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History of India
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विजयनगर में न्याय व्यवस्था का सर्वोच्च अधिकारी कौन था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
विजयनगर साम्राज्य में न्याय का अंतिम निर्णय राजा द्वारा ही लिया जाता था।
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फारसी राजदूत "अब्दुल रज्जाक" किसके शासनकाल में विजयनगर आया था?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व व्यवस्थाओं—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत भू-राजस्व की दर को स्थायी रूप से निश्चित कर दिया गया था, जिससे जमींदार भूमि के वास्तविक स्वामी बन गए और यदि वे निर्धारित तिथि तक सूर्यास्त से पहले कर नहीं चुका पाते थे, तो उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी (सूर्यास्त कानून)।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता था, जिसमें व्यक्तिगत किसानों को भूमि का स्वामित्व दिया गया और लगान की दरें पूरी तरह स्थायी थीं, जिन्हें कभी बढ़ाया नहीं गया।
3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके पूरे गाँव या 'महाल' (गाँवों के समूह) के आधार पर किया जाता था, और राजस्व संग्रह की जिम्मेदारी मुख्य रूप से ग्राम के मुखिया या लंबरदार को सौंपी जाती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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अकबर का मकबरा कहाँ बना है?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त प्रणाली के अंतर्गत लॉर्ड कार्नवालिस ने बंगाल और बिहार के क्षेत्रों में भू-राजस्व की मांग को जमींदारों के लिए हमेशा के लिए निश्चित कर दिया था, जिसके कारण कृषि के विस्तार और सुधारों में जमींदारों की रुचि बहुत अधिक बढ़ गई थी और उन्होंने किसानों के कल्याण के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया था।
2. रयतवारी व्यवस्था के तहत मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में भूमि का स्वामित्व सीधे किसानों (रयत) के पास था, तथा सरकार और किसानों के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें लगान की दरें बहुत अधिक थीं और अकाल या फसल खराब होने की स्थिति में भी लगान माफी का कोई स्पष्ट या उदार प्रावधान नहीं था।
3. महालवारी व्यवस्था को मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या ग्राम समुदाय (महाल) के स्तर पर किया जाता था, और इसके भुगतान के लिए पूरा गाँव सामूहिक रूप से उत्तरदायी था।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारतीय कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण हुआ और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का औपनिवेशिक दोहन इस हद तक बढ़ गया कि किसान पूरी तरह से साहूकारों और महाजनों के ऋणजाल में उलझते चले गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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