BaalVikas
Menu
History of India
Asked 5 hours ago · Viewed 0 times

मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और विशेषकर अकबर से लेकर औरंगजेब के शासनकाल के दौरान भू-राजस्व प्रणालियों, मनसबदारी व्यवस्था और जागीरदारी संकट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल के सहयोग से विकसित 'दहसाला' (या जब्ती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और उसके औसत बाजार मूल्य का एक-तिहाई हिस्सा राज्य के भू-राजस्व के रूप में निर्धारित किया जाता था, तथा भूमि को पोलज, परती, चाचर और बंजर श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था।
  2. 2. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' (Du-aspa Sih-aspa) की एक नवीन व्यवस्था शुरू की गई थी, जिसके तहत मनसबदारों को अपने 'जात' (जाति) पद को बढ़ाए बिना ही अतिरिक्त 'सवार' (घोड़े) पदों की संख्या बढ़ाने की अनुमति दी जाती थी।
  3. 3. शाहजहाँ के शासनकाल में मनसबदारों और जागीरों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि के कारण 'माहवार' (Mahwar) प्रणाली की शुरुआत हुई, तथा 'खलसा' भूमि के क्षेत्रफल में भारी कमी आने के कारण जागीर प्राप्त करने के लिए अमीरों के बीच तीव्र संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई, जिसे 'जागीरदारी संकट' कहा जाता है।
  4. 4. औरंगजेब के शासनकाल के उत्तरार्ध में दक्कन के लंबे और महंगे सैन्य अभियानों के कारण जागीरों की भारी कमी (बे-जागीरी की समस्या) उत्पन्न हो गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए सम्राट ने 'पैका' (Paik) भूमि को जागीर में बदलने के कड़े निर्देश दिए और खालसा भूमि का विस्तार करने के लिए विशेष राजस्व नियमों को लागू किया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन मुगलकालीन प्रशासनिक, राजस्व और सैन्य व्यवस्था के ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार बिल्कुल सही हैं। अकबर के काल में राजा टोडरमल द्वारा 'दहसाला प्रणाली' (या जब्ती प्रणाली) लागू की गई थी जिसमें पिछले 10 वर्षों के औसत उत्पादन और मूल्य के आधार पर राजस्व तय होता था और भूमि के चार प्रकार (पोलज, परती, चाचर, बंजर) थे। जहाँगीर ने मनसबदारी व्यवस्था में 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' व्यवस्था जोड़ी जिससे बिना जात पद बढ़ाए सवार पद बढ़ाए जा सकते थे। शाहजहाँ के शासनकाल में जागीरों की कमी और मनसबदारों की संख्या बढ़ने से 'माहवार प्रणाली' आई और जागीरदारी संकट गहराया। औरंगजेब के काल में दक्कन अभियानों के कारण बे-जागीरी की समस्या उत्पन्न हुई थी। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:
अगला प्रश्न → यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर… ← पिछला प्रश्न 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक और आर्थिक कारणों के…

Related Questions

→ छठी शताब्दी ईसा पूर्व में प्राचीन भारत में 'सोलह महाजनपदों' के उदय और उनमें 'मगध साम्राज्य' की सर्वोच्चता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'अश्मक' एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो गोदावरी नदी के तट पर विंध्य पर्वत के दक्षिण में स्थित था। 2. मगध के उत्थान में इसकी भौगोलिक स्थिति का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था; इसकी प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी और बाद में इसे पाटलिपुत्र स्थानांतरित किया गया जो गंगा, सोन और गंडक नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण था। 3. बिम्बिसार (श्रेणिक) ने हरक वंश की नींव रखी और अपने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों (जैसे कौशल, मद्र और वैशाली की राजकुमारियों से विवाह) की नीति अपनाई, तथा अवंती के राजा चण्डप्रद्योत के साथ शत्रुता समाप्त करने के लिए अपने राजवैद्य जीवक को उनकी चिकित्सा हेतु उज्जैन भेजा था। 4. महापद्मनंद ने शिशुनाग वंश के अंतिम शासक को अपदस्थ करके 'नंद वंश' की स्थापना की और पुराणों में उसे 'सर्वक्षत्रांतक' (क्षत्रिय मात्र का नाश करने वाला) तथा 'एकराट्' (एकल संप्रभु शासक) की उपाधि से विभूषित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के नेतृत्वकर्ताओं और उनके दमनकर्ता ब्रिटिश अधिकारियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद — मौलवी अहमदुल्लाह शाह (नेतृत्व) एवं जनरल कैंपबेल (दमनकर्ता) 2. बरेली — खान बहादुर खान (नेतृत्व) एवं सर कॉलिन कैंपबेल व विंसेंट आयर (दमनकर्ता) 3. इलाहाबाद — मौलवी लियाकत अली (नेतृत्व) एवं कर्नल नील (दमनकर्ता) 4. बरेली में विद्रोह के दमन के पश्चात खान बहादुर खान को पकड़कर फांसी दे दी गई थी, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों ने धोखे से पकड़कर मार डाला था। उपर्युक्त युग्मों और कथनों में से कौन-से सही हैं? → ब्रिटिश शासनकाल में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थायी बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जॉन शोर की योजना को आधार बनाते हुए लॉर्ड कार्नवालिस ने 1793 में जमींदारों को भूमि का स्वामी मान लिया, जिसमें राज्य का हिस्सा कुल लगान का 10/11वां भाग और जमींदारों का हिस्सा 1/11वां भाग निर्धारित किया गया था। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' के अंतर्गत सरकार और काश्तकार (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था, जिसमें भूमि का स्वामित्व किसानों के पास रहता था और लगान की दरें अत्यधिक होने के कारण अकाल या सूखा पड़ने पर भी इसमें कोई छूट नहीं दी जाती थी। 3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब क्षेत्र में लागू 'महालवारी व्यवस्था' में भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम (महाल) या ग्राम समुदाय के साथ सामूहिक रूप से किया जाता था, और इसमें लगान वसूली की जिम्मेदारी सामान्यतः ग्राम के मुखिया या लंबरदार को सौंपी जाती थी। 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों में ब्रिटिश भारत के कुल कृषि योग्य क्षेत्रफल के संदर्भ में 'रयतवारी व्यवस्था' का विस्तार सबसे अधिक क्षेत्र (लगभग 51%) पर था, जबकि 'स्थाई बंदोबस्त' लगभग 19% और 'महालवारी व्यवस्था' लगभग 30% भू-भाग पर लागू थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके स्वरूप के विश्लेषण के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों के प्रसिद्ध कथनों और मतों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जॉन लॉरेंस और सीले — "यह केवल एक देशभक्तिहीन और स्वार्थी सिपाही विद्रोह था, जिसमें किसी भी प्रकार की राष्ट्रीय भावना का सर्वथा अभाव था।" 2. टी.आर. होम्स — "यह बर्बरता और सभ्यता के बीच का संघर्ष था।" 3. वी.डी. सावरकर — "यह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था, जो सुनियोजित और संगठित रूप से ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध लड़ा गया था।" 4. बेंजामिन डिजरायली — "यह राष्ट्रीय विद्रोह नहीं था, बल्कि यह एक सुनियोजित राष्ट्रीय राजनीतिक षड्यंत्र था जिसका उद्देश्य ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकना था।" उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.