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History of India
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इब्राहिम लोदी ने ग्वालियर के किस राजा को हराकर ग्वालियर को दिल्ली सल्तनत में मिलाया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
विक्रमजीत तोमर को हराकर उसने ग्वालियर जीता था।
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किस सुल्तान ने यह घोषणा की थी कि "मैं नहीं जानता कि क्या शरीयत के अनुकूल है और क्या नहीं"?
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मुगल कालीन प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा प्रारंभ की गई 'दहसाला' (ज़बती) व्यवस्था के तहत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और उसके औसत मूल्यों का आकलन करके राजस्व का निर्धारण किया जाता था।
2. शाहजहां के शासनकाल में कृषि भूमि के वर्गीकरण के अंतर्गत 'पोलज' वह भूमि थी जिस पर लगातार खेती की जाती थी और उसे कभी भी खाली नहीं छोड़ा जाता था।
3. औरंगजेब के शासनकाल में जारी किए गए प्रसिद्ध 'मुहम्मद हाशमी फरमान' या प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार, किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित करने हेतु तकावी (टाकावी) ऋण दिए जाने और आवश्यकता पड़ने पर भू-राजस्व में छूट या राहत देने का प्रावधान था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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दिल्ली सल्तनत के विभिन्न राजवंशों और उनके प्रशासनिक सुधारों, सैन्य संगठनों तथा राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य में बिचौलियों (जैसे खुत्तो, मुकद्दम और चौधरी) के विशेषाधिकारों को समाप्त करते हुए सीधे किसानों से भू-राजस्व वसूलने की व्यवस्था की और उपज का आधा हिस्सा (50 प्रतिशत) कर के रूप में निर्धारित किया।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलतगढ़ (देवगिरि) स्थानांतरित करने के बाद सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) के रूप में तांबे और कांसे के सिक्के चलाए, जिनका मूल्य सोने और चांदी के दीनार व टका के बराबर रखा गया, जिससे जाली सिक्कों का चलन बढ़ गया और अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में आ गई।
3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार किसानों पर सिंचाई कर (शरब) लगाया, जो कुल उपज का 1/10 भाग था, तथा उसने अनेक नए नहरों का निर्माण करवाया और ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लागू कर दिया।
4. लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी ने सल्तनत में 'बहलोली' नामक चांदी के सिक्के का प्रचलन शुरू किया, जो अकबर के समय तक विनिमय का मुख्य साधन बना रहा, और उसने अफगान सरदारों की संतुष्टि के लिए 'मसनद-ए-आली' की अवधारणा को बढ़ावा दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे द्वारा झांसी और ग्वालियर क्षेत्र में चलाए गए सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज़ द्वारा झांसी के किले की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने पुरुष वेश धारण कर और अपनी सेना का नेतृत्व करते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया तथा अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी।
2. झांसी के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने कालपी में अंग्रेजों से पराजित होने के बाद ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया, जहाँ उन्होंने सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया की सेना को परास्त कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया।
3. ग्वालियर पर अधिकार करने के बाद विद्रोही नेताओं ने पेशवा नाना साहिब को ग्वालियर का पेशवा घोषित किया और स्वयं शासन की बागडोर अपने हाथों में संभाली।
4. 18 जून 1858 को ग्वालियर के निकट कोटा-की-सराय के युद्ध में ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे वहाँ से निकलकर राजस्थान और मध्य भारत के जंगलों में छापामार युद्ध जारी रखने में सफल रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में गुप्तोत्तर काल और दक्षिण भारत के राजवंशों की प्रशासनिक, सैन्य और सांस्कृतिक प्रणालियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बाद प्रसिद्ध संत अप्पर के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार कर लिया था, और उसने त्रिचिरापल्ली, मंडागपट्टू और महाबलीपुरम में कई भव्य चट्टानों को काटकर बनाए जाने वाले मंदिरों (रॉक-कट मंदिरों) का निर्माण आरंभ करवाया था।
2. बादामी के चालुक्य राजवंश के महान शासक पुलकेशिन द्वितीय की उपलब्धियों का विस्तृत वर्णन उसके दरबारी कवि रविकीर्ति द्वारा रचित 'ऐहोल प्रशस्ति' में प्राप्त होता है, जिसमें नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन पर उसकी निर्णायक विजय का उल्लेख है।
3. चोल राजवंश के केंद्रीय प्रशासन में 'उर', 'सभा' और 'नगरम्' नामक स्वायत्त ग्राम संस्थाएं थीं, जिनमें 'सभा' मुख्य रूप से अग्रहार (ब्रह्मादेय) गाँवों की ब्राह्मणों की सभा होती थी जो 'उत्तरमेरूर शिलालेख' के अनुसार कड़े नियमों और पर्ची पद्धति (लॉटरी) द्वारा संचालित होती थी।
4. वर्धन वंश के शासक हर्षवर्धन के शासनकाल में नालंदा विश्वविद्यालय शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था, जिसके रखरखाव के लिए हर्ष ने सौ गाँवों की आय दान में दी थी, और इस काल में कन्नौज साम्राज्य की राजनीतिक राजधानी के रूप में अत्यधिक उत्कर्ष पर पहुँच गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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