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History of India
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सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) के भारत में विस्तार और प्रशासनिक तथा व्यापारिक सुदृढ़ीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1668 में ब्रिटिश सम्राट चार्ल्स द्वितीय ने पुर्तगाली राजकुमारी से विवाह में दहेज के रूप में प्राप्त बॉम्बे (मुंबई) द्वीप को मात्र 10 पाउंड वार्षिक किराए पर ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया था, जिसे बाद में गेराल्ड औग्यार ने एक मजबूत व्यापारिक और किलेबंद शहर के रूप में विकसित किया।
  2. 2. जॉब चारनाक ने 1690 में हुगली के स्थान पर सुताती (Sutanuti), कलकता (Kalikata) और गोविंदपुर (Govindpur) नामक तीन गाँवों को मिलाकर कलकत्ता शहर की नींव रखी, और यहीं पर 'फोर्ट विलियम' की स्थापना की गई जिसका प्रथम अध्यक्ष चार्ल्स आयर को बनाया गया था।
  3. 3. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुख्शियर द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को एक शाही फरमान जारी किया गया था, जिसे इतिहासकार ऑर्म (Orme) ने 'कंपनी का मैग्ना कार्टा' कहा, जिसके तहत कंपनी को बंगाल, हैदराबाद और गुजरात में बिना चुंगी (ड्यूप्री) कर चुकाए स्वतंत्र व्यापार करने का पूर्ण अधिकार मिल गया।
  4. 4. ब्रिटिश कंपनी द्वारा बंगाल में व्यापारिक विशेषाधिकारों के दुरुपयोग को रोकने के लिए 'दस्तक' (Dastak) नामक निःशुल्क व्यापारिक परमिट जारी किए जाते थे, जिनका दुरुपयोग कंपनी के अधिकारियों द्वारा अपने निजी व्यापार के लिए भी किया जाने लगा जिससे स्थानीय नवाबों के साथ उनके संबंध अत्यधिक तनावपूर्ण हो गए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि फर्रुख्शियर के फरमान द्वारा कंपनी को बंगाल में 3000 वार्षिक कर के बदले मुक्त व्यापार की अनुमति मिली थी, लेकिन हैदराबाद और गुजरात में उन्हें ऐसा व्यापक और संपूर्ण कर-मुक्त अधिकार प्राप्त नहीं था। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रारंभिक विस्तार के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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