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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक स्वरूप के संदर्भ में विभिन्न इतिहासकारों के प्रसिद्ध मतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. आर.सी. मजुमदार (R.C. Majumdar) ने अपनी पुस्तक 'द सिपाही म्यूटनी एंड द रिवोल्ट ऑफ 1857' में यह सुविख्यात मत व्यक्त किया था कि 'तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो पहला, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।'
  2. 2. ब्रिटिश इतिहासकार सर जॉन सीले (Sir John Seeley) ने 1857 के विद्रोह को 'पूर्णतया देशभक्तिहीन और स्वार्थी सिपाही विद्रोह' (Entirely unpatriotic and selfish sepoy mutiny) करार दिया था, जिसका समर्थन किसी भी भारतीय वर्ग द्वारा नहीं किया गया था।
  3. 3. विनायक दामोदर सावरकर (V.D. Savarkar) ने वर्ष 1909 में प्रकाशित अपनी ऐतिहासिक कृति 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस - 1857' में इस घटना को सुनियोजित रूप से भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम बताया था।
  4. 4. बेंजामिन डिजरायली (Benjamin Disraeli) ने ब्रिटिश संसद में यह तर्क दिया था कि 1857 का विद्रोह केवल एक साधारण सैनिक विद्रोह नहीं था, बल्कि यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक व्यापक 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National Revolt) था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप और उसकी प्रकृति को लेकर विभिन्न इतिहासकारों, विचारकों और ब्रिटिश राजनेताओं ने अपने भिन्न-भिन्न और परस्पर विरोधी दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं। डॉ. आर.सी. मजुमदार का प्रसिद्ध कथन था कि यह विद्रोह न तो पहला, न राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था। सर जॉन सीले ने इसे एक देशभक्तिहीन सिपाही विद्रोह माना था। इसके विपरीत, वी.डी. सावरकर ने इसे 'भारतीय स्वतंत्रता का पहला संग्राम' करार दिया, जबकि ब्रिटिश संसद में कंजर्वेटिव पार्टी के नेता बेंजामिन डिजरायली ने इसे एक राष्ट्रीय विद्रोह (National Revolt) के रूप में मान्यता दी थी। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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