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History of India
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) के भारत में रणनीतिक विस्तार और राजनीतिक प्रभुत्व की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा वर्ष 1690 में जारी फरमान के पश्चात ब्रिटिश कंपनी ने बंगाल के सूबेदार से बातचीत कर 'सुतानाती', 'गोविंदपुर' और 'कालीकाता' नामक तीन गाँवों की जमींदारी प्राप्त की, जो आगे चलकर आधुनिक कलकत्ता (कोलकाता) शहर के रूप में विकसित हुए और यहीं फोर्ट विलियम की स्थापना की गई।
  2. 2. ब्रिटिश कंपनी को संपूर्ण भारत में चुंगी-मुक्त व्यापार (Duty-free trade) करने का ऐतिहासिक अधिकार वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फारुकसियर द्वारा जारी एक शाही फरमान के माध्यम से प्राप्त हुआ था, जिसे समकालीन ब्रिटिश इतिहासकारों द्वारा कंपनी का 'मैग्नाकार्टा' कहा गया था।
  3. 3. कर्नाटक युद्धों (1746–1763) के दौरान फ्रांसीसी गवर्नर जोसेフ फ्रांसिस डुप्ले (Joseph François Dupleix) ने भारतीय राजाओं के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और यूरोपीय प्रशिक्षित सेना किराए पर देने की जो कूटनीतिक शुरुआत की थी, उसका ब्रिटिश कंपनी ने भी अनुकरण कर अपनी स्थिति सुदृढ़ की।
  4. 4. बक्सर के युद्ध (1764) के उपरांत मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय द्वारा बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी अधिकार अंग्रेजों को सौंपे जाने से पूर्व ही ब्रिटिश कंपनी ने बंगाल के नवाब मीर जाफर के साथ व्यक्तिगत व्यापारिक एकाधिकार और करों से मुक्ति हेतु संधियाँ कर ली थीं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दी के दौरान भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के आगमन और विशेष रूप से ब्रिटिश सत्ता की स्थापना से जुड़ी राजनीतिक, आर्थिक तथा कूटनीतिक घटनाएँ भारतीय इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण हैं। मुगल दरबार से प्राप्त फरमानों, कर्नाटक युद्धों की राजनीति और बक्सर के युद्ध के बाद प्राप्त दीवानी अधिकारों ने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को सुदृढ़ किया। इस विषय के विस्तृत ऐतिहासिक घटनाक्रम को समझने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions

→ वर्ष 1857 के विद्रोह के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों द्वारा दिए गए निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सर जॉन सीले के अनुसार, 1857 का विद्रोह “पूर्णतः देशभक्ति रहित और स्वार्थी सिपाही विद्रोह था, जिसमें न तो स्थानीय नेतृत्व था और न ही कोई लोकप्रिय समर्थन।” 2. बेंजामिन डिजरायली ने ब्रिटिश संसद में यह तर्क दिया था कि 1857 का विद्रोह मात्र एक सैनिक विद्रोह नहीं था, बल्कि यह एक राष्ट्रीय विद्रोह था जो विदेशी शासन के विरुद्ध जन असंतोष का परिणाम था। 3. टी.आर. होम्स के अनुसार, यह विद्रोह “सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष था”, जिसमें ब्रिटिश साम्राज्यवादी व्यवस्था ने भारतीय रूढ़िवादिता और अराजकता पर विजय प्राप्त की थी। 4. वी.डी. सावरकर ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस - 1857' में इसे सुनियोजित और सुनियंत्रित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के रूप में चित्रित किया था, जबकि डॉ. एस.एन. सेन ने अपनी आधिकारिक पुस्तक 'इलेटी फिफ्टी सेवन' में इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मानने से पूरी तरह इनकार करते हुए इसे 'धर्म का युद्ध' कहा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस महान विद्रोह के पास कोई सर्वसम्मत केंद्रीय संगठन, आधुनिक सैन्य तकनीक और एक साझा राजनीतिक दृष्टिकोण का अभाव था, जिसके कारण विद्रोही टुकड़ियाँ अखिल भारतीय स्तर पर एक सुनियोजित रणनीति के तहत अंग्रेजों के विरुद्ध समन्वित आक्रमण करने में असफल रहीं। 2. देश के अधिकांश बड़े और प्रभावशाली भारतीय शासकों (जैसे हैदराबाद के निजाम, ग्वालियर के सिंधिया, भोपाल की बेगम, नेपाल के जंगबहादुर और इंदौर के होलकर) ने विद्रोही ताकतों का समर्थन करने के बजाय अंग्रेजों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सैन्य और कूटनीतिक सहायता प्रदान की। 3. शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और आधुनिक पश्चिमी शिक्षा प्राप्त बुद्धिजीवियों ने 1857 के विद्रोह का खुलकर समर्थन किया क्योंकि वे ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण से त्रस्त थे और देश को तुरंत आधुनिक लोकतांत्रिक गणराज्य बनाना चाहते थे। 4. मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय को औपचारिक रूप से विद्रोह का सर्वोच्च प्रतीक और नेता घोषित तो किया गया था, किंतु उनके पास न तो वास्तविक सैन्य अधिकार थे और न ही उम्र तथा अनुभव के अनुकूल सशक्त निर्णय लेने की क्षमता, जो विद्रोही सैनिकों में अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्थान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में षोडश महाजनपदों की सूची मिलती है, जिसमें वज्जी और मल्ल ऐसे महाजनपद थे जहाँ राजतंत्रात्मक शासन प्रणाली के स्थान पर 'गणसंघ' या कुलीनतंत्रात्मक व्यवस्था विद्यमान थी। 2. मगध के प्रारंभिक उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका थी; इसकी पहली राजधानी 'राजगृह' (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी एक प्राकृतिक रूप से सुरक्षित दुर्दैवी नगरी थी, और बाद में रणनीतिक दृष्टि से सामरिक महत्व के कारण पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया गया जो गंगा, सोन और गंडक नदियों के संगम पर स्थित थी। 3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों और विजय की नीति (जैसे अंग राज्य को जीतना) से मगध की स्थिति को सुदृढ़ किया, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु (कुणिक) ने अपने शासनकाल में लिच्छवियों के संघ को पराजित करने के लिए वर्षारकार नामक मंत्री की कूटनीतिक सहायता ली थी। 4. मगध के साम्राज्यवादी विस्तार के क्रम में शिशुनाग वंश के शासक शिशुनाग ने अवंती महाजनपद को जीतकर मगध साम्राज्य में मिला लिया था, जिससे उत्तर भारत में मगध का वर्चस्व पूरी तरह स्थापित हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मौर्य साम्राज्य के प्रशासन, अर्थव्यवस्था और अशोक के अभिलेखों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य केंद्रीय प्रशासन में कर संग्रह और राजस्व का मुख्य अधिकारी 'समाहर्त्ता' कहलाता था, जबकि राजकीय कोषागार और भंडारगृह का संरक्षक 'संनिधातृ' होता था। 2. अशोक के रुम्मिदेई (लुम्बिनी) स्तंभ लेख से यह स्पष्ट ज्ञात होता है कि मौर्य प्रशासन के दौरान लुम्बिनी में भू-राजस्व (भाग) की दर को सामान्य 1/6 भाग से घटाकर 1/8 भाग कर दिया गया था और धार्मिक कर (बलि) को पूरी तरह माफ कर दिया गया था। 3. मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था में दीवानी न्यायालयों को 'धर्मस्थीय' कहा जाता था जिनका प्रमुख कार्य सामाजिक कानूनों और अनुबंधों के विवादों को सुलझाना था, जबकि फौजदारी न्यायालयों को 'कंटकशोधन' कहा जाता था। 4. जूनागढ़ (गिरनार) अभिलेख से यह प्रमाणित होता है कि चंद्रगुप्त मौर्य के प्रांतीय राज्यपाल पुष्यगुप्त वैश्य द्वारा सुदर्शन झील का निर्माण करवाया गया था, जिसका जीर्णोद्धार बाद में शक क्षत्रप रुद्रदामन प्रथम के शासनकाल में भी करवाया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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