निम्नलिखित में से कौन सा कथन विकास के 'समीप - दूराभिमुख' सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करता है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
1. प्रस्तावना: विकास का 'समीप-दूराभिमुख' सिद्धांत (Proximodistal Principle)
बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (Child Development and Pedagogy) के अंतर्गत शारीरिक और गामक (motor) विकास कुछ निश्चित दिशात्मक नियमों का पालन करता है। विकास की दिशा के दो मुख्य सार्वभौमिक सिद्धांत स्वीकार किए गए हैं: पहला, शीर्षाभिमुख सिद्धांत (Cephalocaudal Principle) और दूसरा, समीप-दूराभिमुख सिद्धांत (Proximodistal Principle)। लैटिन भाषा में 'Proximo' का शाब्दिक अर्थ 'समीप अथवा केंद्र' (Near/Center) होता है और 'Distal' का अर्थ 'दूर अथवा परिधि' (Far/Extremities) होता है। इस सिद्धांत के अनुसार बालक के शरीर का विकास केंद्रीय अक्ष (रीढ़ की हड्डी, धड़ और छाती) से प्रारंभ होकर बाहर की ओर यानी परिधीय अंगों (हाथ, पैर, हथेलियों और उंगलियों) की दिशा में आगे बढ़ता है।
2. गामक विकास का अनुक्रम: स्थूल से सूक्ष्म की ओर (Gross to Fine Motor Development)
समीप-दूराभिमुख सिद्धांत तंत्रिका-पेशीय नियंत्रण (neuromuscular control) के व्यवस्थित क्रम की व्याख्या करता है:
- केंद्रीय धड़ पर नियंत्रण (Trunk and Spine Control): नवजात शिशु सर्वप्रथम अपनी गर्दन, रीढ़ की हड्डी और छाती की बड़ी मांसपेशियों पर संतुलन स्थापित करता है। यह केंद्र का स्थूल नियंत्रण (gross motor skill) कहलाता है।
- भुजाओं एवं जांघों पर नियंत्रण (Proximal Limbs): धड़ के स्थिर होने के बाद नियंत्रण बाहों, कंधों और जांघों की ओर बढ़ता है। शिशु सबसे पहले अपनी पूरी बांह को हिलाकर किसी वस्तु तक पहुँचने का प्रयास करता है।
- कलाइयों और हथेलियों पर नियंत्रण (Wrists and Palms): तंत्रिका तंत्र के परिपक्व होने पर नियंत्रण बांहों से फिसलकर कलाइयों और हथेलियों तक पहुँचता है, जिससे शिशु किसी वस्तु को हथेली की मदद से पकड़ना (palmar grasp) सीखता है।
- उंगलियों का सूक्ष्म समन्वय (Distal Extremities & Fine Motor Skills): विकास के इस अनुक्रम में सबसे अंत में उंगलियों के पोरों पर नियंत्रण आता है। उंगलियों और अंगूठे की सहायता से बारीक वस्तुएं पकड़ना (pincer grasp), लिखना, चित्र बनाना, सुई में धागा डालना या मोतियों को पिरोना सबसे बाद में विकसित होता है।
3. विकल्प (C) का संदर्भ और व्यावहारिक विश्लेषण
प्रश्नोत्तर में दिया गया विकल्प (C) इस सिद्धांत का सबसे सटीक व्यावहारिक प्रमाण प्रस्तुत करता है:
- गेंद को दोनों हाथों से पकड़ना (Catching a Ball): किसी बड़ी गेंद को दोनों हाथों से लपकने के लिए छाती, कंधों और दोनों बाहों की बड़ी मांसपेशियों के समन्वय की आवश्यकता होती है। चूंकि ये अंग शरीर के केंद्रीय अक्ष के सर्वाधिक समीप होते हैं, अतः बालक इस कौशल को जीवन के प्रारंभिक दौर में ही सीख लेता है।
- मोतियों को धागे में पिरोना (Stringing Beads): धागे में बारीक मोती पिरोने के लिए उंगलियों के पोरों के अत्यंत सूक्ष्म नियंत्रण (fine motor coordination) और आंख-हाथ के सटीक तालमेल की आवश्यकता होती है। उंगलियां शरीर के केंद्र से सबसे दूर स्थित अंग हैं, इसलिए इन पर नियंत्रण बाद में स्थापित होता है।
- अतः यह प्रत्यक्ष प्रमाण है कि बालक पहले केंद्र के निकट स्थित अंगों से गेंद पकड़ना सीखता है और उसके बाद परिधि पर स्थित उंगलियों से मोतियों को पिरोना सीखता है।
4. तुलनात्मक तालिका: शीर्षाभिमुख बनाम समीप-दूराभिमुख सिद्धांत
| तुलना का आधार | शीर्षाभिमुख सिद्धांत (Cephalocaudal) | समीप-दूराभिमुख सिद्धांत (Proximodistal) |
|---|---|---|
| विकास की दिशा | सिर से पैर की ओर (ऊर्ध्वाधर/Vertical) | केंद्र से बाहर परिधि की ओर (क्षैतिज/Horizontal) |
| प्रारंभिक नियंत्रण | पहले सिर संभालना और नजरें टिकाना | पहले रीढ़ और धड़ का संतुलन संभालना |
| क्रियात्मक उदाहरण | बालक खड़े होने से पहले बैठना सीखता है | बालक उंगलियों से लिखने से पहले पूरी बांह हिलाता है |
5. अन्य विकल्पों का तार्किक खंडन
- विकल्प A (विकास बहु-दिशात्मक और बहु-आयामी है): यह कथन विकास की व्यापक प्रकृति के विषय में सत्य है, किंतु यह शरीर के केंद्र से बाहर की ओर होने वाली विशिष्ट दिशा का निरूपण नहीं करता।
- विकल्प B (समरूप जुड़वां बच्चों का विकास सर्वथा समान दर से होता है): पोषण, पारिवारिक परिवेश, सामाजिक-सांस्कृतिक कारक और व्यक्तिगत विभिन्नताओं के कारण समरूप जुड़वां बच्चों की विकास दर में भी अंतर आ सकता है।
- विकल्प D (बैठने से पहले खड़े होना सीखना): यह कथन शारीरिक विकास के शीर्षाभिमुख नियम के विपरीत है; बालक पहले धड़ के बल बैठना सीखता है और उसके बाद ही पैरों के बल खड़ा हो पाता है।
6. शिक्षण और परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्व
अध्यापकों के लिए इस सिद्धांत का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। प्राथमिक कक्षा में बच्चों पर शुरुआत में ही सुंदर हस्तलेखन (handwriting) का दबाव नहीं डालना चाहिए। पहले उन्हें बड़ी मांसपेशियों के प्रयोग (मिट्टी के खिलौने बनाना, गेंद फेंकना) के अवसर दिए जाने चाहिए, जिससे उनका केंद्रीय संतुलन मजबूत हो सके और बाद में उंगलियों के सूक्ष्म कौशलों का स्वाभाविक विकास हो सके।