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History of India
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1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अवध का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय फरवरी 1856 में 'कुशासन के आरोप' (Maladministration) के आधार पर किया गया था, जिसे वहाँ के नवाब वाजिद अली शाह पर लादा गया था, और इस कार्रवाई ने अवध के सैनिकों व किसानों के मन में तीव्र आक्रोश उत्पन्न किया क्योंकि वे अवध को 'हिंदुस्तान की नर्सरी' मानते थे।
  2. 2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के अंतर्गत अंग्रेजों ने पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को संरक्षण प्रदान किया, जिससे दस्तकारों की आर्थिक स्थिति अत्यंत सुदृढ़ हो गई और वे ब्रिटिश शासन के प्रबल समर्थक बन गए।
  3. 3. लॉर्ड डलहौजी द्वारा 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के तहत सतara, जैतपुर, संबलपुर, बघाट, उदयपुर और झाँसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया, जिससे भारतीय शासकों के उत्तराधिकार के अधिकार समाप्त हो गए।
  4. 4. भू-राजस्व की नई प्रणालियों (विशेषकर स्थायी बंदोबस्त और रैयतवाड़ी) के कारण कृषक वर्ग अत्यधिक कर्ज के जाल में फंस गया, जिसके परिणामस्वरूप महाजनों और साहूकारों द्वारा उनकी जमीनों को हड़पे जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में गहरा असंतोष फैल गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

1857 के महान विद्रोह के पीछे राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक कारण निहित थे। कथन 1 सही है क्योंकि फरवरी 1856 में लॉर्ड डलहौजी ने अवध के नवाब वाजिद अली शाह पर कुशासन का झूठा आरोप लगाकर अवध का विलय कर लिया था, जिससे वहाँ के सैनिकों और जनता में भारी रोष फैला। कथन 2 गलत है क्योंकि ब्रिटिश मुक्त व्यापार नीति और औद्योगीकरण के कारण पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग पूरी तरह तबाह हो गए थे, जिससे दस्तकार बेरोजगार हो गए। कथन 3 सही है क्योंकि 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के तहत कई भारतीय रियासतों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया। कथन 4 सही है क्योंकि ब्रिटिश भू-राजस्व प्रणालियों के कारण किसानों पर करों का अत्यधिक बोझ पड़ा और वे महाजनों के चंगुल में फंस गए। 1857 के विद्रोह के विस्तृत इतिहास के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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→ यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीला पानी नीति) का प्रतिपादन किया था जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर में पुर्तगाली नौसैनिक प्रभुत्व स्थापित करना और अरब तथा वेनिस के व्यापारियों के व्यापार को नियंत्रित करना था। 2. अल्फोंसो डी अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के आदिल शाह सुल्तान से गोवा को छीनकर पुर्तगालियों के मुख्य प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्र के रूप में स्थापित किया। 3. निनो डी कुन्हा ने पुर्तगाली गवर्नर बनने के बाद 1530 में पुर्तगालियों की राजधानी को कोचिन से बदलकर गोवा स्थानांतरित किया, और गुजरात के शासक बहादुर शाह के साथ बेसिन की संधि (1534) के माध्यम से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नियंत्रण प्राप्त किया। 4. पुर्तगालियों द्वारा हिंद महासागर से गुजरने वाले अन्य जहाजों के लिए एक प्रणाली लागू की गई थी जिसे 'कार्टेज' (Cartaz) कहा जाता था, जिसके तहत व्यापारियों को कर चुकाना पड़ता था और अफीम तथा काली मिर्च के व्यापार को पूरी तरह से पुर्तगाली क्राउन के एकाधिकार के अधीन रखा गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → छठी शताब्दी ईसा पूर्व में प्राचीन भारत में 'सोलह महाजनपदों' के उदय और उनमें 'मगध साम्राज्य' की सर्वोच्चता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'अश्मक' एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो गोदावरी नदी के तट पर विंध्य पर्वत के दक्षिण में स्थित था। 2. मगध के उत्थान में इसकी भौगोलिक स्थिति का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था; इसकी प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी और बाद में इसे पाटलिपुत्र स्थानांतरित किया गया जो गंगा, सोन और गंडक नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण था। 3. बिम्बिसार (श्रेणिक) ने हरक वंश की नींव रखी और अपने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों (जैसे कौशल, मद्र और वैशाली की राजकुमारियों से विवाह) की नीति अपनाई, तथा अवंती के राजा चण्डप्रद्योत के साथ शत्रुता समाप्त करने के लिए अपने राजवैद्य जीवक को उनकी चिकित्सा हेतु उज्जैन भेजा था। 4. महापद्मनंद ने शिशुनाग वंश के अंतिम शासक को अपदस्थ करके 'नंद वंश' की स्थापना की और पुराणों में उसे 'सर्वक्षत्रांतक' (क्षत्रिय मात्र का नाश करने वाला) तथा 'एकराट्' (एकल संप्रभु शासक) की उपाधि से विभूषित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके स्वरूप के विश्लेषण के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों के प्रसिद्ध कथनों और मतों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जॉन लॉरेंस और सीले — "यह केवल एक देशभक्तिहीन और स्वार्थी सिपाही विद्रोह था, जिसमें किसी भी प्रकार की राष्ट्रीय भावना का सर्वथा अभाव था।" 2. टी.आर. होम्स — "यह बर्बरता और सभ्यता के बीच का संघर्ष था।" 3. वी.डी. सावरकर — "यह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था, जो सुनियोजित और संगठित रूप से ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध लड़ा गया था।" 4. बेंजामिन डिजरायली — "यह राष्ट्रीय विद्रोह नहीं था, बल्कि यह एक सुनियोजित राष्ट्रीय राजनीतिक षड्यंत्र था जिसका उद्देश्य ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकना था।" उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? → 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लॉर्ड डलहौजी द्वारा अपनाई गई 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतों का विलय किया गया था, जिससे भारतीय शासकों और अभिजात वर्ग में তীব্র असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई थी। 2. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक असुविधा अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के तहत यह प्रावधान किया गया कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को उसकी पैतृक संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीय समाज ने धर्म परिवर्तन का षड्यंत्र माना। 3. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों और मुक्त व्यापार (Free Trade) के कारण पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का तीव्र पतन हुआ, जिससे कारीगरों और दस्तकारों की आजीविका पूरी तरह नष्ट हो गई। 4. 1856 में लॉर्ड कैनिंग के शासनकाल में पारित 'सामान्य सेवा Enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के माध्यम से भारतीय सैनिकों के लिए समुद्र पार (Overseas) जाकर सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया, जिससे पारंपरिक हिंदू सैनिकों की धार्मिक मान्यताओं और समुद्र पार यात्रा की वर्जना को सीधी चुनौती मिली। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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