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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन किए गए क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जॉन निकलसन — दिल्ली
  2. 2. कॉलिन कैंपबेल — कानपुर और लखनऊ
  3. 3. हेनरी लॉरेंस — अवध (लखनऊ)
  4. 4.

ह्यूरोज — झांसी और ग्वालियर उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के महान विद्रोह को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने अपने अनुभवी और कुशल सैन्य अधिकारियों को विभिन्न महत्वपूर्ण केंद्रों पर भेजा था। जॉन निकलसन ने दिल्ली में विद्रोह को दबाने में मुख्य भूमिका निभाई थी (जहाँ वे लड़ते हुए मारे गए)। सर कॉलिन कैंपबेल ने कानपुर और लखनऊ में विद्रोही ताकतों का दमन किया था। हेनरी लॉरेंस लखनऊ में ब्रिटिश रेजिडेंसी की रक्षा करते हुए मारे गए थे, जबकि उनके पश्चात आउट्राम और कैंपबेल ने अवध को पुनः अपने नियंत्रण में लिया। इसके अतिरिक्त, जनरल ह्यूरोज ने झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे की सेनाओं के विरुद्ध सैन्य अभियान का नेतृत्व किया था। भारतीय स्वतंत्रता के इस महासंग्राम के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions

→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा उनके रणनीतिक संघर्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने झाँसी के किले को घेर लिया, जिसके उपरांत रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से अत्यंत वीरतापूर्वक मुकाबला किया और तात्या टोपे की सहायता से कालपी की ओर प्रस्थान किया, जहाँ दोनों की संयुक्त सेना को ब्रिटिश सेना के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा। 2. कालपी में पराजित होने के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने चतुर कूटनीति का परिचय देते हुए ग्वालियर की ओर रुख किया और वहाँ के सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया को पराजित कर ग्वालियर के रणनीतिक किले पर अधिकार कर लिया, जिसे उन्होंने उत्तर भारत में विद्रोही गतिविधियों का नया केंद्र बनाया। 3. ग्वालियर के पतन के उपरांत ब्रिटिश सेना द्वारा तीव्र जवाबी हमला किए जाने पर रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के विरुद्ध ग्वालियर के रणक्षेत्र में लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे ने ग्वालियर से निकलकर मध्य भारत और राजस्थान के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार (गुरिल्ला) युद्ध का सफल नेतृत्व लगभग एक वर्ष तक जारी रखा। 4. तात्या टोपे को सीधे युद्ध के मैदान में कभी बंदी नहीं बनाया जाया सका था, बल्कि उनके ही एक विश्वासघाती जमींदार मित्र मानसिंह की मुखबिरी और धोखाधड़ी के कारण उन्हें सोते समय अंग्रेजों द्वारा पकड़ा गया था और नरवर के जंगलों में संक्षिप्त सैन्य प्रक्रिया के बाद फाँसी दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, केंद्रीय तंत्र तथा अशोक के धम्म और शिलालेखों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार मौर्य केंद्रीय प्रशासन में अट्ठारह प्रमुख तीर्थ (विभागाध्यक्ष) होते थे, जिनमें सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी 'समाहर्ता' (राजस्व संग्रह और आय-व्यय का निरीक्षण करने वाला) और 'सन्निधातृ' (राजकीय कोलागार और कोषाध्यक्ष) थे। 2. अशोक के लघु शिलालेख संख्या 1 (रूपनाथ, बद्ध्राम, मास्की आदि) में उसकी धम्म नीति का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जहाँ वह अपने आप को 'बुद्धशाक्य' कहता है और बौद्ध संघ के प्रति अपनी अटूट निष्ठा प्रकट करता है। 3. मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था में दीवानी न्यायालयों को 'धर्मस्थीय' और फौजदारी न्यायालयों को 'कंटकशोधन' कहा जाता था, तथा कौटिल्य ने समाज में व्याप्त अपराधों के दमन के लिए कठोर दंड विधान की वकालत की है। 4. अशोक के शासनकाल में आयोजित 'तृतीय बौद्ध संगीति' का मुख्य उद्देश्य बौद्ध संघ में उत्पन्न आंतरिक मतभेदों और फूट (संघभेद) को रोकना था, जिसकी अध्यक्षता मोग्गालिपुत्त तिस्सो द्वारा पाटलिपुत्र में की गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34) और उसके अंतर्गत आयोजित गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रथम गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार कांग्रेस द्वारा किया गया था, किंतु इसमें मुस्लिम लीग, हिंदू महासभा और दलित वर्ग के प्रतिनिधियों (जैसे डॉ. बी.आर. अंबेडकर) ने भाग लिया था। 2. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार द्वारा सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसा के आरोपितों को छोड़कर) को रिहा करने और सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करने पर सहमति बनी, तथा कांग्रेस ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया। 3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया, किंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और राज्य के स्वरूप के मुद्दों पर तीव्र मतभेदों के कारण यह सम्मेलन असफल घोषित कर दिया गया। 4. वर्ष 1932 में लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग लिया था, और इसी सम्मेलन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा 'कम्युनल अवार्ड' की घोषणा की गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34) के विभिन्न चरणों, गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गांधी-इरविन समझौते (5 मार्च 1931) के तहत सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने और समुद्र तट के समीप के निवासियों को बिना कर के नमक बनाने का अधिकार देने पर सहमति व्यक्त की थी। 2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से महात्मा गांधी ने केवल 'द्वितीय गोलमेज सम्मेलन' (1931) में भाग लिया था, और इस सम्मेलन में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर गतिरोध उत्पन्न होने के कारण कांग्रेस ने इसे विफल घोषित कर दिया था। 3. वर्ष 1932 में जब गांधीजी ने यरवदा जेल से पुनः सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया, तो ब्रिटिश सरकार ने तुरंत अध्यादेश जारी कर कांग्रेस को अवैध घोषित कर दिया और दमनकारी नीतियों के तहत आंदोलन को कुचल दिया। 4. डॉ. भीमराव अंबेडकर ने तीनों (प्रथम, द्वितीय और तृतीय) गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया था, जबकि कांग्रेस ने केवल प्रथम और तृतीय गोलमेज सम्मेलनों का बहिष्कार किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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