History of India
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के विपरीत, महात्मा बुद्ध ने संसार की वास्तविक प्रकृति को समझाने के लिए 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (कारण-कार्य का सिद्धांत) का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार प्रत्येक घटना का कोई न कोई कारण अवश्य होता है।
- 2. प्रारंभिक बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों ने ही वेदों की सर्वोच्चता और प्रामाणिकता को स्पष्ट रूप से अस्वीकार किया था, किंतु दोनों ने ही वैदिक यज्ञों और पशुबलि की प्रथा का पुरजोर समर्थन किया था।
- 3. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीर को अत्यंत कष्ट देने (संलेखना या कायाक्लेश) पर विशेष बल दिया गया है, जबकि महात्मा बुद्ध ने कठोर तपस्या और विलासिता के बीच का मार्ग चुनते हुए 'मध्यम मार्ग' (मज्झिमा प्रतिपदा) का उपदेश दिया था।
- 4. जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अहिंसा के सिद्धांत को इतना कठोर बनाया कि कृषि कार्य को भी पाप माना गया, जबकि बुद्ध ने अपनी संघ व्यवस्था में कभी भी कृषि या व्यापार को वर्जित नहीं किया और भिक्षुओं को साधारण जीवन जीने की सलाह दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि बौद्ध दर्शन में 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (Dependent Origination) केंद्रीय सिद्धांत है जो कारण और कार्य के नियम पर आधारित है। जैन दर्शन का 'स्यादवाद' और 'अनेकांतवाद' दृष्टिकोण की सापेक्षता को समझाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि बौद्ध और जैन दोनों ही धर्मों ने वेदों के साथ-साथ वैदिक यज्ञों और पशुबलि का कड़ा विरोध किया था। कथन 3 सही है; जैन धर्म में कायाक्लेश और संलेखना (उपवास द्वारा प्राण त्याग) का विधान है, जबकि बुद्ध ने चरम तपस्या को त्यागकर 'मध्यम मार्ग' अपनाया था। कथन 4 सही है क्योंकि जैन धर्म में अहिंसा का पालन अति सूक्ष्म स्तर पर करने के कारण कृषि और युद्ध जैसे कार्यों का निषेध था। विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दिल्ली में विद्रोह के…
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Related Questions
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क्रांतिकारी आंदोलन के प्रथम चरण से संबंधित संगठनों और उनके संस्थापकों/प्रमुख सदस्यों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. अनुशीलन समिति (ढाका) - पी. मित्रा और वरिंद्र कुमार घोष
2. अभिनव भारत सोसाइटी - विनायक दामोदर सावरकर (VD Savarkar) और गणेश सावरकर
3. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) - सचिंद्र नाथ সান্যাল, रामप्रसाद बिस्मिल और जोगेश चंद्र चटर्जी
4. गदर पार्टी - सोहन सिंह भकना और लाला हरदयाल
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस महान विद्रोह के पास कोई सुनियोजित अखिल भारतीय केंद्रीय योजना, आधुनिक सैन्य तकनीक और एक स्पष्ट वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टिकोण का पूर्ण अभाव था।
2. अधिकांश भारतीय रियासतों और बड़े शासकों ने विद्रोही ताकतों का समर्थन करने के बजाय अंग्रेजों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सैन्य और कूटनीतिक सहायता प्रदान की।
3. आधुनिक पश्चिमी शिक्षा प्राप्त भारतीय मध्यम वर्ग, बुद्धिजीवियों और व्यापारियों ने 1857 के विद्रोह का सक्रिय रूप से नेतृत्व किया क्योंकि वे ब्रिटिश राज के पूर्ण उन्मूलन के पक्षधर थे।
4. मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय को विद्रोह का प्रतीकात्मक नेता घोषित तो किया गया था, किंतु उनके पास न तो वास्तविक सैन्य अधिकार थे और न ही उम्र व अनुभव के अनुकूल दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारत में यूरोपीय कंपनियों के व्यापारिक विस्तार और पुर्तगाली-ब्रिटिश संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1661 में पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रैगांज़ा का विवाह ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय के साथ होने पर, पुर्तगालियों ने बॉम्बे (मुंबई) द्वीप को दहेज के रूप में ब्रिटिश ताज को सौंप दिया था, जिसे बाद में ब्रिटिश सम्राट ने ईस्ट इंडिया कंपनी को मात्र 10 पाउंड के वार्षिक किराए पर दे दिया था।
2. ब्रिटिश ईस्ट India कंपनी ने बंगाल में अपनी प्रथम व्यावसायिक कोठी की स्थापना वर्ष 1651 में शाहशुजा की अनुमति से हुगली में की थी, और वर्ष 1690 में जॉब चारनाक द्वारा कलकत्ता (सुतानाती, कालिकाट और गोविंदपुर) की नींव रखे जाने से पहले ही अंग्रेजों ने बॉम्बे को अपनी मुख्य प्रेसीडेंसी बना लिया था।
3. पुर्तगालियों द्वारा भारतीय समुद्रों में लागू की जाने वाली 'कार्टाज' (Cartaz) व्यवस्था के अंतर्गत एशियाई जहाजों को पुर्तगाली बंदरगाहों से अनुज्ञा पत्र लेना अनिवार्य था, और अफीम, मसालों तथा गोला-बारूद जैसे चुनिंदा सामानों के व्यापार पर पुर्तगाली क्राउन का एकाधिकार था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की सामाजिक संरचना, धार्मिक विश्वासों और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सिंधु सभ्यता की मुहरों (Seals) पर सबसे अधिक बार एक काल्पनिक एकसिंगी पशु (Unicorn) का अंकन मिलता है, जिसके बाद कुबड़ वाले सांड (Humped Bull) का स्थान आता है।
2. लोथल और कालीबंगा दोनों ही सैंधव स्थलों से अग्नि वेदियाँ (Fire Altars) या हवन कुंड के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो यहाँ के लोगों द्वारा किसी प्रकार के अनुष्ठान या सार्वजनिक यज्ञ किए जाने का संकेत देते हैं।
3. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे की विभिन्न तकनीकों और शस्त्र निर्माण से पूरी तरह परिचित थे, जिसका प्रमाण कालीबंगा और हड़प्पा से प्राप्त बड़े पैमाने पर लोहे के अस्त्र-शस्त्रों से मिलता है।
4. इस सभ्यता में मातृसत्तात्मक समाज के संकेत मिलते हैं क्योंकि यहाँ से बड़ी संख्या में पकी हुई मिट्टी (Terracotta) की बनी मातृदेवी की मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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