BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
13 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम सिद्धांत' (Progressive Education and Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'करके सीखना' (Learning by Doing / Experiential Learning)**—जिसे उस व्यावहारिक शिक्षाशास्त्रीय उपागम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत विद्यार्थी केवल निष्क्रिय रूप से श्रोता बनकर या पाठ्यपुस्तकों को रटकर ज्ञान प्राप्त नहीं करते, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों, सामूहिक परियोजनाओं, क्षेत्र-कार्यों और समस्याओं के समाधान में सक्रिय रूप से भाग लेकर अपने अनुभवों के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यावहारिक संज्ञान, लोकतांत्रिक सहभागिता और आलोचनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के पाठ्यक्रम के अनुसार, जॉन डीवी (John Dewey) का 'करके सीखना' (Learning by Doing) प्रगतिशील शिक्षा की नींव है। यह सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि अधिगम एक सक्रिय, अनुभवात्मक और सामाजिक प्रक्रिया है। जब विद्यार्थी व्यावहारिक गतिविधियों, प्रयोगों और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में सक्रिय रूप से संलग्न होते हैं, तो वे निष्क्रिय प्राप्तकर्ता के बजाय ज्ञान के सक्रिय निर्माता (Constructors of Knowledge) बनते हैं। इससे उनकी संज्ञानात्मक संरचना मजबूत होती है, आलोचनात्मक चिंतन विकसित होता है और वे स्वतंत्र रूप से समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होते हैं। अतः विकल्प (b) इस संप्रत्यय का सबसे सटीक और वैज्ञानिक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ प्रस्तुत करता है।
Share:

Related Questions

→ मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत' (Humanistic Theory of Motivation / Hierarchy of Needs) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)**—जिसे उस सर्वोच्च मनोवैज्ञानिक आवश्यकता के रूप में परिभाषित किया जाता है जो प्रेरणा पदानुक्रम के सबसे शीर्ष पर स्थित होती है, जहाँ व्यक्ति अपनी संपूर्ण क्षमताओं, अंतर्निहित प्रतिभाओं, रचनात्मकता और व्यक्तिगत विकास की चरम सीमाओं को पूरी तरह से साकार करने और उपयोग करने के लिए प्रेरित होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक स्वायत्तता, सर्वोच्च सृजनात्मक अभिव्यक्ति और संपूर्ण व्यक्तित्व विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संरक्षण का सिद्धांत या कंजर्वेशन' (Conservation)**—जिसे उस संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक यह समझने में सक्षम हो जाता है कि किसी वस्तु के भौतिक रूप, रंग या आकार में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन, द्रव्यमान या भार में कोई परिवर्तन नहीं होता (जैसे कि एक ही मात्रा के पानी को लंबे और चौड़े बर्तन में डालने पर भी पानी की मात्रा समान रहना)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विसर्जन, विकेंद्रीकरण (Decentration) और ठोस संक्रियात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैने (Robert Gagné) के 'अधिगम के पदानुक्रम सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर के अधिगम—अर्थात् 'समस्या समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning)—तथा उससे ठीक पूर्व के स्तर 'नियम अधिगम' (Rule Learning) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक क्षमताओं, तार्किक सूत्रों के अनुप्रयोग, और नवीन परिस्थितियों में सृजनात्मक समाधान निकालने की योग्यताओं के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights)**—जिसे उस उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-Conventional Level) की पाँचवीं अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक यह समझने लगता है कि कानून और नियम पूर्ण या कठोर नहीं हैं, बल्कि वे समाज के आपसी समझौते का परिणाम हैं, और यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के कल्याण के विरुद्ध हो, तो उसे लोकतांत्रिक और तार्किक तरीकों से बदला जा सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक तार्किकता (Moral Reasoning), लोकतांत्रिक मूल्यों और न्यायोचित चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) और प्रयोगात्मक शिक्षाशास्त्र के 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'चिंतनशील चिंतन या रिफ्लेक्टिव थिंकिंग' (Reflective Thinking)**—जिसे उस सक्रिय, निरंतर और तार्किक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी किसी विश्वास या ज्ञान के रूप में स्वीकृत आधार को उसके साक्ष्यों और अंतःनिहित परिणामों के संदर्भ में गहराई से जाँचता है, तथा समस्या-समाधान के लिए अपने अनुभवों को पुनर्गठित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक दृष्टिकोण, अनुभव आधारित ज्ञान और समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.