History of India
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क्रांतिकारी आंदोलन के प्रथम चरण से संबंधित संगठनों और उनके संस्थापकों/प्रमुख सदस्यों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. अनुशीलन समिति (ढाका) - पी. मित्रा और वरिंद्र कुमार घोष
- 2. अभिनव भारत सोसाइटी - विनायक दामोदर सावरकर (VD Savarkar) और गणेश सावरकर
- 3. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) - सचिंद्र नाथ সান্যাল, रामप्रसाद बिस्मिल और जोगेश चंद्र चटर्जी
- 4.
गदर पार्टी - सोहन सिंह भकना और लाला हरदयाल उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उपर्युक्त सभी युग्म सही सुमेलित हैं। 'अनुशीलन समिति' की स्थापना कलकत्ता और ढाका में क्रांतिकारियों द्वारा की गई थी जिसमें पी. मित्रा, सतीश चंद्र बसु और वरिंद्र कुमार घोष की प्रमुख भूमिका थी। वर्ष 1904 में विनायक दामोदर सावरकर ने अपने भाई गणेश सावरकर के साथ मिलकर 'मित्र मेला' को पुनर्गठित कर 'अभिनव भारत सोसाइटी' की स्थापना की थी। अक्टूबर 1924 में कानपुर में सचिंद्र नाथ सन्याल, रामप्रसाद बिस्मिल और जोगेश चंद्र चटर्जी द्वारा 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का गठन किया गया था, जिसे बाद में चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह ने 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) का नाम दिया। इसके अतिरिक्त, वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में सोहन सिंह भकना, लाला हरदयाल और बाबा हरनाम सिंह 'टुंडीलाल' के प्रयासों से विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'गदर पार्टी' की स्थापना की गई थी जो विदेशों से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनी।
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वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में…
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनैतिक संस्थानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी महाराज के केंद्रीय प्रशासन में अष्टप्रधान (Ashtapradhan) नामक मंत्रिपरिषद थी, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी होता था और इनमें से अधिकांश मंत्रियों (पंडितराव और न्यायधीश को छोड़कर) को समय-समय पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था।
2. शिवाजी ने अपने राज्य में भू-राजस्व प्रणाली को व्यवस्थित करने के लिए मलिक अंबर की राजस्व व्यवस्था के आधार पर पैमाइश (माप) पद्धति को अपनाया, जिसके तहत प्रारंभ में कुल उपज का 33 प्रतिशत भाग राज्य द्वारा कर के रूप में लिया जाता था जिसे बाद में बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया था।
3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के बाहर के क्षेत्रों से वसूले जाने वाले कर थे, जहाँ 'चौथ' पड़ोसी मुगल क्षेत्रों की कुल आय का 25 प्रतिशत होता था जो सुरक्षा की गारंटी के रूप में लिया जाता था, जबकि 'सरदेशमुखी' संपूर्ण आय का 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर था जिसे शिवाजी अपनी वंशागत 'सरदेशमुख' होने की दावेदारी के आधार पर वसूलते थे।
4. मराठा सेना में प्रारंभ से ही वंशानुगत और सामंती सरदारों (सिग्नेचर जागीरदारों) की प्रधानता थी, और शिवाजी ने अपनी सेना में किसी भी प्रकार की नगद वेतन प्रणाली या 'दाग' एवं 'हुलिया' जैसी अनुशासनात्मक प्रथाओं को कभी लागू नहीं किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी में हुई घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में दमदम छावनी में यह अफवाह फैली कि नए एनफील्ड राइफल में प्रयुक्त होने वाले कारतूसों के आवरण में गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है, जिसे लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों लेफ्टिनेंट बाग और सर्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया था।
3. मंगल पांडे को गिरफ्तार किए जाने के उपरांत ब्रिटिश सैन्य अदालत (कोर्ट मार्शल) द्वारा उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई, जिसके परिणामस्वरूप देश भर के सैनिकों में भारी आक्रोश फैल गया और विद्रोह की शुरुआत हुई।
4. बैरकपुर की घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को शांत करने के लिए तत्काल प्रभाव से एनफील्ड राइफल और उन कारतूसों का प्रयोग सेना में पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के विपरीत, महात्मा बुद्ध ने संसार की वास्तविक प्रकृति को समझाने के लिए 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (कारण-कार्य का सिद्धांत) का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार प्रत्येक घटना का कोई न कोई कारण अवश्य होता है।
2. प्रारंभिक बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों ने ही वेदों की सर्वोच्चता और प्रामाणिकता को स्पष्ट रूप से अस्वीकार किया था, किंतु दोनों ने ही वैदिक यज्ञों और पशुबलि की प्रथा का पुरजोर समर्थन किया था।
3. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीर को अत्यंत कष्ट देने (संलेखना या कायाक्लेश) पर विशेष बल दिया गया है, जबकि महात्मा बुद्ध ने कठोर तपस्या और विलासिता के बीच का मार्ग चुनते हुए 'मध्यम मार्ग' (मज्झिमा प्रतिपदा) का उपदेश दिया था।
4. जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अहिंसा के सिद्धांत को इतना कठोर बनाया कि कृषि कार्य को भी पाप माना गया, जबकि बुद्ध ने अपनी संघ व्यवस्था में कभी भी कृषि या व्यापार को वर्जित नहीं किया और भिक्षुओं को साधारण जीवन जीने की सलाह दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्थायी स्वामी मान लिया गया, किंतु राजस्व की मांग इतनी कठोर थी कि यदि निर्धारित सूर्यास्त तक भू-राजस्व जमा नहीं किया जाता था, तो जमींदारी का एक हिस्सा नीलाम कर दिया जाता था, जिसे 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) कहा जाता था।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी के कुछ हिस्सों में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था, जिसमें राजस्व निर्धारण भूमि की उर्वरता के आधार पर 20 से 30 वर्षों के लिए निश्चित किया जाता था, और सरकार को सीधे कर भुगतान करने के कारण किसान भूमि के वास्तविक स्वामी बन गए जिन्हें कभी बेदखल नहीं किया जा सकता था।
3. हॉल्ट मैकेंजी द्वारा प्रतिपादित और उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत तथा पंजाब में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम (महाल) या ग्राम समुदाय के साथ सामूहिक रूप से किया जाता था, और लगान अदायगी की सामूहिक जिम्मेदारी पूरे ग्राम समुदाय की होती थी।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों के लागू होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मुद्रा अर्थव्यवस्था (Monetization) का विस्तार हुआ, जिसके फलस्वरूप कृषि का बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण हुआ और किसानों को खाद्यान्न फसलों के स्थान पर कपास, नील और जूट जैसी नकदी फसलों के उत्पादन के लिए बाध्य होना पड़ा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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