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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत और लॉरेंस कोहलवर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जीन पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास एक निरंतर और क्रमिक प्रक्रिया है जो अवस्थाओं (Stages) के माध्यम से आगे बढ़ती है, और मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage) में बालक 'संरक्षण' (Conservation) तथा 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की योग्यता अर्जित कर लेता है।
  2. 2. पियाजे के सिद्धांत की औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) में किशोरावस्था के दौरान 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-deductive reasoning) और अमूर्त चिंतन की क्षमता का पूर्ण विकास हो जाता है।
  3. 3. लॉरेंस कोहलवर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) स्तर के अंतर्गत आने वाले सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार चरण में व्यक्ति कानून को समाज के कल्याण के लिए परिवर्तनशील और तार्किक मानता है।
  4. 4. कोहलवर्ग के अनुसार, नैतिक विकास के सभी चरण सार्वभौमिक और अपरिवर्तनीय क्रम में होते हैं, तथा कोई भी व्यक्ति किसी भी अवस्था को छोड़े बिना समान दिशा में आगे बढ़ता है, भले ही सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारक गति को प्रभावित कर सकते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए चारों कथन जीन पियाजे और लॉरेंस कोहलवर्ग के सिद्धांतों के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। 1. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की तीसरी अवस्था (मूर्त संक्रियात्मक अवस्था, 7-11 वर्ष) में बच्चे संरक्षण (Conservation), वर्गीकरण और विकेंद्रीकरण की क्षमता प्राप्त कर लेते हैं। 2. चौथी अवस्था (औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था, 11 वर्ष से आगे) में अमूर्त चिंतन और परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क की क्षमता विकसित होती है। 3. कोहलवर्ग के उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-conventional level) के अंतिम चरण में व्यक्ति सामाजिक अनुबंध को समझता है और देखता है कि नियम समाज की भलाई के लिए हैं और तार्किक आधार पर बदले जा सकते हैं। 4. कोहलवर्ग का यह भी मानना था कि नैतिक विकास के चरण सार्वभौमिक (Universal) और एक निश्चित अपरिवर्तनीय क्रम (Invariant sequence) में होते हैं।
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