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History of India
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मैसूर राज्य की स्थापना 1612 ई. में वाडियार वंश ने किसके समय में की थी?

Detailed Explanation

विजयनगर के राजा वेकंट द्वितीय के शासनकाल के दौरान वाडियार वंश ने मैसूर की स्थापना की।
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Related Questions

→ सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की अर्थव्यवस्था, व्यापार और उसकी विशिष्ट शिल्प तकनीकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस सभ्यता के लोग धातु कर्म (Metallurgy) में अत्यंत कुशल थे और उन्होंने तांबे तथा टिन को मिलाकर काँसे (Bronze) के निर्माण की तकनीक विकसित कर ली थी, जिसके प्रमाण न केवल नर्तकी की कांस्य मूर्ति बल्कि बड़े पैमाने पर बनाए गए अस्त्र-शस्त्रों और कृषि उपकरणों से भी मिलते हैं। 2. लोथल और चान्हूदो जैसे स्थलों से मनके (Beads) बनाने के कारखानों के अवशेष मिले हैं, जहाँ अकीक (Carnelian), जैस्पर, शंख और पन्ना जैसे कीमती पत्थरों से आभूषण तैयार किए जाते थे, जो मेसोपोटामिया के साथ होने वाले विदेशी व्यापार का एक प्रमुख हिस्सा थे। 3. सिंधु घाटी सभ्यता के मोहरों पर जहाजों और नौकाओं का अंकन इस बात का प्रमाण है कि इस सभ्यता के व्यापारियों का समुद्री व्यापार नेटवर्क काफी विकसित था, और लोथल का 'गोदीवाड़ा' (Dockyard) इस विदेशी व्यापार के संचालन का मुख्य नौवहन केंद्र था। 4. इस सभ्यता के लोग बाट और माप की एक उन्नत एवं मानकीकृत प्रणाली से परिचित थे, जिसमें द्विआधारी (Binary) और दशमलव (Decimal) दोनों प्रणालियों का मिश्रण तथा वजन के लिए सामान्यतः चर्ट (Chert) पत्थर से बने घनाकार (Cubical) बाटों का प्रयोग किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सविनय अवज्ञा आंदोलन, गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1930 में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, क्योंकि महात्मा गांधी समेत कांग्रेस के शीर्ष नेता सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण जेल में बंद थे। 2. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने भारतीय लोगों को अपने व्यक्तिगत और घरेलू उपयोग के लिए समुद्र तटों पर बिना किसी कर के नमक बनाने का कानूनी अधिकार देने पर सहमति व्यक्त की थी। 3. गांधी-इरविन समझौते के उपरांत आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते का अनुमोदन किया गया और इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज' का प्रस्ताव पारित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में हुई घटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिन्हें कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका दिया गया था। 2. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में स्थानीय सिपाहियों ने विद्रोही तेवर अपनाए, किंतु छपरा में कमिश्नर टेलर की नीति के कारण कोई भी यूरोपीय अधिकारी हताहत नहीं हुआ और तुरंत मार्शल लॉ लागू कर दिया गया। 3. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के सैनिकों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर सीधे बाबू कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गए। 4. शाहबाद (आरा) क्षेत्र में विद्रोह का आरंभ बाबू कुंवर सिंह के प्रत्यक्ष नेतृत्व में हुआ था, जिन्होंने दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के पहुँचने से पहले ही आरा शहर पर पूरी तरह अधिकार कर लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां द्वारा किए गए नेतृत्व तथा ब्रिटिश सेना द्वारा विद्रोह के दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने संभाला था, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित कर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी थी और अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार एवं राजनीतिक रणनीतिकार थे। 2. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सेना का अत्यंत कुशलता से संचालन किया तथा बाद में ग्वालियर और कालपी के क्षेत्रों में अंग्रेजों के विरुद्ध कड़ा सैन्य प्रतिरोध जारी रखा। 3. कानपुर में ब्रिटिश सेना के आत्मसमर्पण के बाद हुए 'सती चौरा घाट नरसंहार' (बीबीघर नरसंहार) की घटना के पश्चात ब्रिटिश सेनानायक जनरल कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरतापूर्वक कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया और विद्रोह का पूर्ण दमन किया। 4. विद्रोह के असफल होने के बाद नाना साहब और अजीमुल्ला खां नेपाल की तराई की ओर निकल गए, जबकि तात्या टोपे को कभी भी ब्रिटिश सेना द्वारा पकड़ा नहीं जा सका और वे जीवनभर अज्ञातवास में रहे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, विशेषकर 'अष्टप्रधान' और राजस्व प्रशासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी के केंद्रीय प्रशासन में 'अष्टप्रधान' नामक मंत्रिपरिषद का गठन किया गया था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे सम्राट के प्रति उत्तरदायी था और यह कोई मंत्रिमंडल (Cabinet) न होकर आठ अलग-अलग प्रशासनिक विभागों के व्यक्तिगत सचिवों या सलाहकारों का समूह था। 2. अष्टप्रधान में 'पेशवा' (या पंत प्रधान) प्रधानमंत्री का पद था जो सामान्य प्रशासन और वित्त का प्रमुख होता था, जबकि सैन्य मामलों का सर्वोच्च कमांडर 'सेनापति' (या सर-ए-नौबत) होता था, जो विशुद्ध रूप से वंशानुगत आधार पर नियुक्त किया जाता था। 3. शिवाजी ने अपनी प्रशासनिक सुधार नीति के अंतर्गत मलिक अंबर की लगान प्रणाली पर आधारित भूमि सर्वेक्षण और मूल्यांकन को अपनाया, तथा अपने राज्य में 'जागीरदारी प्रथा' को हतोत्साहित करते हुए सैनिकों और अधिकारियों को नगद वेतन देने की परंपरा को बढ़ावा दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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