History of India
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मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में, चंद्रगुप्त मौर्य, अशोक और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जैन ग्रंथों के अनुसार, अपने जीवन के अंतिम वर्षों में चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन भिक्षुभद्रबाहु से दीक्षा ली थी और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में संथारा (संलेखना) पद्धति द्वारा अपने प्राण त्याग दिए थे।
- 2. अशोक के शिलालेखों में कलिंग युद्ध का विस्तृत वर्णन उसके 13वें शिलालेख में मिलता है, जिसमें युद्ध के भीषण रक्तपात से द्रवित होकर उसने 'अहिंसा' और 'धम्म' की नीति को अपनाया था, तथा कलिंग की राजधानी धौलि या तोषाली बनाई गई थी।
- 3. मौर्य प्रशासन में 'अर्थशास्त्र' के अनुसार सर्वोच्च नागरिक न्यायालयों को 'धर्मस्थीय' और आपराधिक न्यायालयों को 'कंटकशोधन' कहा जाता था, जिनका मुख्य न्यायाधीश 'प्रदेशा' या 'प्रदेष्टा' होता था।
- 4. अशोक के शासनकाल में आयोजित पाटलिपुत्र की तृतीय बौद्ध संगीति की अध्यक्षता मोग्गालिपुत्त तिस्स ने की थी, जिन्होंने इसी अवसर पर 'अधिधर्मपिटक' (कथवत्थु) की रचना की थी तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए विभिन्न देशों में प्रचारक भेजे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने अंतिम दिनों में जैन धर्म अपना लिया था। अशोक का 13वां शिलालेख कलिंग युद्ध के परिणामों का सजीव वर्णन करता है। कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में 'धर्मस्थीय' (दीवानी) और 'कंटकशोधन' (फौजदारी) न्यायलयों का उल्लेख है। पाटलिपुत्र की तृतीय बौद्ध संगीति अशोक के काल में ही आयोजित हुई थी। मौर्य साम्राज्य के प्रशासनिक और ऐतिहासिक स्वरूप के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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गदर पार्टी और क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सोहन सिंह भकना द्वारा वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' की स्थापना की गई थी, जिसे आगे चलकर 'गदर पार्टी' के नाम से जाना गया और लाला हरदयाल इसके प्रमुख विचारक एवं मार्गदर्शक थे।
2. गदर पार्टी द्वारा 'द गदर' नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन मुख्य रूप से उर्दू और गुरुमुखी में किया जाता था, जिसके प्रत्येक अंक के पहले पृष्ठ पर अंग्रेजी राज का कच्चा चिट्ठा शीर्षक से ब्रिटिश शासन के शोषणकारी चरित्र को उजागर किया जाता था।
3. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर पार्टी के क्रांतिकारियों ने 'कामागाटामारू' घटना से प्रेरणा लेकर भारत पहुँचकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करने की योजना बनाई थी, किंतु ब्रिटिश गुप्तचर तंत्र की सक्रियता के कारण यह योजना विफल हो गई।
4. गदर पार्टी के संस्थापकों में रास बिहारी बोस का भी महत्वपूर्ण योगदान था, जो भारत में पकड़े जाने के बाद अमेरिका भागे और वहीं से गदर आंदोलन का संपूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल नीति) का प्रतिपादन किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर के व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करना था।
2. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 ई. में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा छीनकर पुर्तगालियों का मुख्य प्रशासनिक और सामरिक केंद्र बनाया तथा सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया।
3. नूनू डी कुन्हा ने पुर्तगाली राजधानी को कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया तथा 1534 ई. में बेसिन और 1535 ई. में दीव के क्षेत्रों को गुजरात के शासक बहादुर शाह से समझौते के तहत प्राप्त किया।
4. पुर्तगालियों द्वारा हिंद महासागर में जहाजों के आवागमन को नियंत्रित करने और कर वसूलने के लिए 'कार्टाज-अर्मडा' व्यवस्था लागू की गई थी, जिसके तहत मुगल सम्राट अकबर और शाहजहाँ जैसे शासकों को भी पुर्तगालियों से कार्टाज (परमिट) खरीदना पड़ता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया, किंतु वे हिंदू धर्म के मूल दार्शनिक आधार यानी उपनिषदों की तार्किकता और एकेश्वरवाद में पूर्ण विश्वास रखते थे।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय एवं अचूक मानते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद, बाल विवाह तथा छुआछूत का कड़ा विरोध किया, लेकिन उन्होंने पाश्चात्य शिक्षा का समर्थन करते हुए अंग्रेजी माध्यम की उच्च शिक्षण संस्थाओं की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभाई।
3. केशव चंद्र सेन के ब्रह्म समाज से अलग होने के पश्चात, देवेंद्रनाथ टैगोर ने 'आदि ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जबकि केशव चंद्र सेन ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' का गठन किया जिसमें बाल विवाह के विरुद्ध कानून बनवाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी, किंतु उन्होंने अपनी ही अल्पवयस्क पुत्री का विवाह कूचबिहार के राजा के साथ करक इस आंदोलन को आघात पहुँचाया।
4. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग द्वारा महादेव गोविंद रानाडे और आर. जी. भंडारकर के सहयोग से बंबई में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा और दलितोद्धार जैसे सामाजिक सुधारों को बढ़ावा देना था।
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दक्षिण भारत के राजवंशों और वर्धन राजवंश के प्रशासनिक, कलात्मक एवं सैन्य विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बावजूद शैव संत अप्पर के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार किया था, और उसने 'मत्तविलास प्रहसन' नामक प्रसिद्ध संस्कृत नाटक की रचना की थी जो बौद्ध और जैन भिक्षुओं के पाखंड पर व्यंग्य करता है।
2. बादामी के चालुक्य राजवंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय के 'ऐहोल अभिलेख' की रचना उसके दरबारी कवि रविकीर्ति ने की थी, जिसमें कालिदास और भारवि की काव्य शैली का उल्लेख मिलता है तथा इसमें चालुक्य राजाओं द्वारा हर्षवर्द्धन पर विजय का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन किया गया है।
3. चोल सम्राट राजराज प्रथम ने श्रीलंका (सिंघल) के उत्तरी भाग पर आक्रमण कर वहाँ अधिकार कर लिया था और इस क्षेत्र का नाम 'मुचोलमंडलम' रखकर पोलन्नरुआ को अपनी उत्तरी राजधानी बनाया था, तथा उसने तंजावुर में प्रसिद्ध 'राजराजेश्वर' (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया था।
4. वर्धन वंश के शासक हर्षवर्धन के शासनकाल में प्रयाग के कुंभ मेले (महाक्षेत्र) के अवसर पर प्रत्येक पाँच वर्ष पर 'प्रयाग सभा' का आयोजन किया जाता था, जिसमें हर्ष अपनी संपूर्ण संपत्ति दान कर देता था और यहाँ तक कि अपनी बहन राज्यश्री से वस्त्र मांगकर धारण करता था।
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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