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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रीता और जे. एस. ड्रेवर (Drever) अथवा सामान्य मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान (Mental Hygiene) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'असमायोजन और रक्षात्मक युक्तियाँ (विशेषकर युक्तिकरण या रेशनलाइजेशन - Rationalization)'**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी विफलताओं, अवांछनीय व्यवहारों, या आंतरिक संघर्षों को छिपाने या उनसे उत्पन्न होने वाली चिंता से बचने के लिए तार्किक, बौद्धिक रूप से स्वीकार्य लेकिन पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत बहाने या कारण प्रस्तुत करता है ताकि समाज और स्वयं की नज़रों में उसकी छवि सुरक्षित रह सके (उदाहरणार्थ: 'अंगूर खट्टे हैं' या 'लोमड़ी और खट्टे अंगूर' की कहावत) — के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, तार्किक स्वावलंबन और आत्म-मूल्यांकन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के बाल विकास और शिक्षण शास्त्र के पाठ्यक्रम के अनुसार, 'युक्तिकरण' (Rationalization) सिग्मंड फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत के अंतर्गत 'रक्षा तंत्र' (Defense Mechanisms) का एक प्रमुख प्रकार है। यह एक अचेतन मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपनी विफलताओं (जैसे परीक्षा में फेल होने पर 'प्रश्नपत्र बहुत कठिन था' या 'शिक्षक पक्षपाती थे' कहना) को तार्किक रूप से सही साबित करने का प्रयास करता है। यह अहम् (Ego) को तात्कालिक चिंता से तो बचाता है, लेकिन यदि विद्यार्थी इसका अत्यधिक प्रयोग करने लगे, तो वह अपनी वास्तविक कमियों और त्रुटियों को स्वीकार नहीं कर पाता, जिससे उसका शैक्षणिक विकास और आत्म-मूल्यांकन नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है। अतः विकल्प (b) इस संप्रत्यय के मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे सटीक और वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट करता है।
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→ मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संरक्षण का प्रत्यय' (Concept of Conservation)**—जिसे उस तार्किक मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक यह समझ जाता है कि किसी वस्तु के भौतिक रूप, आकार या दिखावे में परिवर्तन होने के बावजूद उसका द्रव्यमान, आयतन, भार या संख्या अपरिवर्तित (नियत) रहती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मूर्त संक्रियात्मक चिंतन (Concrete Operational Thinking), विकेंद्रीकरण (Decentration) और तार्किक अवबोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्राकृतिक बुद्धि' (Naturalistic Intelligence)**—जिसे उस विशिष्ट संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति प्रकृति के विभिन्न रूपों, वनस्पतियों, जीवों, पारिस्थितिक तंत्र और पर्यावरण के सूक्ष्म अंतरों को पहचानने, उनका वर्गीकरण करने और उनके साथ सफलतापूर्वक सामंजस्य स्थापित करने में पूर्ण रूप से सक्षम होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पर्यावरणीय संवेदनशीलता, अनुभवात्मक क्षेत्र-अध्ययन (Field Studies) और पारिस्थितिकीय चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अनुसार किसी क्रिया या अनुक्रिया के बाद यदि संतोषजनक या सुखद परिणाम (सफलता, पुरस्कार या प्रशंसा) प्राप्त होते हैं, तो उस क्रिया और उद्दीपक के बीच का संबंध मजबूत हो जाता है, तथा असंतोषजनक या कष्टदायक परिणाम मिलने पर वह संबंध कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा प्रबंधन, संतोषजनक पुनर्बलन (Reinforcement) और सकारात्मक आदतों के निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम' के दृष्टिकोण के अंतर्गत प्रतिपादित **'चिंतनशील चिंतन या विचारशील समस्या-समाधान' (Reflective Thinking / Inquiry Method)** की पाँच चरणों वाली प्रक्रिया के उस महत्वपूर्ण चरण—जिसके तहत शिक्षार्थी किसी जटिल, वास्तविक या संशयपूर्ण परिस्थिति में उत्पन्न बाधा को दूर करने के लिए विभिन्न संभावित परिकल्पनाओं (Hypotheses) का निर्माण करता है और उनके तार्किक परिणामों का मानसिक रूप से मूल्यांकन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, संज्ञानात्मक लचीलेपन और विश्लेषणात्मक जिज्ञासा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद या प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness) की अवधारणा—जिसके तहत यह स्पष्ट किया गया है कि जब तंत्रिका तंत्र (Nervous System) कोई कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है, तो उसे करने से व्यक्ति को संतोष और आनंद की प्राप्ति होती है, किंतु यदि वह तैयार नहीं है और उससे जबरन कार्य कराया जाए या बाधा उत्पन्न की जाए, तो उसे असंतोष या झुंझलाहट महसूस होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, अधिगम की अनुक्रियात्मक गति और मानसिक तत्परता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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