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History of India
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पानीपत का द्वितीय युद्ध कब हुआ?

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1556 में अकबर और हेमू के बीच युद्ध हुआ।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों—बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह—के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी पर अधिकार करने वाले विद्रोही अभियानों का नेतृत्व किया और अंत में नेपाल की ओर पलायन कर गईं। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने फैजाबाद (अवर) क्षेत्र से विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश सेना के खिलाफ अपनी बेहतरीन युद्ध रणनीतियों के कारण अंग्रेजों द्वारा उन पर बीस हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 3. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने नवंबर 1857 में गोरखा रेजिमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की सहायता से लखनऊ को अंतिम रूप से विद्रोहियों से पुनः मुक्त कराया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? "दीवान-ए-अमीर कोही" का मुख्य कार्य क्या था? मुगल काल में सरकारी दस्तावेजों और राजकीय पत्राचार के विभाग को क्या कहा जाता था? वर्ष 1857 के विद्रोह के आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों (जैसे स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्था) के अत्यधिक कर निर्धारण के कारण पारंपरिक कृषक वर्ग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो गई, जिससे किसानों में अंग्रेजों के प्रति तीव्र आक्रोश उत्पन्न हुआ। 2. ब्रिटिश औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप भारत में ब्रिटेन से सस्ते मशीनी कपड़ों और वस्तुओं का बड़े पैमाने पर आयात किया गया, जिससे भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग नष्ट हो गए और कारीगरों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई। 3. डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) और रियासतों के विलय की नीति के कारण हजारों की संख्या में सैनिक, दरबारी, कलाकार और शिल्पकार अपनी आजीविका खो बैठे, क्योंकि इन देशी रियासतों के पतन से उनके संरक्षक समाप्त हो गए थे। 4. ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए यहाँ के पारंपरिक व्यापारिक मार्गों पर से सभी प्रकार के आंतरिक और बाह्य चुंगी करों को पूरी तरह समाप्त कर दिया था, जिससे भारतीय व्यापारियों को भारी मुनाफा हुआ और उन्होंने विद्रोह का वित्तीय समर्थन किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के ऐतिहासिक संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) के तहत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं को यह निर्णय लेने का अधिकार दिया गया था कि क्या उनके प्रांतों का विभाजन किया जाना चाहिए या नहीं, जिसके परिणामस्वरूप दोनों प्रांतों के हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधियों ने अलग बैठक कर विभाजन के पक्ष में मतदान किया। 2. इस योजना के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराए जाने का प्रावधान था, और सिलहट ने जनमत संग्रह के माध्यम से पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया। 3. रियासतों (Princely States) के भविष्य के निर्धारण के संबंध में माउंटबेटन योजना में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि वे चाहें तो अपनी भौगोलिक स्थिति और जनता की इच्छा के आधार पर भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकती हैं, अथवा वे चाहें तो ब्रिटिश क्राउन के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए एक पूर्ण स्वतंत्र एवं संप्रभु राष्ट्र के रूप में भी अस्तित्व में रह सकती हैं। 4. भारत और पाकिस्तान के बीच सीमाओं के निर्धारण के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा अधिनियमित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के पारित होने से पूर्व ही सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में सीमा आयोगों (Boundary Commissions) का गठन कर दिया गया था, किंतु इन आयोगों की सीमा-निर्णय रिपोर्टों को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद सार्वजनिक किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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