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History of India
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अकबर का मकबरा कहाँ बना है?

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सिकंदरा (आगरा) में स्थित है।
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गुप्त काल तथा मौर्योत्तर काल के आर्थिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा बड़े पैमाने पर शुरू हुई, जिसमें राजाओं द्वारा ब्राह्मणों, बौद्ध विहारों और प्रशासनिक अधिकारियों को कर-मुक्त भूमि दी जाती थी, जिससे सामंतवाद के बीज पड़े और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व न्यायिक अधिकार भी अनुदानग्राहियों को हस्तांतरित होने लगे। 2. सातवाहन वंश (मौर्योत्तर काल) ने शीशे (Lead) के सिक्कों का सबसे बड़े पैमाने पर प्रचलन किया, तथा उनके अभिलेखों में भूमिदान के प्रारंभिक साक्ष्य मिलते हैं, किंतु उन्होंने बौद्ध संघों के स्थान पर केवल वैदिक ब्राह्मणों को ही भूमि दान में देने की परंपरा की शुरुआत की थी। 3. गुप्त साम्राज्य की मुद्रा प्रणाली में सोने के सिक्कों को 'दीनार' कहा जाता था, जो कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों की तुलना में अधिक शुद्धता और कलात्मकता प्रदर्शित करते थे, विशेष रूप से कुमारगुप्त प्रथम और स्कंदगुप्त के शासनकाल में स्वर्ण सिक्कों की मात्रा में भारी वृद्धि हुई। 4. फाह्यान (Fa-Hien), जो चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में भारत आया था, ने अपने यात्रा वृत्तांत में उल्लेख किया है कि इस काल में गंगा की घाटी में वैश्य और शूद्र वर्ग की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई थी और उन्हें अछूत मानकर नगरों के बाहर बसाया जाने लगा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगलकालीन केंद्रीय प्रशासन, सैन्य व्यवस्था और धार्मिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जहाँगीर के शासनकाल में चित्रकला ने अपने चरमोत्कर्ष को प्राप्त किया, जहाँ उसने प्राकृतिक दृश्यों और पक्षियों के सजीव चित्रण को विशेष प्रोत्साहन दिया, किंतु उसने अपने पिता अकबर के विपरीत धार्मिक मामलों में कट्टरता अपनाते हुए सभी गैर-मुसलमानों पर पुनः 'जिज़िया' कर लगा दिया था। 2. शाहजहां के शासनकाल में स्थापत्य कला स्वर्ण युग में पहुँची, और मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस) का निर्माण करवाया गया, जिस पर बैठने वाला अंतिम मुगल शासक मुहम्मद शाह 'रंगीला' था, जिसके काल में नादिर शाह ने आक्रमण किया था। 3. औरंगजेब द्वारा इस्लाम के रूढ़िवादी सिद्धांतों को लागू करते हुए दरबार में संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया गया, झरोखा दर्शन और तुलादान जैसी हिंदू परंपराओं को समाप्त कर दिया गया, तथा उसने अपने शासन के शुरुआती वर्षों में ही सिक्कों पर कलमा खुदवाने की प्रथा को भी बंद कर दिया था। 4. अकबर के शासनकाल में प्रारंभ की गई 'इबादतखाना' की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सभी धर्मों के विद्वानों के बीच धार्मिक चर्चा और समन्वय स्थापित करना था, जिसे बाद में 1582 में 'दीन-ए-इलाही' (तौहीद-ए-इलाही) की घोषणा के साथ और अधिक व्यापक रूप दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश नीतियों में हुए संरचनात्मक परिवर्तनों तथा भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के माध्यम से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन विधिवत समाप्त कर दिया गया और भारत का प्रत्यक्ष नियंत्रण सीधे ब्रिटिश क्राउन (महारानी विक्टोरिया) को हस्तांतरित कर दिया गया, जिसके तहत 'भारत के गवर्नर-जनरल' को 'वाइसराय' की अतिरिक्त उपाधि प्रदान की गई और लॉर्ड कैनिंग भारत के प्रथम वाइसराय बने। 2. महारानी विक्टोरिया की घोषणा (Queen Victoria's Proclamation) में भविष्य में भारतीय रियासतों के विलय की नीति का परित्याग करने का आश्वासन दिया गया तथा भारतीय राजाओं के 'दत्तक पुत्र' लेने के अधिकारों (Adoption rights) को मान्यता प्रदान की गई। 3. घोषणा पत्र में यह स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया कि भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India) और उसकी 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (India Council) का संपूर्ण वित्तीय व्यय और वेतन सीधे तौर पर ब्रिटेन के राजकोष (British Exchequer) से वहन किया जाएगा, ताकि भारतीय राजस्व पर से वित्तीय बोझ कम किया जा सके। 4. इस अधिनियम और तदुपरांत हुए सैन्य पुनर्गठन (पील आयोग की सिफारिशों के आधार पर) के तहत सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ा दिया गया, तोपखाने पूरी तरह यूरोपीय नियंत्रण में रखे गए, और विभिन्न जातियों तथा क्षेत्रों के सैनिकों को मिलाकर रेजिमेंटों का गठन किया गया ताकि 'फूट डालो और राज करो' की नीति को सुदृढ़ किया जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश देशी शासक जैसे नाना साहब, कुंवर सिंह और बेगम हजरत महल अपने-अपने क्षेत्रों तक सीमित रहे और उनमें पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने वाले किसी साझा राजनीतिक एजेंडे या अखिल भारतीय दृष्टिकोण का पूर्ण अभाव था। 2. विद्रोहियों के पास आधुनिक हथियारों, केंद्रीकृत सैन्य संगठन, अनुशासित कमान और सुदृढ़ संचार साधनों की भारी कमी थी, जिसके कारण वे ब्रिटिश सेना की तकनीकी और संगठनात्मक श्रेष्ठता का मुकाबला लंबे समय तक नहीं कर सके। 3. देश के अधिकांश बड़े रजवाड़ों (जैसे हैदराबाद, ग्वालियर के सिंधिया और इंदौर के होलकर) तथा शिक्षित मध्य वर्ग व व्यापारियों ने इस विद्रोह का सक्रिय समर्थन किया और अंग्रेजों को वित्तीय सहायता प्रदान की। 4. विद्रोहियों के पास विजय के पश्चात स्थापित होने वाली नई राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था का कोई स्पष्ट खाका या भविष्य का वैकल्पिक ब्लूप्रिंट नहीं था, जो इसकी सबसे बड़ी वैचारिक कमजोरी साबित हुई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? किस इतिहासकार ने अलाउद्दीन के शासनकाल को "जनता के लिए वरदान" (बाजार सुधारों के कारण) कहा है?
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