सृजनात्मकता (Creativity) मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
विस्तृत व्याख्या एवं समाधान
सही उत्तर: विकल्प C (अपसारी चिंतन - Divergent Thinking)
1. प्रस्तावना: सृजनात्मकता (Creativity) और चिंतन का मनोवैज्ञानिक आधार
शैक्षणिक मनोविज्ञान और बाल विकास में सृजनात्मकता (Creativity) से तात्पर्य व्यक्ति की उस अनूठी मानसिक योग्यता से है, जिसके माध्यम से वह किसी नवीन (Novel), मौलिक (Original), उपयोगी और समाजोपयोगी विचार, तकनीक अथवा उत्पाद का सृजन करता है। अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) तथा ई. पॉल टॉरेंस (E. Paul Torrance) के अनुसंधानों ने यह सिद्ध किया कि सृजनात्मकता का सीधा और घनिष्ठ संबंध 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) से होता है। अपसारी चिंतन को सामान्य भाषा में 'लीक से हटकर सोचना' (Out of the Box Thinking) कहा जाता है, जहाँ व्यक्ति किसी एक समस्या के कई अप्रत्याशित, बहु-आयामी और स्वतंत्र समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता रखता है।
2. गिलफोर्ड के अनुसार अपसारी चिंतन के चार मूलभूत तत्व
गिलफोर्ड ने 1956 में बुद्धि की संरचना (SI Model) के अंतर्गत सृजनात्मक अपसारी चिंतन के चार मुख्य घटकों का प्रतिपादन किया:
- प्रवाह / धाराप्रवाहिता (Fluency): किसी समस्या या विषय पर कम समय में अधिक से अधिक नए विचारों और समाधानों को उत्पन्न करने की गति।
- लचीलापन / विविधता (Flexibility): किसी रूढ़िवादी लीक पर चलने के बजाय अलग-अलग दिशाओं, श्रेणियों और दृष्टिकोणों से सोचने की क्षमता (जैसे- किसी वस्तु के विभिन्न और अपरंपरागत उपयोग सोचना)।
- मौलिकता (Originality): ऐसे विचार प्रस्तुत करना जो पूरी तरह अनूठे, दुर्लभ और दूसरों से भिन्न हों। यह सृजनात्मकता का सबसे प्रमुख लक्षण है।
- विस्तारण (Elaboration): किसी प्रारंभिक विचार को विस्तार देना, उसमें सूक्ष्म विवरण जोड़ना और उसे परिष्कृत व व्यावहारिक बनाना।
3. तुलनात्मक विश्लेषण: अपसारी चिंतन बनाम अभिसारी चिंतन
| तुलना का मानक | अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) | अभिसारी चिंतन (Convergent Thinking) |
|---|---|---|
| चिंतन की दिशा | एक बिंदु से कई विभिन्न दिशाओं में फैलना (Multidirectional)। | चारों दिशाओं से एक ही सही बिंदु पर केंद्रित होना (Focused/Linear)। |
| संबंध का क्षेत्र | सृजनात्मकता (Creativity) और नवाचार से संबंधित। | पारंपरिक बुद्धि (IQ) और रटंत ज्ञान से संबंधित। |
| प्रश्नों का स्वरूप | मुक्त-अंत वाले प्रश्न (Open-ended questions)। | बंद-अंत वाले वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Closed-ended questions)। |
| समाधानों की प्रकृति | अनेक संभावित, नवीन और कल्पनाशील उत्तर। | केवल एक मानक, पूर्व-निर्धारित और सही उत्तर। |
4. अन्य विकल्पों का तार्किक खंडन
- विकल्प A (अभिसारी चिंतन - Convergent Thinking): यह चिंतन किसी समस्या के लिए केवल एक सही और मानक उत्तर खोजने पर केंद्रित होता है। यह बुद्धि लब्धि (IQ) से जुड़ा है, सृजनात्मकता से नहीं।
- विकल्प B (अनुकरण - Imitation): अनुकरण का अर्थ दूसरों की नकल करना (Copying) है, जबकि सृजनात्मकता का आधार ही मौलिकता और गैर-नकल होता है।
- विकल्प D (अवधान - Attention): अवधान किसी उद्दीपक पर चेतना को केंद्रित करने की सामान्य मानसिक प्रक्रिया है; यह सृजनात्मकता का मुख्य निर्धारक कारक नहीं है।
5. समावेशी कक्षा में सृजनात्मकता के विकास हेतु शिक्षण रणनीतियाँ
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और CTET पाठ्यक्रम के अनुसार, शिक्षक को कक्षा में विद्यार्थियों की सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए निम्नलिखित विधियों का प्रयोग करना चाहिए:
- विचार-मंथन (Brainstorming Sessions): छात्रों को बिना किसी पूर्व-निर्णय या आलोचना के भय के अपने विचार व्यक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता देना।
- मुक्त-अंत वाले प्रश्न पूछना: ऐसे प्रश्न पूछना जिनका केवल एक उत्तर न हो (जैसे—"यदि पृथ्वी पर पानी समाप्त हो जाए तो क्या होगा?")।
- जिज्ञासा और जोखिम उठाने का समर्थन: विद्यार्थियों को गलतियों से डरे बिना नए प्रयोग करने के अवसर प्रदान करना।