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Child Development
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage) में बच्चों के चिंतन की एक प्रमुख सीमा 'अहमकेन्द्रिता' (Egocentrism) और 'संरक्षण का अभाव' (Lack of Conservation) होती है। यदि कोई शिक्षिका तीन वर्ष के बच्चे को दो समान आकार के गिलासों से पानी एक लंबे और पतले गिलास में डालते हुए दिखाती है और बच्चा यह निष्कर्ष निकालता है कि लंबे गिलास में पानी की मात्रा अधिक है (क्योंकि वह केवल गिलास की ऊँचाई पर ध्यान केंद्रित करता है, न कि उसकी चौड़ाई पर), तो पियाजे के इस संदर्भ में 'केंद्रीकरण' (Centration) की यह अवधारणा निम्नलिखित में से किस संज्ञानात्मक प्रक्रिया या बाधा का प्रत्यक्ष परिणाम है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'केंद्रीकरण' (Centration) की प्रवृत्ति पाई जाती है, जिसके कारण वे किसी वस्तु या घटना के केवल एक ही पहलू या आयाम (जैसे लंबाई या ऊँचाई) पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और अन्य पहलुओं (जैसे चौड़ाई) की उपेक्षा करते हैं। इसी केंद्रीकरण के कारण वे 'संरक्षण' (Conservation) के नियम को समझने में असमर्थ होते हैं। इस विषय में विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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