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UPTET
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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे, स्थानीय स्वशासन और पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली की औपचारिक शुरुआत 'उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947' के माध्यम से की गई थी, जिसके तहत राज्य में ग्राम पंचायतों की स्थापना का प्रावधान किया गया था।
- 2. भारतीय संविधान के 73वें संविधान संशोधन (1992) के अनुरूप उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने पंचायती राज अधिनियम में संशोधन करके राज्य में महिलाओं के लिए पंचायती राज संस्थाओं में कुल सीटों का न्यूनतम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) आरक्षण का प्रावधान किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया।
- 3. उत्तर प्रदेश में जिला योजना समितियों (District Planning Committees) का गठन प्रत्येक जिले में विकास योजनाओं के समेकन के लिए किया जाता है, और इस समिति का पदेन अध्यक्ष जिले का जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: उत्तर प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली की औपचारिक शुरुआत 'उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947' के तहत की गई थी। कथन 2 सही है: 73वें संविधान संशोधन के पश्चात उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायतों में महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्थानीय निकायों में महिलाओं को कुल सीटों का एक-तिहाई (33%) आरक्षण प्रदान किया था। कथन 3 गलत है: जिला योजना समिति (District Planning Committee) का पदेन अध्यक्ष जिले का जिला मजिस्ट्रेट नहीं, बल्कि 'जिला पंचायत अध्यक्ष' (District Panchayat Chairperson) होता है, जबकि जिलाधिकारी इस समिति का मुख्य कार्यकारी अधिकारी या सचिव के रूप में कार्य कर सकता है।
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उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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1. उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति का सर्वाधिक सकारात्मक प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों (जैसे मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बुलंदशहर) पर पड़ा, जहाँ गेहूं और धान की उत्पादकता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।
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उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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