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History of India
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शेरशाह सूरी की मृत्यु:
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1545 में कालिंजर के घेरे में हुई।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के संचालन तथा बाद में ब्रिटिश सेना द्वारा इन केंद्रों के दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदउल्लाह शाह ने किया था, जिन्हें 'फैजाबाद का ढंका' भी कहा जाता है, और ब्रिटिश जनरल कैंपबेल ने भारी संघर्ष के बाद इस क्षेत्र में विद्रोह का दमन किया था।
2. रोहिलखंड की राजधानी बरेली में खान बहादुर खान ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व संभाला था, जहाँ उन्होंने स्वयं को नवाब घोषित कर प्रशासनिक व्यवस्था चलाई थी, किंतु अंततः ब्रिटिश सेना ने कमिश्नर कैंपबेल और ट्रीवेलियन के सहयोग से बरेली पर पुनः अधिकार कर लिया।
3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जिन्होंने स्थानीय नागरिकों और सैनिकों का संगठन कर ब्रिटिश शासन को चुनौती दी थी, किंतु जनरल नील ने अत्यंत क्रूरता के साथ इलाहाबाद में इस विद्रोह को कुचल दिया था।
4. बरेली में विद्रोह के दमन के पश्चात खान बहादुर खान को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई, जबकि मौलवी लियाकत अली अंग्रेजों की पकड़ से बचकर नेपाल भागने में सफल रहे और वहीं उनकी मृत्यु हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, बौद्ध धर्म और जैन धर्म की दार्शनिक मान्यताओं तथा उनकी संस्थागत व्यवस्थाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के मध्यम प्रतिपदा (अष्टांगिक मार्ग) और जैन धर्म के त्रिरत्न (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) दोनों ही वेदों की सर्वोच्चता और यज्ञीय कर्मकांडों को आंशिक रूप से मान्यता देते हैं।
2. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीर का अंत करना या संथारा (सलेखना) पद्धति द्वारा प्राण त्यागना एक मान्य आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जबकि बौद्ध धर्म में अतिवादी कायाक्लेश या अत्यधिक आत्म-दमन के मार्ग को वर्जित किया गया है।
3. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, जबकि जैन संघ (निर्ग्रंथ) में भिक्षु बनने के लिए राजा या माता-पिता की अनुमति के बिना भी किसी भी व्यक्ति को सीधे प्रवेश मिल जाता था।
4. जैन धर्म के 'अनेकांतवाद' (स्यादवाद) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि सत्य के अनेक पहलू होते हैं और कोई भी एक दृष्टिकोण संपूर्ण सत्य को व्यक्त नहीं कर सकता, जो बौद्ध धर्म के 'प्रतीतसमुत्पाद' सिद्धांत से भिन्न है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल और गरम दल काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में कांग्रेस के भीतर ब्रिटिश शासन के प्रति दृष्टिकोण को लेकर गहरा मतभेद उभरकर सामने आया, जहाँ गरमपंथियों ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को पूरे देश में फैलाने की मांग की, जबकि गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में नरमपंथियों ने इसे केवल बंगाल तक सीमित रखने और ब्रिटिश न्यायप्रियता पर विश्वास बनाए रखने का समर्थन किया।
2. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्ष बनने के कारण कांग्रेस का आसन्न विभाजन टल गया, और इस अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस के मंच से 'स्वराज' (सवा लाख स्वशासन) का लक्ष्य आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए गरमपंथियों ने लाला लाजपत राय के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि नरमपंथियों ने रासबिहारी घोष का समर्थन किया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों के बीच हुई तीखी झड़प के कारण कांग्रेस का औपचारिक विभाजन हो गया और गरमपंथियों को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया।
4. सूरत विभाजन के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने 'दमन और गाजर' (Repression and Conciliation) की नीति अपनाते हुए एक ओर गरमपंथी नेताओं जैसे बाल गंगाधर तिलक को देशद्रोह के आरोप में छह वर्ष की कैद देकर मांडले जेल भेज दिया, तो दूसरी ओर नरमपंथियों को संतुष्ट करने के लिए मार्ले-मिंटो सुधार (1909) के माध्यम से मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था लागू कर दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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संगीत के क्षेत्र में "कर्नाटक संगीत" का पितामह किसे माना जाता है जो विजयनगर काल के समकालीन थे?
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मुगल काल में सरकारी दस्तावेजों और राजकीय पत्राचार के विभाग को क्या कहा जाता था?
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