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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कानपुर में नाना साहब ने 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का शंखनाद किया, जिसमें उनके मुख्य सलाहकार और रणनीतिकार के रूप में अजीमुल्ला खां ने प्रमुख भूमिका निभाई।
  2. 2. नाना साहब के सैन्य कमांडर तात्या टोपे ने कानपुर की पराजय के बाद ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और वहाँ सिंधिया की सेना को अपनी ओर मिलाकर ग्वालियर पर अधिकार कर लिया, किंतु अंततः ब्रिटिश जनरल कर्नल नील के विश्वासघात के कारण उन्हें गिरफ्तार कर फाँसी दे दी गई।
  3. 3. कानपुर में ब्रिटिश रेजिडेंट सर ह्यू व्हीलर को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया गया था, जिसके उपरांत 'सतीचौरा घाट' की घटना घटी, और इस क्षेत्र में विद्रोह का पूर्ण दमन करने का मुख्य श्रेय ब्रिटिश कमांडर सर कॉलिन कैंपबेल और जनरल हैवलॉक को जाता है।
  4. 4. नाना साहब ने अंग्रेजों से पराजित होने के बाद नेपाल की तराई की ओर प्रस्थान किया, जहाँ उनके बाद के जीवन और उनकी मृत्यु का वास्तविक ऐतिहासिक विवरण आज भी पूरी तरह अस्पष्ट है, जबकि तात्या टोपे को उनके एक जमींदार मित्र मानसिंह के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा पकड़ा गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने विद्रोह का नेतृत्व किया और अजीमुल्ला खां उनके मुख्य राजनीतिक सलाहकार तथा कूटनीतिक दूत थे। तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में अद्भुत सैन्य कौशल का परिचय दिया था; किंतु तात्या टोपे को फाँसी ब्रिटिश जनरल कर्नल नील ने नहीं बल्कि तात्या टोपे को शिवपुरी (मध्य प्रदेश) में उनके मित्र मानसिंह के विश्वासघात के बाद अंग्रेजों द्वारा 18 अप्रैल 1859 को सरेआम फाँसी दी गई थी, जबकि कर्नल नील ने इलाहाबाद और बनारस में क्रूरतापूर्ण दमन किया था। कानपुर में सतीचौरा घाट की घटना के बाद ब्रिटिश सेनाओं (जनरल हैवलॉक और कॉलिन कैंपबेल) ने कानपुर पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया। इस ऐतिहासिक घटना के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस तथा इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गिरफ्तार कर लिया गया था, तब भूमिगत प्रतिरोध (Underground Resistance) का नेतृत्व करने वाले प्रमुख समाजवादी नेताओं में अरुणा आसफ अली, अच्युत पटवर्धन, राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण शामिल थे, जिन्होंने 'कांग्रेस रेडियो' का संचालन भी किया था। 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1941 में जर्मनी से बर्लिन रेडियो के माध्यम से भारत की जनता को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था और उनके संघर्षों का उल्लेख किया था। 3. सिंगापुर में कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के पुनर्गठन के उपरांत सुभाष चंद्र बोस ने जुलाई 1943 में सिंगापुर में इसकी कमान संभाली और यहीं उन्होंने 'दिल्ली चलो' तथा 'जय हिंद' का नारा दिया था। 4. आजाद हिंद सरकार (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में की गई थी, जिसे जापान समेत नौ धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) द्वारा मान्यता प्रदान की गई थी, और इस सरकार का अपना बैंक, मुद्रा और गुप्तचर संगठन भी था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) के भारत में रणनीतिक विस्तार, कारखाना स्थापना तथा पुर्तगाली-डच ताकतों के साथ उनके संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश कंपनी द्वारा भारत के पश्चिमी तट पर स्थापित किया जाने वाला पहला स्थायी कारखाना सूरत (1612) था, जिसे थॉमस बेस्ट द्वारा जहांगीर के शाही फरमान प्राप्त करने के उपरांत स्थापित किया गया था, जबकि पूर्वी तट पर पहला कारखाना मसूलीपट्टनम में 1611 में स्थापित किया गया था। 2. बॉम्बे (मुंबई) द्वीप ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को पुर्तगालियों से सीधे युद्ध में पराजित करने के उपरांत वर्ष 1661 में प्राप्त हुआ था, जिसे बाद में ब्रिटिश सम्राट चार्ल्स द्वितीय ने कंपनी को मात्र दस पाउंड वार्षिक किराए पर सौंप दिया था। 3. फ्रांसीसी गवर्नर जोसेफ फ्रांसिस डुप्ले द्वारा भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करने की नीति से बहुत पूर्व, ब्रिटिश कंपनी के अधिकारी सर जॉन चाइल्ड ने औरंगजेब के साम्राज्य के विरुद्ध बॉम्बे और पश्चिमी तट पर नौसैनिक युद्ध (चाइल्ड का युद्ध) की शुरुआत की थी, जिसके कारण अंग्रेजों को मुगल सम्राट से क्षमा मांगने के लिए विवश होना पड़ा था। 4. बंगाल में ब्रिटिश व्यापारिक प्रभुत्व की वास्तविक नींव वर्ष 1651 में शाहशुजा द्वारा जारी 'निशान' (राजकीय आज्ञापत्र) के माध्यम से पड़ी, जिसके तहत अंग्रेजों को बंगाल में मात्र 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले चुंगी-मुक्त व्यापार करने का अधिकार प्राप्त हुआ था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके तुरंत पश्चात प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के वैचारिक एवं रणनीतिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के ऐतिहासिक टाउन हॉल में एक विशाल बैठक आयोजित कर 'बहिष्कार प्रस्ताव' औपचारिक रूप से पारित किया गया था। 2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक और राजनीतिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों पर विशेष बल दिया गया, जिसके तहत बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना की गई और इसके प्रथम प्राचार्य के रूप में अरबिन्द घोष (अरबिंदो घोष) ने कार्यभार संभाला था। 3. कांग्रेस के वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, नरमपंथियों और गरमपंथियों के तीव्र मतभेदों के बावजूद स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के प्रस्ताव को बंगाल से बाहर पूरे देश में फैलाने का समर्थन किया गया था। 4. कलकत्ता से बाहर स्वदेशी आंदोलन का प्रसार करते हुए सैयद حیدر رضا (हैदर रज़ा) ने दिल्ली में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में, और चिदंबरम पिल्लई ने मद्रास प्रेसीडेंसी के तूतीकोरिन क्षेत्र में इस आंदोलन का कुशल नेतृत्व किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति, उसके स्वरूप और विभिन्न इतिहासकारों के ऐतिहासिक विश्लेषण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. एस.एन. सेन ने अपनी अधिकृत पुस्तक 'इलेटी फिफ्टी सेवन' (Eighteen Fifty-Seven) में यह निष्कर्ष निकाला कि “जो विद्रोह 1857 के महान संघर्ष के रूप में शुरू हुआ, वह अंततः एक राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में परिवर्तित हो गया।” 2. बेंजामिन डिजरायली ने ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में बहस के दौरान यह तर्क दिया था कि 1857 का विद्रोह मात्र एक सैनिक विद्रोह नहीं था, बल्कि यह विदेशी शासन के विरुद्ध उभरा एक व्यापक राष्ट्रीय विद्रोह था। 3. लॉरेंस और सीले जैसे ब्रिटिश इतिहासकारों ने इस घटना को पूरी तरह से अनुशासनहीन और स्वार्थी 'सिपाही विद्रोह' के रूप में चित्रित किया, जिसमें न तो कोई लोकप्रिय जन-समर्थन था और न ही कोई सुसंगत राष्ट्रीय उद्देश्य। 4. टी.आर. होम्स के अनुसार, 1857 का विद्रोह “सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष था”, जिसमें ब्रिटिश साम्राज्यवादी व्यवस्था ने भारतीय रूढ़िवादिता और अराजकता पर विजय प्राप्त की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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