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History of India
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19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और बाद में ब्रह्म समाज ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, जातिगत कठोरता और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का पुरजोर विरोध किया, तथा उपनिषदों के अद्वैत वेदांत पर आधारित एकेश्वरवाद का प्रचार किया।
  2. 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों की अचूकता व अपौरुषेयता को स्वीकार करते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद और कर्मकांड का खंडन किया, साथ ही शुद्धि आंदोलन के माध्यम से धर्मांतरित हिंदुओं की वापसी का मार्ग प्रशस्त किया।
  3. 3. वर्ष 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए ऐतिहासिक भाषण के पश्चात, उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस के विचारों को अमलीजामा पहनाने के लिए वर्ष 1897 में कलकत्ता के समीप 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांडों का प्रसार करना था।
  4. 4. प्रार्थना समाज की स्थापना बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा महादेव गोविंद रानडे और आर.जी. भंडारकर के सहयोग से की गई थी, जिसने मुख्य रूप से अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा और दलितोद्धार जैसे सामाजिक सुधारों पर विशेष बल दिया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 4 सही हैं। राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में 'आत्मीय सभा' और 1828 में विकिपीडिया संदर्भ के रूप में ब्रह्म समाज की स्थापना की गई, जो एकेश्वरवाद और सामाजिक सुधार पर आधारित था। स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना कर वेदों को सर्वोपरि माना तथा शुद्धि आंदोलन चलाया। प्रार्थना समाज की स्थापना बंबई में सामाजिक सुधारों के लिए की गई थी। कथन 3 गलत है क्योंकि 'रामकृष्ण मिशन' (1897) का उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांडों का प्रसार करना नहीं, बल्कि व्यावहारिक वेदांत, मानव सेवा, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के कार्यों को बढ़ावा देना था।
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→ गदर पार्टी और उससे जुड़े क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गदर पार्टी की स्थापना वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में की गई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष सोहन सिंह भकना थे और लाला हरदयाल इसके प्रमुख विचारकों व संस्थापकों में शामिल थे। 2. इस पार्टी द्वारा 'गदर' नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन उर्दू, गुरुमुखी और गुजराती के अतिरिक्त मराठी तथा पश्तो भाषा में भी किया जाता था, ताकि विभिन्न क्षेत्रों के अप्रवासी भारतीयों को जोड़ा जा सके। 3. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर पार्टी के आह्वान पर हजारों प्रवासी भारतीय कैलिफोर्निया और कनाडा से जहाज पकड़कर भारत लौटे, जिन्हें 'कोमागाटा मारू' घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा बिना किसी मुकदमे के रिहा कर दिया गया था। 4. गदर पार्टी के नेताओं ने पंजाब में ब्रिटिश सेना के भारतीय सिपाहियों के बीच गुप्त रूप से विद्रोह भड़काने और शस्त्रागारों पर कब्जा करने की एक विस्तृत योजना बनाई थी, किंतु मुखबिरी के कारण यह 'गदर षड्यंत्र' असफल हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सिंधु घाटी सभ्यता की परिपक्व अवस्था और उसकी विभिन्न पुरातात्विक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हड़प्पा सभ्यता के स्थलों में से केवल 'चन्हूदड़ो' ही एक ऐसा पुरास्थल था जो रक्षा प्राचीर (Fortification) से पूरी तरह रहित था, और यहाँ से मनके बनाने के कारखाने तथा वक्राकार ईंटों के साक्ष्य मिलते हैं। 2. बनावली से मिट्टी का बना हुआ 'हल' का प्रतिरूप (Terracotta plough) प्राप्त हुआ है, जो कृषि कार्यों में इस उपकरण के प्रयोग को प्रमाणित करता है, जबकि कालीबंगा से जुते हुए खेतों के साक्ष्य (Ploughed field) प्राप्त हुए हैं जिनकी जुताई ग्रिड पद्धति पर आधारित थी। 3. धौलाविरा नगर को सामान्यतः अन्य सैंधव स्थलों की तरह दो भागों (गढ और निचला नगर) में विभाजित न करके, तीन प्रमुख भागों — गढ, मध्यम नगर और निचला नगर — में विभाजित किया गया था, और यहाँ से एक अद्वितीय 'जल प्रबंधन प्रणाली' (Water Management System) के साक्ष्य मिले हैं। 4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे की धातुकर्म तकनीक से पूरी तरह परिचित थे और लोथल तथा मोहनजोदड़ो से बड़े पैमाने पर लोहे के अस्त्र-शस्त्रों का उत्पादन किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को की गई थी, और इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक में 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया था। 2. लार्ड कर्ज़न द्वारा प्रस्तुत बंगाल विभाजन का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक सुधार बताना था, किंतु इसका वास्तविक उद्देश्य बंगाल के बढ़ते हुए राजनीतिक और राष्ट्रीय प्रभाव को कमजोर करना तथा सांप्रदायिक आधार पर राजनीतिक फूट डालना था। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल में राष्ट्रीय शिक्षा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नवंबर 1905 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष सतेंद्र नाथ बोस थे। 4. कलकत्ता के प्रसिद्ध कवि मुकुंद दास द्वारा रचित लोकप्रिय गीत 'आमार सोनार बांग्ला' इस आंदोलन का प्रेरणास्त्रोत बना, जिसे बाद में बांग्लादेश ने अपना राष्ट्रीय गान बनाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → बौद्ध धर्म और जैन धर्म के संप्रदायों, दार्शनिक मान्यताओं तथा उनके ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के भीतर हीनयान और महायान के विभाजन के अतिरिक्त, महायान परंपरा के भीतर शून्यवाद (माध्यमिक) के संस्थापक नागार्जुन थे, जबकि विज्ञानवाद (योगचार) के प्रवर्तक असंग और उनके भाई वासुबंधु थे। 2. जैन धर्म के श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों के विभाजन के बाद, श्वेतांबर संप्रदाय के अंतर्गत मखलि गोशाल द्वारा 'आजीविका' संप्रदाय की स्थापना की गई, जो जैन दर्शन से पूर्णतः भिन्न नियतिवादी विचारधारा थी। 3. जैन दर्शन में कर्म के बंधन से मुक्ति और जीव की शुद्धि के लिए 'निर्जरा' (संचित कर्मों का क्षय करना) और 'संवर' (नए कर्मों के प्रवाह को रोकना) को अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना गया है। 4. महात्मा बुद्ध ने अपने संघ में महिलाओं के प्रवेश को प्रारंभ से ही पूर्ण स्वीकृति दे दी थी, और उनके आग्रह पर ही उनकी माता महाप्रजापति गौतमी संघ में प्रवेश पाने वाली प्रथम भिक्षुणी बनी थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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