History of India
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दक्षिण भारत के राजवंशों और वर्धन राजवंश के प्रशासनिक, कलात्मक एवं सैन्य विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बावजूद शैव संत अप्पर के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार किया था, और उसने 'मत्तविलास प्रहसन' नामक प्रसिद्ध संस्कृत नाटक की रचना की थी जो बौद्ध और जैन भिक्षुओं के पाखंड पर व्यंग्य करता है।
- 2. बादामी के चालुक्य राजवंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय के 'ऐहोल अभिलेख' की रचना उसके दरबारी कवि रविकीर्ति ने की थी, जिसमें कालिदास और भारवि की काव्य शैली का उल्लेख मिलता है तथा इसमें चालुक्य राजाओं द्वारा हर्षवर्द्धन पर विजय का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन किया गया है।
- 3. चोल सम्राट राजराज प्रथम ने श्रीलंका (सिंघल) के उत्तरी भाग पर आक्रमण कर वहाँ अधिकार कर लिया था और इस क्षेत्र का नाम 'मुचोलमंडलम' रखकर पोलन्नरुआ को अपनी उत्तरी राजधानी बनाया था, तथा उसने तंजावुर में प्रसिद्ध 'राजराजेश्वर' (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया था।
- 4. वर्धन वंश के शासक हर्षवर्धन के शासनकाल में प्रयाग के कुंभ मेले (महाक्षेत्र) के अवसर पर प्रत्येक पाँच वर्ष पर 'प्रयाग सभा' का आयोजन किया जाता था, जिसमें हर्ष अपनी संपूर्ण संपत्ति दान कर देता था और यहाँ तक कि अपनी बहन राज्यश्री से वस्त्र मांगकर धारण करता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि पल्लव नरेश महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने शासन के शुरुआती दौर में जैन धर्म अपनाया था, बाद में शैव संत अप्पर के प्रभाव से शैव बन गए और उन्होंने 'मत्तविलास प्रहसन' की रचना की। कथन 2 सही है; पुलकेशिन द्वितीय का ऐहोल अभिलेख रविचर्ति (रविकीर्ति) द्वारा रचित है जिसमें नर्मदा के तट पर हर्ष की पराजय का वर्णन है। कथन 3 गलत है क्योंकि राजराज प्रथम ने श्रीलंका विजय के बाद उत्तरी श्रीलंका का नाम 'मुम्मुडिशोलमंडलम' रखा था और अनुराधापुर के स्थान पर पोलन्नरुआ को राजधानी बनाया था, किंतु उसने राजराजेश्वर मंदिर का निर्माण तो कराया था, परंतु श्रीलंका विजय का विवरण उस रूप में नहीं था। कथन 4 सही है, ह्वेनसांग के विवरण के अनुसार हर्षवर्धन हर 5 वर्ष पर प्रयाग की महामोक्ष परिषद में अपना सर्वस्व दान कर देता था। अतः विकल्प (b) सही है।
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित…
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, केंद्रीय नियंत्रण…
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के नेतृत्वकर्ताओं और ब्रिटिश सेना द्वारा इन केंद्रों के दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह (डंका शाह) ने किया था, जिन्हें अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने पर कर्नल नील के नेतृत्व में फाँसी दे दी गई थी और ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल ने इस केंद्र का दमन किया था।
2. बरेली में रोहिलखंड के भूतपूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह का नेतृत्व किया था, किंतु अंततः ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने भारी सैन्य कार्रवाई कर बरेली पर पुनः अधिकार कर लिया और खान बहादुर खान को मृत्युदंड दिया गया।
3. इलाहाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जहाँ कर्नल नील ने अत्यंत क्रूरता के साथ विद्रोहियों का दमन किया और बाद में लियाकत अली को गिरफ्तार कर आजीवन काले पानी की सजा दी गई।
4. अवध और रोहिलखंड क्षेत्र में विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों ने विद्रोही नेताओं और स्थानीय जनता को कुचलने के लिए सामूहिक दंड, सार्वजनिक फांसी और तोप से उड़ाने जैसी बर्बर नीतियों का उपयोग किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में, चंद्रगुप्त मौर्य, अशोक और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन ग्रंथों के अनुसार, अपने जीवन के अंतिम वर्षों में चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन भिक्षुभद्रबाहु से दीक्षा ली थी और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में संथारा (संलेखना) पद्धति द्वारा अपने प्राण त्याग दिए थे।
2. अशोक के शिलालेखों में कलिंग युद्ध का विस्तृत वर्णन उसके 13वें शिलालेख में मिलता है, जिसमें युद्ध के भीषण रक्तपात से द्रवित होकर उसने 'अहिंसा' और 'धम्म' की नीति को अपनाया था, तथा कलिंग की राजधानी धौलि या तोषाली बनाई गई थी।
3. मौर्य प्रशासन में 'अर्थशास्त्र' के अनुसार सर्वोच्च नागरिक न्यायालयों को 'धर्मस्थीय' और आपराधिक न्यायालयों को 'कंटकशोधन' कहा जाता था, जिनका मुख्य न्यायाधीश 'प्रदेशा' या 'प्रदेष्टा' होता था।
4. अशोक के शासनकाल में आयोजित पाटलिपुत्र की तृतीय बौद्ध संगीति की अध्यक्षता मोग्गालिपुत्त तिस्स ने की थी, जिन्होंने इसी अवसर पर 'अधिधर्मपिटक' (कथवत्थु) की रचना की थी तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए विभिन्न देशों में प्रचारक भेजे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाल लिया था और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा प्रतिरोध किया था।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने फैजाबाद और रोहिलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था तथा ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल और आउट्राम को कड़ी चुनौती दी थी।
3. लखनऊ की घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश सेनापति हेनरी लॉरेंस विद्रोहियों के हमलों में मारे गए थे, और अंततः मार्च 1858 में सर कॉलिन कैंपबेल ने भारी सैन्य बल के साथ लखनऊ पर पुनः अधिकार कर लिया था।
4. बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था और उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा आजीवन पेंशन देकर लंदन में रहने की अनुमति दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके परिणामस्वरूप प्रारंभ हुए स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा सर्वप्रथम 19 जुलाई 1905 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्ज़न द्वारा की गई थी, और यह विभाजन प्रभावी रूप से 16 अक्टूबर 1905 से लागू हुआ था, जिसे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया था।
2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के प्रसिद्ध लोक गीतों, कविताओं और सांस्कृतिक प्रतीकों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया था; इसी क्रम में रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित गीत 'आमार सोनार बांग्ला' इस आंदोलन का सबसे बड़ा प्रेरणास्त्रोत बना, जिसे आगे चलकर वर्ष 1971 में बांग्लादेश ने अपना राष्ट्रीय गान बनाया।
3. कलकत्ता के टाउन हॉल में 7 अगस्त 1905 को आयोजित ऐतिहासिक बैठक में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा की गई और ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया गया, जिसका नेतृत्व मुख्य रूप से सुरेंद्रनाथ बनर्जी, कृष्ण कुमार मित्र और आनंद मोहन बोस जैसे उदारवादी नेताओं ने किया था।
4. स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के दौरान छात्रों की भागीदारी को रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा 'कार्लाइल सर्कुलर' (Carlyle Circular) जारी किया गया था, जिसके तहत आंदोलन में भाग लेने वाले विद्यार्थियों और संस्थानों को सरकारी सहायता, छात्रवृत्ति तथा मान्यता वापस लेने की धमकी दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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