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History of India
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, केंद्रीय तंत्र तथा अशोक के धम्म और शिलालेखों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार मौर्य केंद्रीय प्रशासन में अट्ठारह प्रमुख तीर्थ (विभागाध्यक्ष) होते थे, जिनमें सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी 'समाहर्ता' (राजस्व संग्रह और आय-व्यय का निरीक्षण करने वाला) और 'सन्निधातृ' (राजकीय कोलागार और कोषाध्यक्ष) थे।
  2. 2. अशोक के लघु शिलालेख संख्या 1 (रूपनाथ, बद्ध्राम, मास्की आदि) में उसकी धम्म नीति का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जहाँ वह अपने आप को 'बुद्धशाक्य' कहता है और बौद्ध संघ के प्रति अपनी अटूट निष्ठा प्रकट करता है।
  3. 3. मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था में दीवानी न्यायालयों को 'धर्मस्थीय' और फौजदारी न्यायालयों को 'कंटकशोधन' कहा जाता था, तथा कौटिल्य ने समाज में व्याप्त अपराधों के दमन के लिए कठोर दंड विधान की वकालत की है।
  4. 4. अशोक के शासनकाल में आयोजित 'तृतीय बौद्ध संगीति' का मुख्य उद्देश्य बौद्ध संघ में उत्पन्न आंतरिक मतभेदों और फूट (संघभेद) को रोकना था, जिसकी अध्यक्षता मोग्गालिपुत्त तिस्सो द्वारा पाटलिपुत्र में की गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार मौर्य प्रशासन में 18 तीर्थ (विभाग) थे, और समाहर्ता राजस्व संग्रह का जबकि सन्निधातृ कोषाध्यक्ष का प्रमुख था। कथन 2 गलत है क्योंकि 'बुद्धशाक्य' की उपाधि और बौद्ध संघ के प्रति निष्ठा अशोक के 'भाब्रू-बैराड़ लघु शिलालेख' (मास्की या रूपनाथ में नहीं) में मिलती है, जबकि लघु शिलालेख 1 में उसके व्यक्तिगत जीवन और उपासक बनने की क्रमिक यात्रा का विवरण है। कथन 3 सही है, मौर्य काल में दीवानी न्यायालय 'धर्मस्थीय' (व्यावहारिक कानून) और फौजदारी न्यायालय 'कंटकशोधन' (राज्य और समाज विरोधी तत्वों का दमन) कहलाते थे। कथन 4 सही है, पाटलिपुत्र में सम्राट अशोक के संरक्षण में आयोजित तृतीय बौद्ध संगीति की अध्यक्षता मोग्गालिपुत्त तिस्सो ने की थी। मौर्य साम्राज्य के प्रशासनिक और ऐतिहासिक स्वरूप के विषय में विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों और मगध साम्राज्य के प्रारंभिक उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और भगवती सूत्र के अतिरिक्त जैन ग्रंथ 'उत्तराध्ययन सूत्र' में भी सोलह महाजनपदों की स्पष्ट सूची मिलती है, जिसमें दक्षिण भारत में गोदावरी नदी घाटी में स्थित एकमात्र महाजनपद 'अश्मक' का उल्लेख है। 2. मगध साम्राज्य के प्रारंभिक उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक और सामरिक स्थिति की निर्णायक भूमिका थी; इसकी पहली राजधानी राजगीर (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी, जबकि बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से गंगा, सोन और गंडक नदियों के जलमार्ग पर कड़ा नियंत्रण स्थापित हो गया। 3. बिम्बिसार (श्रेणिक) ने हर्यक वंश की नींव रखते हुए वैवाहिक संबंधों की नीति (जैसे कौशला देवी और चेलना से विवाह) और अंग राज्य के विजय के माध्यम से मगध के साम्राज्य विस्तार की शुरुआत की, किंतु उसके पुत्र अजातशत्रु ने अपने पिता की हत्या कर सिंहासन प्राप्त करने के बावजूद अपने शासनकाल में कभी भी वैशाली के वज्जी संघ के विरुद्ध सैन्य बल का प्रयोग नहीं किया था। 4. महाजनपद काल की राजनीतिक प्रणालियों में दो प्रकार की शासन व्यवस्थाएँ प्रचलित थीं — राजतंत्र (Monarchy) और गणसंघ/संघीय प्रणाली (Republic/Oligarchy), जहाँ वज्जी और मल्ल जैसे प्रमुख गणसंघों में निर्णय सामूहिक सभाओं (संथार) द्वारा लिए जाते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → दिल्ली में 1857 के विद्रोह और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के विद्रोही सिपाहियों के दिल्ली पहुँचने पर सम्राट बहादुर शाह जफर ने स्वेच्छा से तुरंत विद्रोह का नेतृत्व स्वीकार कर लिया था, क्योंकि वे अंग्रेजों के विरुद्ध एक निर्णायक युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार थे। 2. यद्यपि बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित कर दिया गया था, किंतु उनके पास वास्तविक सैन्य कमान का अभाव था और मुख्य निर्णय 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) द्वारा लिए जाते थे। 3. दिल्ली में विद्रोह के वास्तविक सैन्य संचालन की जिम्मेदारी जनरल बख्त खान के कंधों पर थी, जो बरेली से आए विद्रोही सैनिकों का नेतृत्व कर रहे थे और जिन्हें जफर ने 'साहेब-ए-आलम बहादुर' की उपाधि से सम्मानित किया था। 4. सितंबर 1857 में ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार किए जाने के उपरांत जॉन निकलसन मारा गया, और बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर हुमायूं के मकबरे से रंगून निर्वासित कर दिया गया, जहाँ 1862 में उनकी मृत्यु हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वीं देशी पैदल सेना के विद्रोह करने के उपरांत आरा पहुँचने पर बाबू वीर कुंवर सिंह ने 25 जुलाई 1857 को स्वेच्छा से क्रांतिकारियों का नेतृत्व स्वीकार किया था। 2. ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अपने सैन्य अभियानों के क्रम में कुंवर सिंह ने न केवल आरा और आजमगढ़ में अंग्रेजों को पराजित किया, बल्कि गंगा नदी पार करते समय ब्रिटिश कैप्टन डगलस की सेना से लोहा लेते हुए अपने एक हाथ में गोली लगने पर उसे स्वयं तलवार से काटकर गंगा को समर्पित कर दिया था। 3. बाबू वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध कैमूर की पहाड़ियों से लंबे समय तक गुरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) जारी रखा और ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी। 4. अमर सिंह को गिरफ्तार करने के बाद अंग्रेजों द्वारा कलकत्ता में एक त्वरित सैन्य अदालत (Military Tribunal) चलाकर वर्ष 1858 में ही सरेआम फाँसी पर लटका दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन किए गए क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जॉन निकलसन — दिल्ली 2. कॉलिन कैंपबेल — कानपुर और लखनऊ 3. हेनरी लॉरेंस — अवध (लखनऊ) 4. ह्यूरोज — झांसी और ग्वालियर उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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