BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
39 views

मुगल साम्राज्य का क्षेत्रफल:

Detailed Explanation

औरंगजेब के काल में सबसे विशाल था।
Share:

Related Questions

→ प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में सोलह महाजनपदों और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिसमें मज्झिम निकाय (मध्य निकाय) में भी महाजनपदों का स्पष्ट विवरण दिया गया है। 2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी, जो पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से एक सुरक्षित दुर्ग के समान थी, और बाद में राजा उदयन (उदयीन) ने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र स्थानांतरित कर दी थी जो सोन और गंगा नदियों के संगम पर स्थित थी। 3. अजातशत्रु के शासनकाल में मगध ने अपनी सामरिक और कूटनीतिक रणनीतियों का विस्तार करते हुए वज्जी संघ (वैशाली) को पराजित किया, जिसमें उसके मंत्रियों वर्षाकार (वस्सकार) की कूटनीतिक फूट डालने की नीति ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। 4. मगध के उत्कर्ष में उसके भौगोलिक लाभों के अलावा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध लौह अयस्क भंडारों की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका थी, जिससे मगध के शासकों ने उन्नत हथियार और कृषि उपकरण तैयार कर अपनी सैन्य और आर्थिक शक्ति को सुदृढ़ किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों (Seals) और उनकी लिपियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हड़प्पा सभ्यता की अधिकांश मुहरें सेलखिट (Steatite) से बनाई जाती थीं, हालांकि इसके अतिरिक्त अगेट, चर्ट, तांबे और टेराकोटा की मुहरें भी मिलती हैं। 2. इस सभ्यता की लिपि को 'बुस्ट्रोफेडान' (Boustrophedon) शैली में लिखा जाता था, जिसमें पहली पंक्ति दाईं से बाईं ओर और दूसरी पंक्ति बाईं से दाईं ओर लिखी जाती थी। 3. सैंधव मुहरों पर सबसे अधिक बार 'एकसिंगी बैल' (Unicorn) का अंकन मिलता है, जबकि गाय का अंकन किसी भी मुहर पर नहीं पाया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक, सांस्कृतिक और सैन्य प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हर्षवर्धन के कन्नौज सभा का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य समारोह आयोजित करना था, जिसमें पल्लव नरेश महेंद्रवर्मन प्रथम ने भी व्यक्तिगत रूप से भाग लिया था। 2. बादामी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत और प्रामाणिक विवरण हमें महाकवि कालिदास द्वारा रचित 'ऐहोल प्रशस्ति' से प्राप्त होता है। 3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी पर अधिकार कर लिया था और 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी, तथा इसी के शासनकाल में महाबलीपुरम में प्रसिद्ध रथ मंदिरों का निर्माण कराया गया था। 4. चोल प्रशासन की सबसे प्रमुख विशेषता उनकी स्थानीय स्वशासन प्रणाली थी, जिसका जीवंत प्रमाण उत्तरमेरूर के अभिलेखों से मिलता है, जहाँ ग्राम सभाओं (सभा या महासभा) के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (पर्ची प्रणाली) का विस्तृत उल्लेख है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → छठी शताब्दी ईसा पूर्व में प्राचीन भारत में सोलह महाजनपादों के उदय और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें से वज्जी और मल्ल संघ में राजतंत्रात्मक व्यवस्था के स्थान पर गणतांत्रिक (संघीय) शासन प्रणाली प्रचलित थी। 2. मगध साम्राज्य के उत्थान में उसकी भौगोलिक स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका थी; राजगीर (गिरिव्रज) जैसी प्राकृतिक रूप से पहाड़ियों से घिरी राजधानी और पाटलिपुत्र की जल-दुर्ग जैसी स्थिति ने उसे सामरिक और व्यापारिक सुरक्षा प्रदान की। 3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों (जैसे कौशल, मद्र और लिच्छवि राजवंशों से विवाह) की नीति अपनाई, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु (कुणिक) ने काशी और वैशाली को मगध में मिलाने के लिए रथ-मूसल और महाकंटकसंग्रह जैसे नवीन युद्ध हथियारों का प्रयोग किया था। 4. शिशुनाग वंश के संस्थापक शिशुनाग ने अवंती साम्राज्य को मगध में मिलाकर उसकी शक्ति को पूरी तरह समाप्त कर दिया था, और इसी काल में मगध की राजधानी को पाटलिपुत्र से हटाकर पुनः वैशाली स्थानांतरित कर दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वैदिक काल और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'अयस' शब्द का प्रयोग सामान्यतः तांबे या कांस्य के लिए किया जाता था, जबकि उत्तर वैदिक काल में लोहे के प्रचलन के बाद इसके लिए 'कृष्ण अयस' या 'श्याम अयस' शब्द का प्रयोग किया जाने लगा। 2. 'गोपथ ब्राह्मण' का संबंध शुक्ल यजुर्वेद से है, जिसमें विभिन्न यज्ञीय अनुष्ठानों और कर्मकांडों के साथ-साथ ब्रह्मांड की उत्पत्ति और प्राचीन ऋषियों के वंशावली का विस्तृत विवरण मिलता है। 3. उत्तर वैदिक काल की चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW - Painted Grey Ware) संस्कृति मुख्य रूप से गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र से जुड़ी हुई है, जो इस काल के लोहे के प्रयोग और ग्रामीण से अर्द्ध-नगरीय जीवन की ओर संक्रमण को दर्शाती है। 4. वैदिक कालीन राजनीतिक संस्था 'विदथ' आर्यों की सबसे प्राचीन संस्था मानी जाती है, जिसमें न केवल धार्मिक अनुष्ठान और सैन्य लूट के माल का वितरण होता था, बल्कि इसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी अनिवार्य रूप से होती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.