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History of India
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अकबर ने "इलाही संवत" (कैलेंडर) की शुरुआत किस वर्ष की थी?

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1583 ई. में इलाही संवत की शुरुआत हुई।
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मुगल काल में प्रांतों को क्या कहा जाता था? सत्रहवीं और अट्ठारहवीं शताब्दी में यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और उनकी व्यापारिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने अपनी पहली व्यावसायिक कोठी वर्ष 1605 में मसूलीपट्टम में स्थापित की थी, और उन्होंने भारतीय वस्त्रों के व्यापार को बढ़ावा देते हुए मसालों के द्वीपसमूह (इंडोनेशिया) के साथ भारतीय कपड़ों का निर्यात बड़े पैमाने पर शुरू किया था। 2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में व्यापार करने का एकाधिकार प्रदान करने वाला पहला शाही चार्टर वर्ष 1600 में महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा दिया गया था, जबकि मुगल दरबार में आने वाला पहला अंग्रेजी दूत विलियम हॉकिंस था जो जहाँगीर के दरबार में 1608 में आया था। 3. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना फ्रांसीसी मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से वर्ष 1664 में हुई थी, और उन्होंने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री फ्रैंक कैरो के नेतृत्व में पुडुचेरी में वर्ष 1668 में स्थापित की थी। 4. पुर्तगालियों ने भारत में अपने प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए 'कार्टाज' (Cartaz) नामक एक नौसैनिक व्यापारिक लाइसेंस प्रणाली लागू की थी, जिसके तहत अरब सागर और हिंद महासागर से गुजरने वाले हर भारतीय और एशियाई जहाज को कर देना अनिवार्य था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मध्यकालीन भारत के इतिहास में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' के विभिन्न पहलुओं, दार्शनिकधाराओं तथा उनके संतों के योगदान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को बौद्ध और जैन धर्म के प्रभाव को समाप्त करने के लिए अलवार (वैष्णव संत) और नयनार (शैव संत) संतों द्वारा आगे बढ़ाया गया, जिन्होंने तमिल भाषा में रचित अपने भजनों (जैसे 'नालायिर दिव्य प्रबंधम' और 'तेवारम') के माध्यम से भक्ति का प्रसार किया और जातिगत भेदभाव को चुनौती दी। 2. सूफी सिलसिलों के शुरुआती दौर में 'बा-शरा' (इस्लामी शरीयत कानूनों के नियमों और बंधनों का कड़ाई से पालन करने वाले, जैसे चिश्ती और सुहरावर्दी) और 'बे-शरा' (शरीयत के बंधन से स्वतंत्र रहने वाले, जिन्हें 'मदर्स' या मस्त फकीर भी कहा जाता था) नामक दो प्रमुख धाराएं विकसित हुई थीं। 3. चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रमुख शिष्य और उत्तराधिकारी शेख निजामुद्दीन औलिया ने योग क्रियाओं और संगीत के एक रूप 'समां' को अपनी आध्यात्मिक साधना का अभिन्न अंग बनाया था, जिनके उदार दृष्टिकोण के कारण उन्हें 'महबूब-ए-इलाही' (ईश्वर के प्रिय) की उपाधि से सम्मानित किया गया था। 4. भक्ति संत कबीर दास और रामानंद ने निर्गुण और सगुण दोनों धाराओं का समन्वय करते हुए रूढ़िवादी ब्राह्मणवाद, जाति व्यवस्था और बाह्य आडंबरों (जैसे मूर्तिपूजा और तीर्थयात्रा) का खंडन किया, तथा कबीर के उपदेश उनके शिष्यों द्वारा 'बीजक' नामक ग्रंथ में संकलित किए गए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश सरकार ने पुरानी 'ब्राउन बैस' (Brown Bess) बन्दूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' (Enfield Rifle) को शामिल करने का निर्णय लिया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी आक्रोश उत्पन्न कर दिया था। 2. 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध बगावत करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों सार्जेंट ह्यू हडसन और लेफ्टिनेंट बॉग पर हमला कर उन्हें मार गिराया था। 3. मंगल पांडे को ब्रिटिश सरकार द्वारा अदालत के आदेश पर 8 अप्रैल 1857 को निर्धारित तिथि से पहले ही बैरकपुर में फांसी दे दी गई थी, जिसके परिणामस्वरूप देश की अन्य छावनियों में भी विद्रोह की चिंगारी तेजी से फैल गई। 4. चर्बी वाले कारतूस की घटना से सबसे पहले बगावत करने वाली रेजिमेंट मेरठ की 3rd लाइट कैवलरी थी, जिसने जनवरी 1857 में ही आधिकारिक तौर पर नए कारतूसों का इस्तेमाल करने से पूरी तरह इनकार कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में सत्ता के विकेंद्रीकरण और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की वास्तविक राजनीतिक स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली के विद्रोही सिपाहियों और नवाबों द्वारा प्रशासन के सुचारू संचालन के लिए दस सदस्यों (छह सैन्य और चार नागरिक) वाली एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) का गठन किया गया था, जिसके सभी महत्वपूर्ण निर्णय सम्राट की व्यक्तिगत अनुमति के बिना लिए जाते थे। 2. बहादुर शाह जफर इस विद्रोह के नाममात्र के प्रतीक और 'शहंशाह-ए-हिन्दुस्तान' अवश्य बनाए गए थे, किंतु उनकी स्थिति इतनी विवश थी कि वे अपने ही राजमहल के भीतर विद्रोही सैनिकों की अनुशासनहीनता, आर्थिक तंगी और मनमानी कार्यप्रणाली पर कोई प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं कर सके थे। 3. सितंबर 1857 में ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनradhikar (पुनः अधिकार) करने के पश्चात, बहादुर शाह जफर को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर रंगून (बर्मा) निर्वासित कर दिया था, जहाँ वर्ष 1862 में उनका निधन हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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