान (महाभियोग जैसी प्रक्रिया) है। उनके वेतन और भत्ते राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं, जबकि उनकी पेंशन भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से दी जाती है। कथन 3 असत्य है: अनुच्छेद 227 के तहत उच्च न्यायालय को अपने क्षेत्र के सभी न्यायालयों और अधिकरणों पर अधीक्षण की शक्ति प्राप्त है, किंतु इसमें स्पष्ट रूप से सैन्य न्यायालयों (Military Courts/Tribunals) को इस अधीक्षण के दायरे से बाहर रखा गया है। कथन 4 सही है: अनुच्छेद 233 के अनुसार जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है तथा अन्य न्यायिक सेवा के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज राजभाषाओं, राजनीतिक दलों की मान्यता तथा संविधान की विभिन्न अनुसूचियों और भागों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों के माध्यम से जोड़ा गया; जैसे- सिंधी भाषा को 21वें संशोधन द्वारा, कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को 71वें संशोधन द्वारा तथा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को 92वें संशोधन द्वारा शामिल किया गया, जिससे वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 राजभाषाएँ हो गई हैं।
2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) के प्रावधानों के अंतर्गत निर्वाचन आयोग द्वारा किसी राजनीतिक दल को 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6% मत प्राप्त करे और साथ ही लोकसभा में कम से कम 4 सीटें जीते।
3. संविधान के भाग XVII (अनुच्छेद 343-351) के अंतर्गत संघ की राजभाषा का प्रावधान किया गया है, जिसके अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा मूल संविधान में यह तय किया गया था कि संविधान लागू होने के 15 वर्षों की अवधि (अर्थात 1965 तक) तक सभी सरकारी कार्यों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा और केवल हिंदी का ही उपयोग अनिवार्य होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका और मुख्यमंत्री की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित और विधान विषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे तथा राज्यपाल द्वारा माँगी गई सभी सूचनाएँ उन्हें प्रदान करे।
2. यदि मुख्यमंत्री विधानसभा में विश्वास मत खो देता है या उसका त्यागपत्र हो जाता है, तो मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है और राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह के बिना अपने स्वविवेक से नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति कर सकता है, बशर्ते सदन में किसी अन्य नेता के पास बहुमत का स्पष्ट दावा हो।
3. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह अपने पद पर राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the Governor) धारण करता है, किंतु महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, परंतु उसे मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर निर्धारित करते हैं, और वर्ष 1993 के बाद से यह एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में कार्य कर रहा है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की शक्तियां और वेतन-भत्ते सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होते हैं और निर्णयों में मतभेद होने पर बहुमत से निर्णय लिया जाता है।
2. वर्ष 1990 में स्थापित 'दिनेश गोस्वामी समिति' ने चुनाव सुधारों पर अपनी रिपोर्ट में सरकारी धन से वित्तपोषित चुनाव प्रचार (State Funding of Elections) का समर्थन किया था तथा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के प्रयोग को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की सिफारिश की थी।
3. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के तहत एक उम्मीदवार को अधिकतम दो संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है, और यदि कोई उम्मीदवार दोनों सीटों पर विजयी होता है, तो उसे छह महीने के भीतर एक सीट खाली करनी होती है, तथा उपचुनाव का खर्च संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा वहन किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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किसी वस्तु का आवर्धित और आभासी प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन प्रक्रिया, प्रधानमंत्री की शक्तियों तथा मंत्रिपरिषद के उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए गठित होने वाले निर्वाचकगण (Electoral College) में संसद के दोनों सदनों के केवल निर्वाचित सदस्य ही भाग लेते हैं, जबकि मनोनीत सदस्य इस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रहते हैं, जो कि राष्ट्रपति के निर्वाचकगण से इसे भिन्न बनाता है।
2. अनुच्छेद 75(3) के प्रावधान के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि यदि लोकसभा में प्रधानमंत्री के विरुद्ध या किसी अन्य मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को सामूहिक रूप से त्यागपत्र देना पड़ता है।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन और विधान संबंधी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे उपलब्ध कराए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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