History of India
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस तथा इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गिरफ्तार कर लिया गया था, तब भूमिगत प्रतिरोध (Underground Resistance) का नेतृत्व करने वाले प्रमुख समाजवादी नेताओं में अरुणा आसफ अली, अच्युत पटवर्धन, राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण शामिल थे, जिन्होंने 'कांग्रेस रेडियो' का संचालन भी किया था।
- 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1941 में जर्मनी से बर्लिन रेडियो के माध्यम से भारत की जनता को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था और उनके संघर्षों का उल्लेख किया था।
- 3. सिंगापुर में कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के पुनर्गठन के उपरांत सुभाष चंद्र बोस ने जुलाई 1943 में सिंगापुर में इसकी कमान संभाली और यहीं उन्होंने 'दिल्ली चलो' तथा 'जय हिंद' का नारा दिया था।
- 4. आजाद हिंद सरकार (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में की गई थी, जिसे जापान समेत नौ धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) द्वारा मान्यता प्रदान की गई थी, और इस सरकार का अपना बैंक, मुद्रा और गुप्तचर संगठन भी था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब ब्रिटिश सरकार ने 'ऑपरेशन जीरो आवर' के तहत सभी प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, तब युवा समाजवादियों (जैसे अरुणा आसफ अली, राममनोहर लोहिया, उषा मेहता आदि) ने भूमिगत रहकर आंदोलन को दिशा दी और गुप्त कांग्रेस रेडियो चलाया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 6 जुलाई 1941 (या तदनुरूप अवधि में) बर्लिन रेडियो से गांधीजी को 'राष्ट्रपिता' संबोधित किया था। जुलाई 1943 में सिंगापुर पहुँचकर उन्होंने रास बिहारी बोस से INA की बागडोर संभाली और 21 अक्टूबर 1943 को 'आर्ज़ी हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद' की स्थापना की, जिसे जापान, जर्मनी आदि राष्ट्रों ने मान्यता दी थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में 5 जून 1857 को नाना साहब ने विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए ब्रिटिश रेजिडेंट सर ह्यू व्हीलर को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया, जिसके उपरांत 'सतीचौरा घाट' की घटना घटी।
2. नाना साहब के मुख्य सलाहकार और रणनीतिकार अजीमुल्ला खां थे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक समर्थन जुटाने के लिए ब्रिटेन की यात्रा की थी और बाद में विद्रोह के दौरान विद्रोही सेना का तोपखाना संभाला था।
3. कानपुर की पराजय के बाद नाना साहब ने नेपाल की तराई की ओर प्रस्थान किया, जहाँ उनके अंतिम दिनों का इतिहास अस्पष्ट है, जबकि उनके वफादार कमांडर तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर रुख किया और सिंधिया की सेना को अपने पक्ष में कर लिया।
4. तात्या टोपे को अंततः ब्रिटिश जनरल कॉलिन कैंपबेल द्वारा सीधे युद्ध के मैदान में पराजित कर फाँसी दी गई थी, क्योंकि नेपाल की सीमा पर अंग्रेजों द्वारा उनके खिलाफ एक विशेष सैन्य अभियान चलाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन किए गए क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. जॉन निकलसन — दिल्ली
2. कॉलिन कैंपबेल — कानपुर और लखनऊ
3. ह्यूरोज — झांसी और ग्वालियर
4. जेम्स आउट्राम — बनारस और इलाहाबाद
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में नाना साहब ने 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का शंखनाद किया, जिसमें उनके मुख्य सलाहकार और रणनीतिकार के रूप में अजीमुल्ला खां ने प्रमुख भूमिका निभाई।
2. नाना साहब के सैन्य कमांडर तात्या टोपे ने कानपुर की पराजय के बाद ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और वहाँ सिंधिया की सेना को अपनी ओर मिलाकर ग्वालियर पर अधिकार कर लिया, किंतु अंततः ब्रिटिश जनरल कर्नल नील के विश्वासघात के कारण उन्हें गिरफ्तार कर फाँसी दे दी गई।
3. कानपुर में ब्रिटिश रेजिडेंट सर ह्यू व्हीलर को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया गया था, जिसके उपरांत 'सतीचौरा घाट' की घटना घटी, और इस क्षेत्र में विद्रोह का पूर्ण दमन करने का मुख्य श्रेय ब्रिटिश कमांडर सर कॉलिन कैंपबेल और जनरल हैवलॉक को जाता है।
4. नाना साहब ने अंग्रेजों से पराजित होने के बाद नेपाल की तराई की ओर प्रस्थान किया, जहाँ उनके बाद के जीवन और उनकी मृत्यु का वास्तविक ऐतिहासिक विवरण आज भी पूरी तरह अस्पष्ट है, जबकि तात्या टोपे को उनके एक जमींदार मित्र मानसिंह के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा पकड़ा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के प्रसार, उनके दार्शनिक सिद्धांतों और प्रमुख संतों के योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, जिन्होंने जातिगत भेदभाव और रूढ़ियों का कड़ा विरोध करते हुए तमिल भाषा में अपने भक्तिगीतों (जैसे 'नालयिरा दिव्य प्रबंधम') के माध्यम से लोकप्रिय प्रचार किया।
2. सूफी सिलसिले के 'चिश्ती' संप्रदाय की भारत में स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा अजमेर में की गई थी, और इस सिलसिले के संतों ने संगीत (समां) और स्थानीय भाषा को ईश्वर प्राप्ति का माध्यम माना तथा राजकीय संरक्षण को अनिवार्य मानकर सुल्तानों के दरबार से निकटता बनाए रखी।
3. उत्तर भारत में रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि तुलसीदास ने 'रामचरितमानस' की रचना की, जो पूरी तरह से अद्वैतवादी दर्शन पर आधारित थी और जिसमें निर्गुण ईश्वर के निराकार रूप को ही एकमात्र परम सत्य के रूप में स्थापित किया गया था।
4. महाराष्ट्र में वारकरी संप्रदाय के प्रसिद्ध संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानेश्वरी के रचयिता) और संत तुकाराम ने पंढरपुर के विट्ठल (विठोबा) की उपासना पर बल दिया तथा समाज के उपेक्षित वर्गों के लिए भक्ति के द्वार खोलते हुए आध्यात्मिक समता का संदेश दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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