History of India
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प्राचीन भारतीय दर्शन और जैन धर्म के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जैन दर्शन के सप्तभंगी सिद्धांत (स्यादवाद या अनेकांतवाद) के अनुसार, किसी भी वस्तु या सत्य के एकाधिक पहलू हो सकते हैं और मानवीय ज्ञान की प्रकृति सापेक्ष होती है।
- 2. महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित जैन धर्म के पांच महाव्रतों में पार्श्वनाथ द्वारा जोड़े गए चार व्रतों (सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह) में पाँचवें व्रत के रूप में 'ब्रह्मचर्य' को जोड़ा गया था।
- 3. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुयायी पूर्ण मोक्ष प्राप्ति और अपने धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन के लिए वस्त्र त्यागने को अनिवार्य मानते हैं, जबकि दिगंबर संप्रदाय वस्त्र पहनने की अनुमति देता है।
- 4. जैन संगीति के संदर्भ में, प्रथम जैन संगीति का आयोजन पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुआ था, जिसके दौरान 'बारह अंगों' का संकलन किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: जैन दर्शन का 'अनेकांतवाद' (विविधता का सिद्धांत) और 'स्यादवाद' (सापेक्षता का सिद्धांत) यह मानता है कि सत्य बहुआयामी है। कथन 2 सही है: चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने पार्श्वनाथ द्वारा दिए गए चार व्रतों में पाँचवाँ व्रत 'ब्रह्मचर्य' जोड़ा था। कथन 3 गलत है क्योंकि श्वेतांबर संप्रदाय श्वेत वस्त्र धारण करता है, जबकि दिगंबर संप्रदाय के साधु पूर्ण मोक्ष प्राप्ति के लिए वस्त्र त्यागने (नग्न रहने) को अनिवार्य मानते हैं। कथन 4 सही है: मौर्य काल में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में पाटलिपुत्र में प्रथम जैन संगीति हुई थी। जैन धर्म के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे और छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित 'अष्टप्रधान' तथा सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी महाराज के केंद्रीय प्रशासन में 'अष्टप्रधान' के आठ मंत्रियों में से 'पेशवा' (प्रधानमंत्री) के पश्चात दूसरा सबसे महत्वपूर्ण मंत्री 'न्यायाधीश' था, जो संपूर्ण साम्राज्य में नागरिक और सैन्य मामलों के सर्वोच्च न्यायालय का प्रमुख होता था और सेना का नेतृत्व भी करता था।
2. शिवाजी ने राजस्व सुधारों के तहत मलिक अंबर की प्रणाली को आधार बनाते हुए 'काठी' और 'बीघा' को भूमि माप की मानक इकाई के रूप में अपनाया था, तथा कुल उपज का 40% भाग भू-राजस्व के रूप में वसूला जाता था जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाकर 50% तक किया जा सकता था।
3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के बाह्य क्षेत्रों से प्राप्त किए जाने वाले प्रमुख कर थे, जिसमें 'सरदेशमुखी' को शिवाजी अपना पैतृक अधिकार (देशमुख होने के नाते) मानते थे और यह कुल राजस्व का 10% वसूला जाता था।
4. शिवाजी की सैन्य व्यवस्था में घुड़सवार सेना को दो प्रमुख श्रेणियों—'बरगीर' (जिन्हें राज्य की ओर से घोड़े और शस्त्र प्रदान किए जाते थे) और 'सिलहदार' (जो स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर सेना में आते थे)—में विभाजित किया गया था, तथा सैनिकों को लूट के माल में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह को विभिन्न क्षेत्रों में दबाने वाले ब्रिटिश अधिकारियों और उनके द्वारा किए गए दमन अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. जॉन निकलसन — दिल्ली में विद्रोह को कुचलने के दौरान कश्मीरी गेट पर आक्रमण करते समय गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
2. कॉलिन कैंपबेल — कानपुर और लखनऊ में विद्रोही ताकतों के विरुद्ध सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया तथा लखनऊ को पुनः अंग्रेजों के अधिकार में लिया।
3. ह्यू रोज — झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे के विरुद्ध सैन्य अभियान का नेतृत्व किया और झांसी को पराजित किया।
4. जेम्स आउट्राम — बिहार के जगदीशपुर में बाबू कुंवर सिंह की सेना के विरुद्ध अभियान का मुख्य नेतृत्व किया और कुंवर सिंह को युद्ध में मार गिराया।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और विशेषकर अकबर से लेकर औरंगजेब के शासनकाल के दौरान भू-राजस्व प्रणालियों, मंसबदारी व्यवस्था तथा जागीरदारी संकट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल के सहयोग से विकसित 'दहसाला' (या जब्ती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और उसके औसत बाजार मूल्य का एक-तिहाई हिस्सा राज्य के भू-राजस्व के रूप में निर्धारित किया जाता था, तथा भूमि को पोलज, परती, चाचर और बंजर श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था।
2. जहाँगीर के शासनकाल में मंसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' (Du-aspa Sih-aspa) की एक नवीन व्यवस्था शुरू की गई थी, जिसके तहत मंसबदारों को अपने 'जात' (जाति) पद को बढ़ाए बिना ही अतिरिक्त 'सवार' (घोड़े) पदों की संख्या बढ़ाने की अनुमति दी जाती थी।
3. शाहजहाँ के शासनकाल में मनसबदारों और जागीरों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि के कारण 'माहवार' (Mahwar) प्रणाली की शुरुआत हुई, तथा 'खलसा' भूमि के क्षेत्रफल में भारी कमी आने के कारण जागीर प्राप्त करने के लिए अमीरों के बीच तीव्र संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई, जिसे 'जागीरदारी संकट' कहा जाता है।
4. औरंगजेब के शासनकाल के उत्तरार्ध में दक्कन के लंबे और महंगे सैन्य अभियानों के कारण जागीरों की भारी कमी (बे-जागीरी की समस्या) उत्पन्न हो गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए सम्राट ने 'पैका' (Paik) भूमि को जागीर में बदलने के कड़े निर्देश दिए और खालसा भूमि का विस्तार करने के लिए विशेष राजस्व नियमों को लागू किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और विभिन्न राजवंशों (विशेषकर तुगलक और खिलजी वंश) के दौरान अपनाई गई नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य में कृषि उपज का राज्य हिस्सा बढ़ाकर 50% (आधी उपज) कर दिया था और उसने ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक मध्यस्थों—खوت, मुकद्दम और चौधरी—से विशेष विशेषाधिकार छीनकर उन्हें भी अन्य किसानों की तरह कर चुकाने के लिए बाध्य किया था।
2. मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि का निर्णय एक अकाल के समय लिया गया था, जिससे किसानों में भीषण असंतोष फैला, जिसके समाधान के लिए उसने 'दीवान-ए-कोही' (कृषि विभाग) की स्थापना की और 'अमीर-ए-कोदः' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की।
3. फ़िरोज़ शाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार सिंचाई के लिए नहरों का एक विस्तृत जाल बनवाया, जिसमें सतलुज से घग्गर तक जाने वाली 'उलूग खानी' और यमुना से हिसार तक जाने वाली 'राजवाहा' नहरें प्रमुख थीं, तथा उसने सिंचाई कर के रूप में 'हर्क-ए-शर्ब' (कुल उपज का 1/10 भाग) भी वसूलना शुरू किया था।
4. गियासुद्दीन तुगलक ने अपने पूर्ववर्ती खिलजी शासकों की कठोर राजस्व नीतियों को नरम करते हुए 'रसूम-ए-किस्मट' (राजस्व अधिकारियों का पारिश्रमिक) को पुनः बहाल किया और भूमि कर की दर को उपज का एक-तिहाई से एक-चौथाई के बीच सीमित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
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महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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