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History of India
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खानवा का युद्ध कब हुआ था?

Detailed Explanation

बाबर और राणा सांगा के बीच 1527 में हुआ।
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→ वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे दानापुर, पटना, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुई घटनाओं और उनके नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 25 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी की 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर शाहाबाद (आरा) की ओर कूच कर गए, जहाँ उन्होंने वीर कुंवर सिंह से मिलकर नेतृत्व संभालने का आग्रह किया. 2. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिसमें ब्रिटिश अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था, किंतु अंग्रेजों ने इस दंगे को तुरंत कुचलकर पीर अली खां को अन्य विद्रोहियों के साथ सरेआम फाँसी दे दी. 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने में दानापुर से आए विद्रोही सिपाहियों और स्थानीय भूमिहार व राजपूत जमींदारों की कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि इन जिलों में कमिश्नर विलियम टेलर की दमनकारी नीतियों के कारण पूर्ण शांति बनी रही थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक स्वरूप के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों द्वारा दिए गए निम्नलिखित प्रसिद्ध मतों/कथनों पर विचार कीजिए: 1. इतिहासकार जॉन लॉरेंस और सी. आर. सीले (John Lawrence & Seeley) के अनुसार 1857 का विद्रोह पूर्णतः एक 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) मात्र था, जिसका उद्देश्य किसी राष्ट्रीय स्वतंत्रता या जन-आंदोलन का रूप लेना नहीं था, बल्कि यह केवल अनुशासित सैनिकों का अपनी सरकार के खिलाफ किया गया असंतोष था। 2. ब्रिटिश इतिहासकार टी. आर. होम्स (T. R. Holmes) का मानना था कि 1857 का विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' (Conflict between Civilization and Barbarism) था, जिसमें अंग्रेजों ने आधुनिक सभ्यता और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए इस क्रूर विद्रोह का दमन किया था। 3. स्वतंत्रता सेनानी और इतिहासकार विनायक दामोदर सावरकर (V. D. Savarkar) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक में इसे सुनियोजित ढंग से लड़ा गया भारत का 'प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' (First War of Indian Independence) घोषित किया था। 4. प्रसिद्ध मार्क्सवादी इतिहासकार एस. एन. सेन (S. N. Sen) ने अपनी आधिकारिक पुस्तक '1857' में यह निष्कर्ष निकाला था कि यह महान विद्रोह राष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेजों के विरुद्ध एक सुनियोजित और पूर्व-नियोजित षड्यंत्र था, जिसकी शुरुआत एक धर्मयुद्ध के रूप में हुई और अंततः इसका समापन स्वतंत्रता प्राप्ति के रूप में हुआ था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → फारसी राजदूत "अब्दुल रज्जाक" किसके शासनकाल में विजयनगर आया था? → माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के क्रियान्वयन तथा उसके ऐतिहासिक प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना के तहत ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद बंगाल और पंजाब के सीमा निर्धारण के लिए ब्रिटिश न्यायविद् सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग सीमा आयोगों (Boundary Commissions) का गठन किया गया था, जिन्हें 15 अगस्त 1947 से पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। 2. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता और ब्रिटिश सम्राट का भारतीय क्षेत्रों पर प्रभुत्व समाप्त हो गया, तथा दोनों नए डोमिनियनों (भारत और पाकिस्तान) की संविधान सभाओं को अपनी-अपनी संप्रभुता के तहत भारत सरकार अधिनियम, 1935 में संशोधन करने का पूर्ण अधिकार मिल गया। 3. इस अधिनियम के तहत देशी रियासतों (Princely States) को यह विकल्प दिया गया कि वे चाहें तो भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकती हैं अथवा अपनी स्वतंत्रता बनाए रख सकती हैं, और लॉर्ड माउंटबेटन ने देशी रियासतों पर दबाव बनाते हुए उन्हें बिना किसी शर्त के स्वतंत्र रहने की आधिकारिक अनुमति प्रदान की थी। 4. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) में हुए जनमत संग्रह (Referendum) में खान अब्दुल गफ्फार खान और उनकी 'खुदाई खिदमतगार' पार्टी ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए पाकिस्तान में शामिल होने के पक्ष में भारी मतदान किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → दीवान-ए-खास का उपयोग:
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