त्वरित लिंक्स
History of India
2 views
वर्ष 1857 के विद्रोह के आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों (जैसे स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्था) के अत्यधिक कर निर्धारण के कारण पारंपरिक कृषक वर्ग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो गई, जिससे किसानों में अंग्रेजों के प्रति तीव्र आक्रोश उत्पन्न हुआ।
- 2. ब्रिटिश औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप भारत में ब्रिटेन से सस्ते मशीनी कपड़ों और वस्तुओं का बड़े पैमाने पर आयात किया गया, जिससे भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग नष्ट हो गए और कारीगरों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई।
- 3. डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) और रियासतों के विलय की नीति के कारण हजारों की संख्या में सैनिक, दरबारी, कलाकार और शिल्पकार अपनी आजीविका खो बैठे, क्योंकि इन देशी रियासतों के पतन से उनके संरक्षक समाप्त हो गए थे।
- 4. ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए यहाँ के पारंपरिक व्यापारिक मार्गों पर से सभी प्रकार के आंतरिक और बाह्य चुंगी करों को पूरी तरह समाप्त कर दिया था, जिससे भारतीय व्यापारियों को भारी मुनाफा हुआ और उन्होंने विद्रोह का वित्तीय समर्थन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के पीछे गहरी आर्थिक कुंठा और शोषणकारी नीतियां जिम्मेदार थीं। अंग्रेजों की भू-राजस्व प्रणालियों ने किसानों को साहूकारों के चंगुल में फंसा दिया, और ब्रिटेन के औद्योगिकीकरण ने भारतीय हस्तशिल्प को तबाह कर दिया। देशी रियासतों के विलय ने आश्रित वर्गों को बेरोजगार कर दिया। इसके विपरीत, कथन 4 गलत है क्योंकि ब्रिटिश नीतियों ने भारतीय व्यापारियों और हस्तशिल्पियों पर भारी कर लादकर उनके व्यापार को नष्ट किया था, न कि कर समाप्त कर मुनाफा पहुंचाया था। इस महान संघर्ष के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समझने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की गतिविधियों तथा रणनीतिक प्रंबध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र होने के नाते ब्रिटिश सरकार द्वारा उनकी पेंशन और उपाधि रोके जाने के प्रतिशोध में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध शस्त्र उठाए।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और निष्ठावान सहयोगी थे, ने कूटनीतिक और वैचारिक पक्ष संभालते हुए लंदन में पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तात्या टोपे के साथ मिलकर कानपुर की सैन्य रणनीति को अमलीजामा पहनाया।
3. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के पश्चात अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और वहाँ की सेना को अपने पक्ष में मिलाकर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी।
4. कानपुर में पराजय के बाद नाना साहब अंग्रेजों के हाथों जीवित पकड़े गए और ब्रिटिश अदालत द्वारा मुकदमा चलाकर उन्हें सार्वजनिक रूप से कानपुर में ही फाँसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक और सैन्य प्रबंध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' में आठ मंत्रियों की नियुक्ति की गई थी, जिनमें प्रत्येक मंत्री सीधे सम्राट के प्रति उत्तरदायी होता था और यह कोई मंत्रिमंडल (Cabinet) न होकर विभिन्न विभागों के प्रशासनिक परामर्शदाताओं का समूह था।
2. अष्टप्रधान में 'सेनापति' (या सर-ए-नौबत) सैन्य मामलों का प्रमुख अधिकारी होता था, जिसकी नियुक्ति वंशानुगत आधार पर की जाती थी ताकि सेना पर मराठा सरदारों का नियंत्रण सुरक्षित रहे।
3. शिवाजी ने अपनी राजस्व व्यवस्था में दक्कन के मुस्लिम राज्यों और मलिक अंबर द्वारा अपनाई गई भूमि पैमाइश व मूल्यांकन की पद्धति को अपनाया, तथा अपने राज्य में जागीरदारी प्रथा को हतोत्साहित करते हुए सैनिकों को नगद वेतन देने की नीति को बढ़ावा दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और आर्थिक जीवन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के 'सप्तांग सिद्धांत' का प्रतिपादन किया गया है, जिसके अनुसार स्वामी (राजा), आमात्य (मंत्री), जनपद (क्षेत्र और जनता), दुर्ग, कोष, सेना और मित्र राज्य के सात आवश्यक अंग हैं।
2. मौर्य प्रशासन में 'अध्यक्ष' विभिन्न आर्थिक विभागों के नियंत्रक अधिकारी होते थे, उदाहरणार्थ- 'सुवर्णध्यक्ष' खानों का अध्यक्ष, 'पण्यध्यक्ष' वाणिज्य का अध्यक्ष और 'सीताध्यक्ष' राजकीय कृषि भूमि की देखरेख करने वाला प्रमुख अधिकारी था।
3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन तीस सदस्यों की एक नगर पालिका द्वारा चलाया जाता था, जो छह समितियों में विभाजित थी और प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे, जो नगर की सफाई, विदेशी पर्यटकों, जन्म-मृत्यु तथा व्यापार-वाणिज्य का नियमन करते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
भूमि मापने के लिए "गज-ए-सिकंदरी" (30 इंच) का प्रचलन किसने शुरू किया था?
→
भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक स्वरूप तथा उनके प्रमुख संतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रामानुजचार्य द्वारा प्रतिपादित 'विशिष्टाद्वैतवाद' के अनुसार ब्रह्म (ईश्वर) ही एकमात्र सत्य है, किंतु जगत और जीवात्मा उससे पूरी तरह स्वतंत्र और असत्य नहीं हैं, बल्कि वे ब्रह्म के ही अंग हैं और मोक्ष की प्राप्ति केवल 'प्रपत्ति' (पूर्ण आत्मसमर्पण) तथा भक्ति मार्ग से संभव है।
2. भारत में चिश्ती सूफी सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने की थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य की राजनीतिक सत्ता, शाही दरबारों और धन-दौलत से कठोर दूरी बनाए रखने के साथ-साथ संगीत और नृत्य आधारित 'समां' को ईश्वर-आराधना का प्रमुख माध्यम माना।
3. शंकराचार्य के 'अद्वैत वेदांत' के खंडन में मध्वाचार्य ने 'शुद्धद्वैतवाद' (Pure Non-Dualism) के सिद्धांत का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार ईश्वर और जीव में कोई भेद नहीं है और जगत पूरी तरह वास्तविक है।
4. कबीर, रैदास और नानक जैसे निर्गुण संतों ने मूर्तिपूजा, बाह्य कर्मकांडों, जाति व्यवस्था और संप्रदायवाद का कड़ा विरोध करते हुए एक निराकार, सर्वव्यापी और अनाम ईश्वर की उपासना पर बल दिया, तथा उन्होंने अपने उपदेशों के प्रसार के लिए क्षेत्रीय भाषाओं (लोकभाषाओं) का प्रयोग किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.