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Child Development
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सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के अंतर्गत 'सुपरइगो' (Super-ego) और 'ओडिपस कॉम्प्लेक्स' (Oedipus Complex) की अंतर्संबंधित अवधारणाओं का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, फ्रायड के अनुसार बालक में नैतिक विकास, अंतःकरण (Conscience) का उदय और लिंग-विशिष्ट पहचान का निर्माण किस अवस्था में और किस मुख्य मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होता है?

Detailed Explanation

सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत के अनुसार, 'लैंगिक अवस्था' (Phallic Stage) लगभग 3 से 6 वर्ष की आयु के बीच होती है, जहाँ बालकों में 'ओडिपस कॉम्प्लेक्स' (लड़कों में माता के प्रति आकर्षण और पिता से प्रतिद्वंद्विता) तथा बालिकाओं में 'इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स' की भावना उत्पन्न होती है। इस द्वंद्व का समाधान तब होता है जब बच्चा अपने समलिंगी माता-पिता के साथ तादात्म्य (Identification) स्थापित करता है और उनके नैतिक मूल्यों तथा सामाजिक मानदंडों को अपने भीतर आत्मसात कर लेता है, जिससे व्यक्तित्व के नैतिक घटक यानी 'सुपरइगो' (Super-ego) का पूर्ण विकास होता है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ अधिगम के पठार (Plateaus in Learning), अधिगम वक्र के विभिन्न प्रकारों (जैसे- उत्तल, अवतल, एस-आकार का वक्र) तथा 'अधिगम स्थानांतरण के द्वितत्त्व व समवयव सिद्धांत' (Theory of Identical Elements) का गहन विश्लेषण करने पर, जब कोई अधिगमकर्ता किसी जटिल कौशल को सीखते समय निष्पादन में लंबे समय तक कोई प्रगति नहीं दर्शाता है (जो कि पठार की स्थिति है), और इस दौरान यदि वह अपने पूर्व ज्ञान के विशिष्ट तत्वों का नए संदर्भ में उपयोग करके निष्पादन स्तर को तीव्र गति से ऊपर उठाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा मनोवैज्ञानिक कारक अधिगम के पठार के निर्माण और उसके निवारण के संदर्भ में सर्वाधिक वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है? → शैक्षणिक मूल्यांकन की आधुनिक प्रणालियों में 'निदानात्मक आकलन' (Diagnostic Assessment), 'रचनात्मक आकलन' (Formative Assessment) और 'संकल्पात्मक मूल्यांकन' (Summative Assessment) की संकल्पनाओं का गहन तात्विक और प्रक्रियात्मक विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन तीनों के बीच के कार्यात्मक अंतर और उनके परस्पर संबंधों को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → गेस्टाल्टवादी मनोवैज्ञानिकों—विशेष रूप से वोल्फगांग कोहलर, मैक्स वर्दिहाइमर और कुर्ट कोफ्का—द्वारा प्रतिपादित 'सूझ या अंतर्दृष्टि के सिद्धांत' (Insight Theory of Learning) के तात्विक, संज्ञानात्मक तथा संज्ञानात्मक मानचित्रण (Cognitive Mapping) के स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई शिक्षार्थी किसी जटिल और अवरुद्ध समस्या परिस्थिति में यांत्रिक प्रयासों (Trial and Error) के स्थान पर अचानक संपूर्ण परिस्थिति का मानसिक पुनर्गठन (Cognitive Restructuring) कर यकायक सही समाधान खोज लेता है, तो इस अधिगम प्रक्रिया और गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैज्ञानिक और शैक्षणिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक एवं सत्य है? → गार्डनर के बहु-बुद्धि सिद्धांत (Theory of Multiple Intelligences) और स्पीयरमैन के द्विकारक सिद्धांत (Two-Factor Theory) का तुलनात्मक अध्ययन करने पर, जब हम गार्डनर द्वारा प्रतिपादित 'प्राकृतिक बुद्धि' (Naturalistic Intelligence) और 'अंतःवैयक्तिक बुद्धि' (Intrapersonal Intelligence) की संकल्पनाओं का विश्लेषण करते हैं, तो निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों सिद्धांतों की मूल मान्यताओं के बीच के सबसे बड़े तात्विक और वैज्ञानिक अंतर को स्पष्ट करता है? → लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता का स्तर' (Post-Conventional Level) के अंतिम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principles Orientation) की सबसे विशिष्ट तात्विक और मनोवैज्ञानिक विशेषता निम्नलिखित में से कौन-सी है?
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