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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' की अवधि क्या है?
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Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था लगभग 2 वर्ष से 7 वर्ष की आयु तक होती है। इस अवस्था में बच्चा भाषा का उपयोग करना सीखता है और वस्तुओं को प्रतीकों के रूप में देखना शुरू करता है।
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जीन पियाजे के अनुसार 'अमूर्त चिंतन' और 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' की क्षमता किस अवस्था में विकसित होती है?
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उत्तर प्रदेश की मृदाओं (Soils) और उनकी भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी और बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ अत्यधिक उपजाऊ चिकनी मिट्टी होती हैं, जिनमें जल धारण करने की उच्च क्षमता पाई जाती है और सूखने पर इनमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं।
2. उत्तर प्रदेश के मैदानी भागों में पाई जाने वाली 'राड़' या 'भूड़' (Bhoor) मृदा मुख्य रूप से गंगा और यमुना की नदियों के कछार में पाई जाने वाली अत्यंत उपजाऊ नवीन जलोढ़ मिट्टी है, जिसमें बालू की मात्रा बिल्कुल नहीं होती।
3. विंध्यन पर्वतीय और पठारी क्षेत्रों के समीप पाई जाने वाली 'परवा' (Parwa) मृदा हल्की बलुई-दोमट प्रकार की मिट्टी होती है, जिसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस की प्रचुरता होती है, किंतु इसमें सिंचाई की अत्यधिक आवश्यकता पड़ती है।
4. उत्तर प्रदेश के उत्तरी जिलों (तराई क्षेत्र) में पाई जाने वाली मृदा में नाइट्रोजन और ह्यूमस की अधिकता होती है, जिससे यह धान और गन्ने की फसल के लिए अत्यधिक उपयुक्त मानी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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