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History of India
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मुगल चित्रकला का विकास:
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अकबर के काल में व्यवस्थित हुई।
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मराठा साम्राज्य के सुदृढ़ीकरण, छत्रपति शिवाजी के केंद्रीय प्रशासन और उनके राजस्व सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' नामक मंत्रिपरिषद थी, जिसमें 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' को छोड़कर शेष सभी छह मंत्रियों को आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना पड़ता था और सेना का प्रत्यक्ष संचालन करना होता था।
2. शिवाजी ने अपने भू-राजस्व प्रशासन में मलिक अंबर की राजस्व व्यवस्था के आधार पर 'काठी' नामक माप की इकाई का प्रयोग कर भूमि की पैमाइश की थी, और उन्होंने 'मिरासदारों' (वंशागत भूमि अधिकारों वाले स्थानीय सरदारों) के विशेषाधिकारों को पूरी तरह समाप्त कर सीधे किसानों से लगat वसूलने की नीति लागू की।
3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के प्रमुख वित्तीय स्रोत थे; जहाँ 'चौथ' पड़ोसी मुगल क्षेत्रों से उनकी सुरक्षा के एवज में वसूला जाने वाला 25% कर था, वहीं 'सरदेशमुखी' संपूर्ण क्षेत्र पर अपने पैतृक अधिकारों के दावे के रूप में वसूल किया जाने वाला 10% अतिरिक्त कर था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष तथा सूरत विभाजन (1907) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, में उग्रवादी दल के तीव्र दबाव के कारण ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थाओं के बहिष्कार का प्रस्ताव कलकत्ता से बाहर पूरे देश में लागू करने का औपचारिक और सर्वसम्मत निर्णय ले लिया गया था।
2. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में कांग्रेस के मंच से पहली बार दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में 'स्वराज' (Swaraj) को राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में घोषित किया गया, किंतु बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रस्तावों पर नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच गंभीर गतिरोध उत्पन्न हो गया था।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन का मुख्य तात्कालिक कारण रासबिहारी घोष की अध्यक्षता को लेकर नहीं, बल्कि इस बात पर था कि गरम दल के नेता लाला लाजपत राय को कांग्रेस का अगला अध्यक्ष बनाने की मांग को नरमपंथियों ने पूरी तरह ठुकरा दिया था।
4. सूरत विभाजन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने गरमपंथी नेतृत्व का पूर्ण दमन करने की नीति अपनाई, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर छह वर्ष के कारावास के लिए मांडले (बर्मा) जेल भेज दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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तुर्की भाषा में लिखी गई "बाबरनामा" का फारसी में अनुवाद किसने किया था?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में क्रांतिकारियों के नेतृत्व, सैन्य गतिविधियों और ब्रिटिश प्रतिरोध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने संभाला था, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित किया और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष के लिए अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य सलाहकार और राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया था।
2. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सेना का प्रभावी सैन्य नेतृत्व किया, तथा ब्रिटिश जनरल कॉलिन कैंपबेल और हैवलॉक की संयुक्त सेना के साथ भीषण संघर्ष के उपरांत ग्वालियर से आकर कानपुर पर पुनः अधिकार करने का सफल प्रयास किया था।
3. सती चौरा घाट की घटना के उपरांत कानपुर में ब्रिटिश अधिकारियों और आत्मसमर्पण करने वाले यूरोपीय नागरिकों के साथ हुए संघर्ष में अजीमुल्ला खां की प्रमुख कूटनीतिक भूमिका थी, जिन्होंने बाद में विद्रोह के प्रचार हेतु विदेशों में भी प्रयास किए थे।
4. कानपुर में विद्रोह के पूर्ण दमन के पश्चात ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज ने नाना साहब और तात्या टोपे को गिरफ्तार कर लिया था, जहाँ नाना साहब को तोप से उड़ा दिया गया और तात्या टोपे को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च 1931) और उसके पश्चात हुए घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान राजनीतिक कैदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने तथा समुद्र तट के पास नमक बनाने की अनुमति देना स्वीकार किया था।
2. कांग्रेस ने कराची अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया और महात्मा गांधी को द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए एकमात्र कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में नामित किया।
3. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर उत्पन्न गहरे मतभेद और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ हुए समझौते के कारण गांधीजी ने सम्मेलन का बहिष्कार कर बीच में ही भारत लौटने का निर्णय लिया।
4. भारत लौटने के बाद गांधीजी ने तुरंत वायसराय लॉर्ड विलिंगटन से मुलाकात की, जिन्होंने कांग्रेस के प्रस्तावों को स्वीकार करते हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण को रोकने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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