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Indian Polity
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया, सदनों की विशेषाधिकारिता और वित्तीय नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 117(1) के तहत ऐसा कोई भी वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-I), जिसमें अनुच्छेद 110 के उपबंधों के अलावा अन्य मामले भी शामिल हैं, लोकसभा में राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, किंतु राज्यसभा इस प्रकार के विधेयक को संशोधित करने या अस्वीकृत करने का पूर्ण अधिकार रखती है।
- 2. अनुच्छेद 122 के अनुसार संसद की किसी भी कार्यवाही की वैधता को इस आधार पर किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है कि प्रक्रिया का कोई अनियमित पालन हुआ है, तथा संसद का कोई भी सदन या उसका सदस्य अपनी आंतरिक कार्यवाहियों के नियमन के संबंध में किसी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
- 3. लोकसभा के विघटन के पश्चात राष्ट्रपति द्वारा बुलाई गई संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108) के संदर्भ में यदि कोई साधारण विधेयक लोकसभा में लंबित था और लोकसभा विघटित हो चुकी है, तो ऐसा विधेयक व्यपगत (Lapse) नहीं होता है यदि राष्ट्रपति ने संयुक्त बैठक बुलाने की अपनी मंशा पहले ही अधिसूचित कर दी हो।
- 4. संसद के किसी सदन में विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) या सदन की अवमानना से संबंधित किसी मामले में यदि कोई प्रस्ताव पारित किया जाता है, तो सदन को अपने सदस्यों या बाहरी व्यक्तियों को दंडित करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु इस प्रकार के दंडात्मक आदेशों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) उच्चतम न्यायालय द्वारा किसी भी परिस्थिति में नहीं की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि वित्तीय विधेयक (श्रेणी-I) के संबंध में अनुच्छेद 117(1) के तहत राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश अनिवार्य है और राज्यसभा को इसे संशोधित या अस्वीकृत करने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है, जो धन विधेयक से भिन्न है। कथन 3 सही है क्योंकि यदि लोकसभा के विघटन से पूर्व ही राष्ट्रपति ने संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108) बुलाने की अपनी मंशा की सूचना दे दी है, तो वह विधेयक लोकसभा के विघटन के बावजूद व्यपगत (Lapse) नहीं होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 122(2) के अनुसार संसद का कोई भी सदस्य या अधिकारी जिसमें सदन की प्रक्रिया या कार्य-संचलन या व्यवस्था बनाए रखने की शक्ति निहित है, किसी भी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं होगा, किंतु 'प्रक्रिया की अनियमितता' के आधार पर न्यायालय समीक्षा नहीं कर सकता, फिर भी असंवैधानिक या मौलिक अधिकारों का हनन करने वाले मामलों में न्यायिक समीक्षा हो सकती है। कथन 4 गलत है क्योंकि सदन के विशेषाधिकार हनन के मामलों में दिए गए दंडात्मक निर्णयों की न्यायिक समीक्षा उच्चतम न्यायालय द्वारा की जा सकती है यदि वे मौलिक अधिकारों (विशेषकर अनुच्छेद 21) का उल्लंघन करते हैं (केशव सिंह मामला, 1965)। भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के अंतर्गत संसद की विधाई शक्तियों को विस्तार से पढ़ें।
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अनुच्छेद 50 किससे संबंधित है?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता', 'समता' और 'बंधुत्व' के आदर्शों को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह निर्णय दिया गया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है।
3. केशवानंद भारती वाद (1973) में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्व के निर्णय को बदलते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है तथा इसमें संसद द्वारा संविधान के मूल ढाँचे (Basic Structure) को प्रभावित किए बिना संशोधन किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के अंतर्गत राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों, अध्यादेश निर्माण और मुख्यमंत्री के संवैधानिक दायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल को किसी ऐसे विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, जिस विषय तक राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूर्णतः क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है, और सैन्य न्यायालयों (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी राज्यपाल को क्षमादान की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
2. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की आयु राज्य विधानसभा के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद समाप्त हो जाती है, और यदि इस बीच राज्य विधानमंडल के दोनों सदन (द्विसदनीय होने पर) अध्यादेश के अस्वीकृत होने का संकल्प पारित कर देते हैं, तो अध्यादेश की अवधि छह सप्ताह की समाप्ति से पहले ही समाप्त हो जाती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन के संचालन और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और राज्यपाल द्वारा राज्य के प्रशासन से संबंधित मांगी गई किसी भी सूचना को देने से मुख्यमंत्री इनकार कर सकता है यदि वह मामला गोपनीय श्रेणी के अंतर्गत आता हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संवैधानिक उपबंधों, स्वतंत्रता और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग या किसी संयुक्त लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, और इनमें से प्रत्येक आयोग के कम से कम आधे सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे जो भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हों।
2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही हटाया जा सकता है, भले ही वह संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य हो या राज्य लोक सेवा आयोग का, और राज्यपाल को राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को हटाने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
3. संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य अपने पद की अवधि समाप्त होने पर उसी पद पर पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होते हैं, किंतु संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद के अलावा भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन के लिए पात्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 'धर्मनिरपेक्षता' (Secularism) शब्द किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया था?
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