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UPTET
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और बौद्ध शिक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बौद्ध शिक्षा प्रणाली में अध्ययन की शुरुआत 'प्रवज्या' संस्कार के साथ होती थी, जिसके लिए छात्र की न्यूनतम आयु 8 वर्ष निर्धारित थी और इस संस्कार के पश्चात छात्र को 'श्रामणेर' कहा जाता था।
- 2. बौद्ध शिक्षा में उच्च शिक्षा और संघ की पूर्ण सदस्यता प्राप्त करने के लिए 'उपासंपदा' संस्कार संपन्न किया जाता था, जिसके लिए छात्र की न्यूनतम आयु 20 वर्ष होनी अनिवार्य थी।
- 3. वल्लभी विश्वविद्यालय प्राचीन भारत में पश्चिमी तट पर स्थित था, जो हीनयान बौद्ध धर्म के अध्ययन का प्रमुख केंद्र था और इसकी स्थापना मयूरवंश के शासकों द्वारा की गई थी।
- 4. नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों के विपरीत, बौद्ध विहारों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा का माध्यम संस्कृत या पाली के स्थान पर केवल प्राकृत भाषा था, जिसमें किसी अन्य भाषा के अध्ययन की अनुमति नहीं थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: बौद्ध शिक्षा प्रणाली में मठों या विहारों में प्रवेश और शिक्षा की शुरुआत 'प्रवज्या' संस्कार से होती थी, जिसके लिए न्यूनतम आयु 8 वर्ष थी और इसके बाद छात्र 'श्रामणेर' कहलाता था। कथन 2 सही है: भिक्षु जीवन की पूर्णता और संघ की स्थायी सदस्यता के लिए 'उपासंपदा' संस्कार होता था, जिसके लिए न्यूनतम आयु 20 वर्ष थी। कथन 3 सही है: वल्लभी (गुजरात में) हीनयान बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र था, जो शिक्षा और संस्कृति का प्रसिद्ध स्थल था। कथन 4 गलत है क्योंकि बौद्ध शिक्षा में मुख्य रूप से पाली भाषा का उपयोग शिक्षा के माध्यम के रूप में किया जाता था, किंतु महायान काल के दौरान संस्कृत का भी व्यापक प्रयोग हुआ और किसी एक भाषा की कठोर बाध्यता नहीं थी।
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उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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