History of India
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था, गुप्तचर तंत्र और सम्राट अशोक के अभिलेखों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के सात अंगों (सप्तांग सिद्धांत) का उल्लेख मिलता है, जिसमें 'अमात्य' को राज्य की आँख और 'कोश' को राज्य का मुख कहा गया है, तथा केंद्रीय प्रशासन के 18 महत्वपूर्ण विभागों को 'तीर्थ' कहा जाता था जिनके प्रमुख 'समाहर्त्ता' (राजस्व संग्रह प्रमुख) और 'संनिधातृ' (राजकीय कोषागार प्रमुख) होते थे।
- 2. मौर्यकालीन गुप्तचर विभाग को महामात्यसर्प कहा जाता था, और गुप्तचरों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया था - 'संस्था' (जो एक ही स्थान पर संस्थागत रूप से रहकर कार्य करते थे) और 'संचारा' (जो देश भर में घूमकर गुप्त सूचनाएँ एकत्रित करते थे)।
- 3. अशोक के धम्म महामात्रों की नियुक्ति उसके शासनकाल के 14वें वर्ष में की गई थी, जिनका मुख्य कार्य विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच धार्मिक सहिष्णुता का प्रसार करना और कैदियों के जीवन की स्थितियों में सुधार कर उनके दंड को कम करना या मुक्त कराना था, जिसका उल्लेख उसके पंचम शिलालेख में मिलता है।
- 4. अशोक के सारनाथ स्तंभ लेख (सिंहचतुर्मुख) में संघभेद रोकने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं तथा भिक्षु-भिक्षुणियों को चेतावनी दी गई है कि जो कोई भी संघ में फूट डालेगा, उसे श्वेत वस्त्र पहनाकर मठ से निष्कासित कर दिया जाएगा; इस आदेश का विवरण कौशाम्बी और सांची के लघु स्तंभ लेखों में भी सुरक्षित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है। कथन 4 में वर्णित संघभेद रोकने और श्वेत वस्त्र पहनाकर मठ से निष्कासित करने के कड़े निर्देश अशोक के 'सारनाथ स्तंभ लेख' में नहीं, बल्कि 'कौशाम्बी और सांची के लघु स्तंभ लेखों' (जिसे कौशाम्बी का शिलेख भी कहा जाता है) में दिए गए हैं, जबकि सारनाथ स्तंभ लेख मुख्य रूप से धम्म चक्र प्रवर्तन और सिंहचतुर्मुख से संबंधित है। मौर्य प्रशासन की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर…
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गदर पार्टी और क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित…
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'नदीसूक्त' में कुल 21 नदियों का उल्लेख मिलता है, जिसमें पूर्व की सबसे अंतिम उल्लिखित नदी 'गंगा' और पश्चिम की सबसे अंतिम उल्लिखित नदी 'क्रुमु' (कुर्रम) है, तथा इस काल में सिंधु नदी को सर्वाधिक पवित्र और 'नदितमा' (नदियों की माता) माना गया है।
2. उत्तर वैदिक काल में लिखित 'शतपथ ब्राह्मण' में कृषि की चारों क्रियाओं - जुताई (कर्षण), बुवाई (वपन), कटाई (लवनी) और मड़ाई (मर्दन) का विस्तृत कर्मकांडीय विवरण मिलता है, और इसी ग्रंथ में विदेह माधव की कथा का उल्लेख है जिसमें अग्नि द्वारा सदाानीरा (गंडक) नदी को पार करने का वर्णन है।
3. ऋग्वैदिक समाज में वर्ण व्यवस्था कर्म पर आधारित थी, जिसका स्पष्ट प्रमाण नवें मंडल के 'पुरुष सूक्त' में मिलता है जहाँ विराट पुरुष के अंगों से चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) की उत्पत्ति का वर्णन किया गया है।
4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत आरण्यकों को 'रहस्य पुस्तक' भी कहा जाता है, जिनकी रचना वनों में की गई थी और ये मुख्य रूप से दार्शनिक चिंतन, यज्ञ के गूढ़ रहस्यों तथा आत्मा-परमात्मा के संबंध पर विचार करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश भारतीय सेना में पुराने 'ब्राउन बेस' मस्कट के स्थान पर जिस नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, उसके कारतूस के आवरण को लोड करने से पहले दाँतों से काटना पड़ता था, और सैनिकों में यह प्रबल अफवाह फैल गई थी कि उस आवरण में गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है।
2. चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में सबसे पहले बगावत का बिगुल बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को फूंका था, जिन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट मेजर हडसन पर आक्रमण कर उनकी हत्या कर दी थी।
3. बैरकपुर छावनी में हुई इस घटना के तुरंत बाद 10 मई 1857 को मेरठ छावनी के सैनिकों ने खुला विद्रोह कर दिया और ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती देते हुए दिल्ली की ओर कूच कर गए।
4. मंगल पांडे द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध उठाए गए इस कदम के परिणामस्वरूप उन्हें गिरफ्तार कर 8 अप्रैल 1857 को बैरकपुर में फाँसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप, प्रकृति और इसके विभिन्न पक्षों के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों के प्रसिद्ध कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — डॉ. आर.सी. मजूमदार
2. "यह सुनियोजित तरीके से लड़ा गया भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था।" — विनायक दामोदर सावरकर
3. "यह केवल एक सिपाही विद्रोह था, जिसका राष्ट्रवाद से कोई लेना-देना नहीं था।" — सर जॉन सीले
4. "यह राष्ट्रीय विद्रोह था, न कि मात्र एक सिपाही विद्रोह।" — बेंजामिन डिजरायली
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिन्होंने अफीम व्यापारी डॉ. लायेल की हत्या कर दी थी, जिसके परिणामस्वरूप विलियम टेलर के आदेश पर पीर अली समेत कई विद्रोहियों को सरेआम फाँसी पर लटका दिया गया था।
2. दानापुर छावनी (पटना के निकट) में 25 जुलाई 1857 को 7वीं, 8वीं और 40वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सैनिकों ने खुला विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा (शाहाबाद) पहुँच गए, जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह से मिलकर नेतृत्व संभालने का आग्रह किया।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा में विद्रोह की शुरुआत करने में स्थानीय सिपाहियों के साथ-साथ कमिश्नर विलियम टेलर की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध जनता में सुलग रहे आक्रोश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जहाँ सारण (छपरा) में मोहम्मद हुसैन खान और मुजफ्फरपुर में भूमिहार जमींदारों ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला था।
4. बाबू वीर कुंवर सिंह के छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध लंबे समय तक गुरिल्ला युद्ध जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों से ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी, जिन्हें अंत में गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया गया जहाँ 1860 में उनकी मृत्यु हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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